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रिपोर्ट: कागजों पर 7 लाख कंपनियां, सिर्फ एक महीने में रजिस्‍टर्ड हुईं 11,625 फर्म, कइयों पर गिरी सरकार की गाज

31 अक्टूबर, 2018 तक देश में कुल 18.10 लाख कपंनियां रजिस्टर्ड हुईं। जिनमें 11.16 लाख काम कर रहीं थीं, जबकि 6.96 लाख कपंनियां काम में बिल्कुल नहीं थीं। 11.6 लाख कंपनियों में 11.09 लाख लिमिटेड शेयर, 6,668 गारंटी और 341 अनलमिटिेड थीं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

भारत में रजिस्टर्ड कंपनी और उनके व्यावहारिक संचालन में जमीन आसमान का अंतर देखने को मिलता है। देश में किस कदर फर्जी कंपनियों का जाल फैला है यह आंकड़ों से समझा जा सकता है। मनीकंट्रोल न्यूज़ के मुताबिक देश में तक़रीबन 7 लाख कंपनियां ऐसी हैं जो महज़ कागजों तक सीमित हैं। इनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। सरकारी डाटा के मुताबिक हर रजिस्टर्ड 5 में से 2 कंपनियां क्रियाशील नहीं हैं। इनके बंद होने का कारण घाटा या विभागीय कार्रवाई है।

31 अक्टूबर, 2018 तक देश में कुल 18.10 लाख कपंनियां रजिस्टर्ड हुईं। जिनमें 11.16 लाख काम कर रहीं थीं, जबकि 6.96 लाख कपंनियां काम में बिल्कुल नहीं थीं। 11.6 लाख कंपनियों में 11.09 लाख लिमिटेड शेयर, 6,668 गारंटी और 341 अनलमिटिेड थीं। रजिस्टर्ड कंपनियों से मिले डाटा के मुताबिक सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 2.25 लाख कपंनियां एक्टिव हैं। इसके बाद दिल्ली में 1.97 लाख और पश्चिम बंगाल में 1.27 लाख सुचारू रूप से काम कर रही हैं।

जानकारी के मुताबिक सिर्फ अक्टूबर महीने में ही 11,625 नई कंपनियां रजिस्टर्ड हुईं। इनमें 1,156 सरकारी कंपनियां हैं। जबकि बाकी निजी क्षेत्र की हैं। ऐसा नहीं कि सारी कंपनियां घाटे की वजह से बंद हुई हैं। इनमें से कई फर्जी कंपनियों पर सरकार की गाज गिरी है। सरकार ने मुहिम के तहत तमाम शेल और कागज पर बनी कंपनियों को रिकॉर्ड से बाहर फेंक दिया है। कंपनी अधिनियम, 2013 के सेक्शन 248 के मुताबिक अगर कोई कंपनी एक साल के भीतर बिजनेस नहीं करती है या फिर संचालन से जुड़ा कोई भी काम 3 सालों तक नहीं करती है तो उसका रिजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। 31 अक्टूबर तक 6.46 लाख कंपनियों को बंद कर दिया गया है।

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