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नरेंद्र मोदी को हराने, थर्ड फ्रंट बनाने शरद पवार भी मैदान में कूदे, ममता संग दिल्ली में बनाएंगे रणनीति

इसी साल 26 जनवरी को मुंबई में शरद पवार ने 'संविधान बचाओ मार्च' की अगुवाई की थी, जिसमें तमाम विपक्षी दलों ने अपने-अपने प्रतिनिधि भेजे थे। पवार के अलावा दूसरे गैर भाजपाई दल भी पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ मोर्चाबंदी करने में जुटे हैं।

मराठा छत्रप और एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी इस महीने के आखिर में यानी 27 और 28 मार्च को दिल्ली में बैठक करेंगे।

लोकसभा चुनाव होने में अभी साल भर का समय बचा है। इस बीच कई गैर बीजेपी दल केंद्र से नरेंद्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए उतावले नजर आ रहे हैं। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी जहां 13 मार्च को डिनर पर विरोधी दलों के नेताओं से चुनाव पूर्व सहमति बनाने की कोशिश करेंगी वहीं मराठा छत्रप और एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी इस महीने के आखिर में यानी 27 और 28 मार्च को दिल्ली में बैठक करेंगे। पवार ने सभी गैर बीजेपी दलों को इस बैठक में आने का न्योता भिजवाया है। शरद पवार के करीबी और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल खुद कोलकाता जाकर तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को न्योता दिया है। खबर है कि ममता ने इस बैठक में आने पर अपनी हामी भर दी है।

बता दें कि इसी साल 26 जनवरी को मुंबई में शरद पवार ने ‘संविधान बचाओ मार्च’ की अगुवाई की थी, जिसमें तमाम विपक्षी दलों ने अपने-अपने प्रतिनिधि भेजे थे। पवार के अलावा दूसरे गैर भाजपाई दल भी पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ मोर्चाबंदी करने में जुटे हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने तीन मार्च को कहा था कि आजादी के बाद 70 सालों में से 64 सालों तक कांग्रेस या बीजेपी का शासन रहा है मगर आज तक देशवासियों को शुद्ध पानी तक मयस्सर नहीं हो सका है। केसीआर ने राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में बदलाव की वकालत की और कहा कि गैर बीजेपी और गैर कांग्रेसी गठबंधन पर जोर दिया जाना चाहिए।

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गौरतलब है कि सोनिया गांधी भी अगले हफ्ते दिल्ली में रात्रिभोज दे रही हैं। माना जा रहा है कि इसमें दर्जनभर दलों के नेता शामिल होंगे और मिशन 2019 पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी को सियासी पटखनी देने की रणनीति पर चर्चा करेंगे। जानकारों का कहना है कि कई गैर बीजेपी दल कांग्रेस के नए अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व की बजाय पुराने नेताओं के साथ रहकर ही भाजपा के खिलाफ मोर्चाबंदी करने की चाहत रखते हैं क्योंकि राहुल के नेतृत्व की वजह से देश के उत्तरी, पश्चिमी और मध्यवर्ती राज्यों में बीजेपी को फलने-फूलने का मौका मिला है।

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