सीएम आवास के करीब जुटे हजारों क‍िसान, लाठी मारने की बात करने वाले आईएएस को सस्‍पेंड कराने पर अड़े, सुरक्षा बलों की 40 कंपन‍ियां तैनात

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि प्रदर्शनकारी पक्का धरना जारी रखेंगे। पंजाब और यूपी से भारी तादाद में किसान करनाल की तरफ कूच कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन किसानों की मांग को तवज्जो नहीं दे रहा है। वार्ता में बैठे अधिकारी चंडीगढ़ से निर्देश हासिल कर रहे हैं।

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करनाल के लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे किसान। (फोटोः ट्विटर@_Rajvir_Dhillon)

प्रशासन और किसान नेताओं के बीच चल रही दूसरे दौर की वार्ता के विफल होने से करनाल में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। सीएम आवास के करीब हजारों क‍िसान जुटे हुए हैं। किसान लाठी मारने की बात करने वाले आईएएस को सस्‍पेंड कराने पर अड़े हैं। सरकार भी चाकचौबंद है। किसानों के चारों तरफ सुरक्षा बलों की 40 कंपन‍ियां तैनात की गई हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि प्रदर्शनकारी पक्का धरना जारी रखेंगे। पंजाब और यूपी से भारी तादाद में किसान करनाल की तरफ कूच कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन किसानों की मांग को तवज्जो नहीं दे रहा है। वार्ता में बैठे अधिकारी चंडीगढ़ से निर्देश हासिल कर रहे हैं। टिकैत लगातार कह रहे हैं कि नौकरशाही आयुष सिन्हा को बचाने में लगी है। उधर, सरकार ने करनाल में मिनी सचिवालय के चारों तरफ भारी बंदोबस्त कर रखा है। ट्रक ट्रालों के जरिए किसानों का रास्ता रोका जा रहा है तो बीएसएफ भी तैनात की गई है।

गौरतलब है कि पुलिस को लाठीचार्ज करने का आदेश देने वाले आईएएस अधिकारी आयुष सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर किसान जिला मुख्यालय के बाहर डटे हैं। बातचीत विफल रहने के बाद मंगलवार शाम को लघु सचिवालय के प्रवेश द्वारों के बाहर बैठे रहे। कई किसानों ने वहीं रात बिताई। प्रदर्शनकारी 28 अगस्त को यहां पुलिस के लाठीचार्ज करने पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के कई नेताओं के साथ किसानों ने लघु सचिवालय के बाहर रात बिताई। सुबह प्रदर्शनकारी घटनास्थल पर चाय बनाते हुए और नाश्ता देते हुए दिखाई दिए।

किसान संघ के नेता सिन्हा के निलंबन की मांग कर रहे हैं। सिन्हा को एक टेप में पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि अगर प्रदर्शनकारी सुरक्षा तोड़ते हैं तो उनका सिर फोड़ देना। बीकेयू (चडूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चडूनी ने बुधवार को कहा कि हम यहां से तब तक कहीं नहीं जा रहे हैं जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं हो जाती।

आयुष सिन्हा के निलंबन की मांग पर उन्होंने कहा कि जब किसानों पर सड़क अवरुद्ध करने तक के लिए मामला दर्ज कर लिया जाता है तो उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही जिसने पुलिस को सिर फोड़ने का आदेश दिया। क्या कोई कानून है जिसके तहत ऐसा आदेश दिया जा सकता है? हालांकि दिल्ली-करनाल-अंबाला एनएच-44 पर यातायात सामान्य है। किसानों की महापंचायत से एक दिन पहले सोमवार को यहां सुरक्षा बढ़ा जवानों को तैनात किया गया था।

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