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….तो सांसद ई अहमद के निधन के बावजूद मोदी सरकार ने बुधवार को ही इसलिए पेश किया गया बजट

सांसद ई अहमद का मंगलवार देर रात अस्पताल में निधन हो जाने के बाद बुधवार को बजट पेश होने पर सस्पेंश बन गया था

सांसद ई अहमद के निवास पर श्रद्धांजलि देते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो: ANI)

पूर्व केंद्रीय मंत्री और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के लोकसभा सांसद ई अहमद का मंगलवार देर रात अस्पताल में निधन हो जाने के बाद बुधवार को बजट पेश होने पर सस्पेंश बन गया था। ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि हो सकता है सांसद के निधन के कारण कार्यवाही स्थगित कर दी जाए और बजट पेश ना हो। मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संबोधन के दौरान दिल का दौरा पड़ने के बाद RML अस्पताल लाए गए अहमद को बुधवार 2.15 am मृत घोषित किए गए थे।

कांग्रेस और लेफ्ट समेत दूसरी विपक्षी पार्टियों ने बजट टालने की मांग की थी। इसके अलावा सांसद के निधन पर कार्यवाही स्थगित करने की प्रथा को लेकर भी बजट पेश होने पर तब तक सस्पेंस बना रहा जब तक की खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार सुबह 10.19 बजे ट्विट के जरिए पुष्टि नहीं कर दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “Watch me live presenting the Union Budget 2017 at 11 am, February 1, 2017 https://www.loksabhatv.nic.in.”

हमारे सहयोगी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस ने कई सूत्रों से बात की और यह जानने की कोशिश की कि आखिर सांसद के निधन के बाद भी बजट पेश करने के पीछे क्या वजह रही होंगी। इसको लेकर कई लीगल एक्सपर्ट से बात करने और दो पूर्व उदाहरण से यह बात सामने आई कि नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार सुबह ही बजट पेश करने का मन बना लिया था। बसंत पंचमी होने के कारण इस दिन को बहुत ही शुभ माना जा रहा था। अरुण जेटली ने इस जिक्र अपनी बजट स्पीच में भी किया था। उन्होंने कहा था, “आज से बेहतर कोई दिन हो ही नहीं सकता था।” इसके अलावा, सरकार को यह भी डर था कि अगर देरी की गई तो बजट लीक ना हो जाए, क्योंकि वितरण के लिए इसकी प्रिंटिंग कराई जा चुकी थी।

पहले से हैं दो उदाहरण:

पार्लियामेंट डेटा बताता है कि 31 जुलाई, 1974 को स्पीकर गुरदियाल सिंह ने मंत्री एमबी राणा के निधन के बाद संसद को स्थगित नहीं किया था। स्पीकर ने तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री वाईबी चव्‍हाण को बजट पेश करने की अनुमति दे दी थी। इसके अलावा, 19 अप्रैल 1954 को सांसद जेपी सोरेन का निधन रेल बजट के दिन हो गया था लेकिन कार्यवाही को स्थगित नहीं किया गया था। दोनों ही उदाहरण में शोकसभा के लिए समय जरूर निकाला गया था लेकिन बजट को पेश किया गया था।

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