Hardeep Singh Puri News: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को एपस्टीन फाइल्स में अपना नाम आने पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए साफ किया कि वह अमेरिकी फाइनेंसर से केवल कुछ मौकों पर और एक डेलीगेशन के हिस्से के तौर पर मिले थे। पुरी ने कहा कि जेफरी एपस्टाइन के साथ उनकी बातचीत का उनके खिलाफ लगे आरोपों से कोई लेना-देना नहीं था।

केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि आज संसद सत्र के दौरान, एपस्टीन फाइलों से जुड़े कुछ अन्य घटनाक्रमों के संदर्भ में मेरा नाम लिया गया था। मैं बस कुछ जानकारी साझा करना चाहता हूं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि ये सभी तथ्य सार्वजनिक हैं। मई 2009 से, जब मैंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला था, से लेकर 2017 में मंत्री बनने तक की अवधि के 30 लाख ईमेल जारी किए गए हैं। इस अवधि के दौरान, केवल तीन या चार बैठकों का ही जिक्र मिलता है और मेरी बातचीत पूरी तरह से पेशेवर थी।”

एपस्टीन फाइल्स को लेकर क्या बोले हरदीप पुरी?

हरदीप पुरी ने आगे कहा, “नवंबर 2014 में मैं एक आम नागरिक था। किसी ने कहा कि वे भारत को देखना चाहते हैं, हमारी लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन के साथ अमेरिका के पश्चिमी तट पर मुलाकात हुई। मैंने अपने ईमेल की शुरुआत यह कहकर की कि मैं अब पहले से कहीं ज्यादा आश्वस्त हूं कि आज भारत एक शानदार अवसर प्रस्तुत करता है और रीड हॉफमैन को भारत आकर आने वाले बदलावों को देखना चाहिए। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया। मैं नवंबर 2014 में इस बारे में बात कर रहा था। अगर मेरी याददाश्त सही है, तो यह परियोजना 2015 में शुरू हुई थी। तो, मैं यहां एक दूरदर्शी आम नागरिक था जो जानता था कि मोदी सरकार किस तरह का काम करने जा रही है। तो, अगर इसे ही ‘हरदीप पुरी का नाम एपस्टीन फाइल्स में आया’ कहते हैं।”

थोड़ा सा पढ़ लिख लो- हरदीप पुरी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सदन में दिए गए भाषण पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने उनसे सभी घटनाक्रमों से थोड़ा अवगत रहने को कहा और कहा, “थोड़ा सा पढ़ लिख लो।”

हरदीप पुरी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

हरदीप पुरी ने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधते हुए कहा, “दो तरह के नेता होते हैं। एक वे जो राजनीतिक व्यवस्था के भीतर जिम्मेदारी संभालते हैं और अपना जीवन जनसेवा में समर्पित कर देते हैं, जिससे देश का परिवर्तन होता है। ये वे नेता हैं जिन्होंने अपने जीवनकाल में यह सुनिश्चित किया है कि देश दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। हम वर्तमान में चौथे स्थान पर हैं और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। फिर दूसरे वे नेता होते हैं जो कभी-कभार देश में आते हैं, कभी विदेश यात्रा करते हैं, और जब वे संसद में आते हैं, जैसा कि मेरे एक सहकर्मी ने कहा, तो वे तब बाहर चले जाते थे जब कोई महत्वपूर्ण बात पेश कर रहा होता था और आज, अपना भाषण देने के बाद, वे चले गए। आप समझ गए होंगे कि मैं किस नेता की बात कर रहा हूं।” ट्रंप की बेटी इवांका से लेकर ममदानी की मां तक, एपस्टीन फाइल्स में सामने आया किन दिग्गजों के नाम पढ़ें पूरी खबर…