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मथुरा: कन्हैया को भी लग गई कोरोना की नजर

इतिहास गवाह है कि जन्माष्टमी के पर्व पर ब्रज के कण-कण में अपूर्व हर्षोल्लास छा जाता है। चौक पूरे जाते हैं। द्वार पर बंदरवारें बांधी जाती हैं। मंगल सूचक थापे लगाए जाते हैं और फूलों से पालने को सजाकर ब्रज की बालाएं गीत गाती हैं। घर-घर में भगवान को नए वस्त्र पहनाकर उनका शृंगार करके झांकियां सजाई जाती हंै।

Author मथुरा। | Updated: August 12, 2020 6:53 AM
भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा का उल्लास अद्भुत होता है।

मथुरा में इस बार कन्हैया के जन्म का वह नजारा देखने को नहीं मिलेगा जिसे देखने के लिए हमारी आंखें हमेशा से अभ्यस्त रही हैं। मंदिरों पर इस बार भव्य सजावट तो होगी लेकिन इसे टकटकी लगाकर निहारने वाले लाखों श्रद्धालु इस बार नहीं दिखेंगे। दिनभर चलने वाले भंडारों का भी आयोजन इस बार नहीं किया जाएगा। हालांकि, एक अच्छी बात यह जरूर हुई है कि इस बार कई मंदिरों द्वारा कान्हा का जन्म आॅनलाइन देख पाने की व्यवस्था कर दी गई है। इससे भक्तजन भगवान कृष्ण के दर्शन आॅनलाइन कर पाएंगे।

मुख्य श्रीकृष्ण जन्मस्थान के साथ-साथ द्वारिकाधीश व ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं। बावजूद इसके, मंदिर प्रशासन कृष्ण जन्मोत्सव की भव्यता में किसी भी तरह की कमी नहीं आने देने का दावा कर रहे हैं। पूर्व में, वृन्दावन स्थित श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर में जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का पारंपरिक अभिषेक रात में ढाई बजे के करीब होता रहा है तथा प्रात: 5 बजे से मंगला आरती के दर्शन होते हैं। लेकिन, इस बार मंदिर के पट 30 सितंबर तक बंद हैं। वृंदावन का ही प्रेम मंदिर भी फिलहाल 1 से 31 अगस्त तक सार्वजनिक दर्शन के लिए बंद है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में यहां न केवल आस-पास के जनपदों बल्कि विभिन्न दूसरे प्रांतों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में भारी भीड़ एकत्रित होने पर सामाजिक दूरी का अनुपालन संभव नहीं हो सकेगा। इसलिए, इस बार यहां कोई खास आयोजन नहीं होगा।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि जन्मस्थान के मंच पर इस बार कृष्ण लीला नहीं होगी। भक्तजन मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के लिए मंदिर में बाकी सभी पारंपरिक आयोजन पूर्व की भांति ही होंगे। मंदिर की साज-सज्जा, भगवान का शृंगार, पोशाक, जन्म महाभिषेक की व्यवस्थाएं, पुष्प-बंगला आदि आयोजन इस प्रकार से किए जा रहे हैं कि श्रीकृष्ण जन्म महाभिषेक के दर्शन टेलीविजन माध्यम से जो भी श्रद्धालु करेंगे, उनको ऐसी अनुभूति होगी कि वे इस आयोजन में सीधे सम्मिलित हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि कोरोना के कारण जन्माष्टमी पर प्रसाद वितरण नहीं किया जाएगा।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अकेले मथुरा शहर में ही करीब 250 स्थानों पर भंडारे लगाए जाते हैं। ये भंडारे कृष्ण जन्मोत्सव में शामिल होने वाले कृष्ण भक्तों की आवभगत के लिए शहर के विभिन्न संगठनों द्वारा लगाए जाते हैं, लेकिन अब की बार कृष्ण भक्तों के न आने से इन भंडारों का आयोजन नहीं किया जाएगा। इतिहास गवाह है कि जन्माष्टमी के पर्व पर ब्रज के कण-कण में अपूर्व हर्षोल्लास छा जाता है। चौक पूरे जाते हैं। द्वार पर बंदरवारें बांधी जाती हैं। मंगल सूचक थापे लगाए जाते हैं और फूलों से पालने को सजाकर ब्रज की बालाएं गीत गाती हैं। घर-घर में भगवान को नए वस्त्र पहनाकर उनका शृंगार करके झांकियां सजाई जाती हंै।

स्त्री, पुरुष, बच्चे भी श्रीकृष्ण के जन्म के दर्शन के उपरांत अपना व्रत खोलते हैं। प्रत्येक घर, आंगन में शंख, घंटा, घड़ियाल की ध्वनि ऐसे गूंज उठती है, मानो वहां वास्तव में ही किसी बालक का जन्म हुआ हो। लोग आपस में बधाइयां देते हैं। भक्ति भावनाओं में विभोर होकर ब्रजवासी नाचते-गाते हैं। लेकिन, इस बार ये सभी आयोजन घरों की चारदीवारी तक ही सीमित रहेंगे। प्रशासन ने विभिन्न प्रमुख मन्दिरों के पदाधिकारियों के साथ तमाम बैठकें करने एवं सुझाव लेने के पश्चात यह निर्णय लिया है कि कोविड-19 महामारी के कारण 11 से 13 अगस्त तक मनाए जाने वाले इस त्योहार पर बाहर से आने वाली भीड़ पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।

पूजा कार्यक्रम के दौरान सभी मंदिर प्रबंधन कोविड-19 संबंधी नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।
वैश्विक महामारी कोरोना से उत्पन्न परिस्थितियों के दृष्टिगत श्रद्धालुओं का प्रवेश 10 अगस्त की दोपहर 12 बजे से 13 अगस्त की सांयकाल 3 बजे तक प्रतिबंधित रखने का उल्लेख किया है।

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