ताज़ा खबर
 

दो साल से हजारों किसानों को नहीं मिला कृषि बीमा क्लेम से एक भी पैसा, इंश्योरेंस कंपनी ने लौटा दिए प्रीमियम, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

ग्राम पंचायत के सरपंच के दखल के बाद मामला राजस्थान हाईकोर्ट में पहुंचा है। किसानों ने एक जनहित याचिका दाखिल कर उनके क्लेम पर सुनवाई करने को कहा है।

Author नई दिल्ली | Published on: November 20, 2019 12:26 PM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। फोटो: Reuters

राजस्थान में जोधपुर के सतलाना ग्राम पंचायत के हजारों किसानों ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत मिलने वाला क्लेम पिछले दो फसलीय मौसम (खरीफ ‘2016’ और खरीफ ‘2017’) से नहीं मिला है। एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है। किसानों ने कहा कि उनके क्लेम को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया गया, क्योंकि एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एआईसी) ने जोधपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव कमेटी बैंक को भुगतान के एक साल बाद उनका प्रीमियम वापस कर दिया। बताया गया कि बीमा विवरण “सॉफ्ट कॉपी” में प्रदान नहीं किए जाने से ऐसे किया गया। हालांकि बैंक ने किसानों के खातों में उनका रिफंड ट्रांसफर नहीं किया है।

द वायर की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्राम पंचायत के सरपंच के दखल के बाद मामला राजस्थान हाईकोर्ट में पहुंचा है। किसानों ने एक जनहित याचिका दाखिल कर उनके क्लेम पर सुनवाई करने को कहा है। गांव के सरपंच भाला राम पटेल ने वेबसाइट को बताया, ‘जब इंश्योरेंस क्लेम हमें नहीं मिला तो हमने संबंधित सहकारी समिति से संपर्क किया, जोकि जोधपुर केंद्रीय सहकारी समिति बैंक की एक इकाई है, मगर कोई फायदा नहीं हुआ।’

उल्लेखनीय है कि 15 दिसंबर, 2017 को सतलाना में सहकारी सोसायटी ने जोधपुर केंद्रीय सहकारी समिति बैंक को पत्र लिखकर कहा, ‘समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले तीन पटवार मंडल सतलामा, कर्णाली और भाचारण ने खरीफ (2016) का इंश्योरेंस क्लेम नहीं मिला है जबकि किसानों के खातों में प्रीमियम भुगतान के लिए सहकारी सोसायटी खातों से 4,32,793 रुपए की राशि निकाल ली गई।’ मामले में कोई जवाब नहीं मिलने पर किसानों ने अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

इसी बीच जनहित याचिका में किसानों के वकील ने बताया कि उन्हें लगता है कि बीमा कंपनी योग्य किसानों के बीमा दावों को अस्वीकार करने के लिए बेतुके बहाने बना रही है। किसानों के वकील मोती सिंह राजपुरोहित ने कहा, ‘जब दिशानिर्देशों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि एक निश्चित सीमा पर पटवार सर्कल के सभी बीमित किसान दावा करने के लिए योग्य हैं, तो गांव की फसल के नुकसान का क्लेम ना देने का कोई मतलब नहीं है।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 उद्धव ठाकरे ने शिवसेना विधायकों को आधार कार्ड और PAN के साथ बुलाया, MLAs में सस्पेंस
2 IRCTC Indian Railways बोर्ड से 25 फीसदी अफसर बाहर, अभी और पर गिर सकती है गाज
3 कांग्रेसी CM के बिगड़े बोल- हिटलर की बहन जैसी हैं किरण बेदी, तानाशाह की तरह करती हैं काम
जस्‍ट नाउ
X