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सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर भूखे-प्यासे पहुंचे गांव, पर लाठी-डंडों से लैस ग्रामीण घुसने नहीं दे रहे, प्रवासी मजदूरों की व्यथा अंतहीन

राज्य सरकारों ने पैदल आने वाले लोगों की मदद के लिए राहत कैंप और चिकित्सीय कैंप खोले हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रास्ते भर में डर का सामना करना पड़ रहा है।

कोरोना वायरस के खौफ के बीच लोग यूपी-बिहार के मजदूर पैदल ही घर के लिए निकल दिए हैं। (फोटो-Indian Express)

जिस कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में लॉकडाउन का ऐलान किया था। अब वही कोरोना प्रवासी मजदूरों के लिए अपने घर जाने में समस्या बन गया है। काम और रहने-खाने की व्यवस्था की कमी की वजह से हजारों की संख्या में मजदूर लॉकडाउन के ऐलान के ठीक बाद अपने घरों से निकल गए थे। जब मंजिल तक जाने के लिए उन्हें कोई वाहन नहीं मिला तो सभी ने पैदल ही कूच करने का फैसला किया। लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पंजाब के ज्यादातर गांवों में लाठी-डंडों से लैस ग्रामीण ही उन्हें घुसने नहीं दे रहे। सभी इन प्रवासी मजदूरों से दूरी बनाने में कड़ाई बरत रहे हैं।

वैसे तो राज्य सरकार ने पैदल यात्रा करने वाले मजदूरों की मदद के लिए राहत कैंप और चिकित्सीय मदद शुरू की है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लॉकडाउन की वजह से अब तक उनके लिए अंतरराज्यीय परिवहन शुरू नहीं किया गया। इसके चलते उन्हें रास्ते में भी डर और अविश्वास का सामना करना पड़ रहा है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में अपील की थी कि दूसरे राज्य पैदल बिहार पहुंचने की कोशिश में जुटे मजदूरों की मदद करें। इसके बाद अतिरिक्त गृह सचिव आमिर सुभानी ने कहा, “हमने सभी जिलाधिकारियों को उन प्रवासियों के लिए इंतजाम करने के लिए कहा है, जिन्हें अपने गांवों में नहीं घुसने दिया जा रहा है। गांववाले भी इस मामले में सही हैं। इससे सरकार को कोरोनावायरस के संदिग्ध मामलों की पहचान करने में आसानी होगी।”

अधिकारियों का कहना है कि उन्हें कई पंचायतों से फोन आए हैं कि वे घर लौटे कामगारों पर नजर रख रहे हैं। कई गांवों के बाहर लाठियों के साथ लोग तैनात किए गए हैं, ताकि प्रवासी गांव के अंदर न घुस पाएं। बांका जिले के रामचुआ गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि मुंबई से आने वाले एक व्यक्ति को तभी घुसने दिया गया, जब डॉक्टरों ने पुष्टि की वह स्वस्थ है।

वहीं, उत्तर प्रदेश में भी प्रवासी मजदूर काफी दूर से लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोंडा, जौनपुर, बिजनौर और कन्नौज लौटे हैं। उन्हें भी तब तक अपने घरों के बाहर रखा जा रहा है, जब तक उनकी टेस्टिंग नहीं हो जाती। बिजनौर के एक व्यक्ति ने बताया कि दो दिन पहले हरियाणा के पानीपत में रहने वाले 20 लोग गांव लौटे। उन्हें जबरदस्ती घुसने की कोशिश की, लेकिन हमने पुलिस बुला ली। बाद में टेस्ट कराने की हामी भरने के बाद ही हमने उन्हें अंदर आने दिया।

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इसी तरह झारखंड के कडमा गांव के बाहर नोटिस में लिखा है- “कृपया बाहर से आने वाले व्यक्ति इस गांव में प्रवेश न करें, आने पर लाठी पड़ेगा।” पंजाब के गुरदासपुर स्थित छीना गांव जहां हाल ही में 6 एनआरआई और 9 अन्य लोग लौटे, उन्हें घरों में ही कैद रखा गया है। गांव के बाहर बाहरियों के न घुसने का नोटिस भी लगा दिया गया है। गांव के सरपंच पंथदीप सिंह का कहना है कि उन्होंने कसम खाई है कि कोरोनावायरस उनके गांव में नहीं घुसेगा। वे हर दिन गांव के बाहर खड़े चौकीदारों को प्रवासी मजदूरों को रोकने के लिए 350 रुपए भी चुका रहे हैं।

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