दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्रियों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग केवल सनसनी फैलाने की कोशिश है। डीयू की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि इन अपीलों में कोई दम नहीं है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए उठाया गया है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने यह बात मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ के सामने कही।
दिल्ली हाईकोर्ट मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने के मामले में दायर अपीलों पर सुनवाई कर रहा था। ये अपीलें आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह, आरटीआई कार्यकर्ता नीरज शर्मा और वकील मोहम्मद इरशाद ने दाखिल की हैं। ये अपीलें 25 अगस्त 2025 को आए उस एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ हैं, जिसमें केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के दिसंबर 2016 के उस आदेश को रद्द कर दिया गया था, जिसमें डिग्री की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया था।
इस मामले की पहली सुनवाई 12 नवंबर को हुई थी। उस समय हाईकोर्ट ने अपील दाखिल करने में हुई देरी पर सवाल उठाया था और दिल्ली विश्वविद्यालय से इस पर आपत्ति दर्ज करने को कहा था।
मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में पेश हुए। उन्होंने देरी के मुद्दे और मामले के तथ्यों दोनों पर जवाब देने के लिए अदालत से और समय मांगा। उन्होंने कहा कि मैं देरी के साथ-साथ मामले की मूल बातों पर भी जवाब दाखिल करना चाहता हूं।
अपीलकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील शादान फरासात ने कहा कि अगर सॉलिसिटर जनरल मामले के तथ्यों पर भी जवाब देना चाहते हैं, तो अदालत को अपीलों में नोटिस जारी करना चाहिए।
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इस पर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वह पहले से ही इस मामले में पेश हो रहे हैं और नोटिस जारी करने की मांग सिर्फ मामले को सनसनीखेज बनाने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि मैं यहां पेश हूं, किसी बात को सनसनी बनाने के लिए नोटिस जारी नहीं किया जा सकता।
वहीं, शादान फरासात ने कहा कि अपील दाखिल करने में बहुत ज्यादा देरी नहीं हुई है और अदालत चाहे तो इसे माफ कर सकती है। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल इस बात से सहमत नहीं थे। आखिर में, अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय को अपील में हुई देरी पर अपनी आपत्तियां दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का और समय दे दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।
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