सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का शुक्रवार को 20वां दिन है। सोनम वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर और परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “सोनम वांगचुक और जंतर-मंतर पर हो रहे कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शनों के लिए लोगों की तारीफ हर दिन बढ़ती जा रही है। सरकार इसे नजरअंदाज करके अपना ही नुकसान कर रही है।”

प्रशांत भूषण ने एक कविता पोस्ट की

वरिष्ठ वकील ने अपने कजिन की बातों को भी शेयर किया है। उन्होंने कहा, “मेरे एक कजिन ने इस बारे में जो लिखा है, यह देखना अद्भुत है कि युवा कितनी अनुशासन और धैर्य के साथ एकजुट हुए हैं। वे जागरूकता बढ़ाने और उस सिस्टम में जवाबदेही और ईमानदारी की मांग करने के लिए साथ आए हैं, जो उनके और देश के भविष्य पर असर डालता है। उनके शांतिपूर्ण विरोध और सोनम वांगचुक व छात्रों के जारी अनशन के लिए लोगों में बहुत ज्यादा और बढ़ती हुई तारीफ का भाव है। मेरे विचार…” इतना ही नहीं उन्होंने एक कविता भी पोस्ट की है।

वहीं इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की थी। कपिल सिब्बल ने कहा कि आगे और भी कई सारी लड़ाइयां हैं, जिनके लिए सोनम वांगचुक के नेतृत्व की जरूरत पड़ेगी।

आप अपनी जान क्यों कुर्बान करे- कपिल सिब्बल

कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “आप लोग अनशन पर हैं और हम आपके साथ हैं। लेकिन अगर सरकार आपकी बात नहीं सुनेगी, तो आप अपनी जान क्यों कुर्बान करें? हमें अभी और भी कई लड़ाइयां लड़नी हैं। हमें कई मुद्दों पर अपना संघर्ष जारी रखना है और हमें आपकी जरूरत है। हमें आप जैसे लोगों की जरूरत है, ऐसे लोग जिनका जनता सम्मान करती है और जिन्हें लोग किसी नेक काम के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तैयार मानते हैं। आगे और भी कई लड़ाइयां हैं और हमें मिलकर उनका सामना करना होगा।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने वांगचुक के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत शुरू न करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल तभी की जाती है जब लोगों को लगता है कि सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। अन्ना हजारे आंदोलन का जिक्र करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि उस समय की (यूपीए) सरकार ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की थी क्योंकि सरकारों से जनता की बात सुनने की अपेक्षा की जाती है।

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन गुरुवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गया। शुक्रवार (17 जुलाई 2026) सुबह कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। सोनम वांगचुक की हेल्थ अपडेट पर पार्टी ने लिखा कि उनकी हालत ठीक नहीं है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…