प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान धनशोधन मामलों में की गई गिरफ्तारियों में लगभग 27 फीसद की कमी आई है, लेकिन इस अवधि के दौरान कुर्क की गई संपत्तियों का मूल्य 81,000 करोड़ रुपए से अधिक रहा, जो अब तक का रिकार्ड है। यह जानकारी आधिकारिक आंकड़े से मिली।

धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के कड़े प्रावधानों के तहत केंद्रीय एजंसी द्वारा तलाशी या छापेमारी की संख्या 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग दोगुनी होकर 2,892 हो गई। अपराध से प्राप्त आय की परिभाषा, गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती तथा संपत्ति कुर्क करने के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पीएमएलए के तहत व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।

अधिनियम के प्रावधानों के कारण जमानत प्राप्त करना भी अत्यंत कठिन हो जाता है क्योंकि अदालत का यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आरोपी दोषी नहीं है और जमानत पर रहते हुए उसके द्वारा कोई अन्य अपराध करने की आशंका नहीं है। पिछले वित्तीय वर्ष में, ईडी ने धोखाधड़ी के पीड़ितों को कुर्क की गई संपत्तियां वापस लौटाने के अपने निर्धारित लक्ष्य को दोगुने से पार कर लिया, क्योंकि उसने उक्त अवधि के दौरान 32,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां वापस कीं।

एजंसी ने 15,000 करोड़ रुपए की संपत्तियां वापस लौटाने का लक्ष्य रखा था। एजंसी द्वारा उसकी वार्षिक रपट (वित्त वर्ष 2025-26) में उपलब्ध कराए गए आंकड़े का अध्ययन किया और पाया कि ईडी ने उल्लेखित वित्त वर्ष में 156 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 2024-25 में यह संख्या 214 थी, यानी लगभग 27 फीसद की गिरावट। 2023-24 में यह संख्या 272 थी। गिरफ्तारियों में कमी का कारण यह है कि वह अधिक लक्षित और साक्ष्य-आधारित जांच कर रही है।

एजंसी ने एक वर्ष (वित्त वर्ष 2026) में उसके द्वारा की गई संपत्तियों की अब तक की सबसे अधिक अस्थायी कुर्की के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह 712 आदेशों के तहत 81,422 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की है और यह वृद्धि पिछले साल के मुकाबले 171 फीसद अधिक है। यह एक केंद्रीय साधन है जिसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि अपराधियों को अवैध रूप से अर्जित अपराध के लाभों से वंचित किया जाए।

इसके मुकाबले, एजंसी ने वित्त वर्ष 2025 के दौरान 461 अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए थे, जिनमें 30,036 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की गई। जैसा कि नाम से पता चलता है, ये कुर्की आदेश अस्थायी होते हैं व अर्ध-न्यायिक निकाय, पीएमएलए के न्यायनिर्णायक प्राधिकरण द्वारा इनकी पुष्टि की जाती है। ईडी द्वारा की गई छापेमारी, जिसे अक्सर टेलीविजन समाचारों और अखबारों में विस्तार से दिखाया जाता है, वित्त वर्ष 2026 में पिछले वर्ष के 1,491 छापों की तुलना में दोगुनी से अधिक बढ़कर 2,892 हो गई।

इसके चलते ईडी ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान सफलतापूर्वक 812 आरोपपत्र दाखिल किए, जो एक रिकार्ड है, जबकि पिछले वर्ष अदालतों में केवल 457 आरोप पत्र दाखिल किए गए थे। आंकड़ों के मुताबिक पीएमएलए जांच शुरू करने के लिए दर्ज की गई प्रवर्तन मामला सूचना रपट (ईसीआइआर) की संख्या पिछले वित्तीय वर्ष में 39 फीसद बढ़कर 1,080 मामले हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2025 में केवल 775 मामले दर्ज किए गए थे। एजंसी ने पिछले वित्त वर्ष में 32,678 करोड़ रुपए की संपत्तियां वापस कीं, जबकि वित्त वर्ष 2025 में धोखाधड़ी के पीड़ितों को 15,263 करोड़ रुपए की संपत्तियां सौंपी गई थीं। पिछले साल के अनुसार, ईडी निदेशक राहुल नवीन ने वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत में 15,000 करोड़ रुपए की संपत्तियां वापस दिलाने का लक्ष्य रखा था।

धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के कड़े प्रावधानों के तहत केंद्रीय एजंसी द्वारा तलाशी या छापेमारी की संख्या 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग दोगुनी होकर 2,892 हो गई। अपराध से प्राप्त आय की परिभाषा, गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती तथा संपत्ति कुर्क करने के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय को पीएमएलए के तहत व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। अधिनियम के प्रावधानों के कारण जमानत प्राप्त करना भी अत्यंत कठिन हो जाता है क्योंकि अदालत का यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आरोपी दोषी नहीं है और जमानत पर रहते हुए उसके द्वारा कोई अन्य अपराध करने की आशंका नहीं है।

पिछले वित्तीय वर्ष में, ईडी ने धोखाधड़ी के पीड़ितों को कुर्क की गई संपत्तियां वापस लौटाने के अपने निर्धारित लक्ष्य को दोगुने से पार कर लिया, क्योंकि उसने उक्त अवधि के दौरान 32,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां वापस कीं।