केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने गुरुवार को विश्वास जताया कि महिला आरक्षण विधेयक संसद में व्यापक सहमति के साथ पारित होगा। उन्होंने कहा कि परिसीमन जैसे मुद्दों पर विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद सभी राजनीतिक दल आखिरकार इस बिल का समर्थन करेंगे।

महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए गिरिराज सिंह ने कहा, “महिला आरक्षण बिल पेश किया जा रहा है। विपक्ष कह रहा है कि उन्हें परिसीमन पर आपत्ति है और वे इसका समर्थन नहीं करेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि जब वे सदन में आएंगे, तो महिलाओं के प्रति संवेदना महसूस करेंगे। महिलाएं वर्षों से इंतजार कर रही हैं और उनका धैर्य अब जवाब दे रहा है। सभी मिलकर इसे पास करेंगे। अगर उन्होंने समर्थन नहीं किया तो उन्हें घर में खाना भी नहीं मिलेगा।”

क्षेत्रीय असंतुलन की आशंकाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “कहीं कोई भेदभाव नहीं होगा। बिल सदन में आएगा और विषय पर चर्चा होगी। इसे पेश होने से पहले ही शक करने की जरूरत नहीं है। जैसे पहले यह पास हुआ था, वैसे ही अब भी पास होगा। किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा, सभी के लिए समानता होगी।”

परिसीमन से जुड़े नुकसान के सवाल पर उन्होंने कहा, “किसी को कोई नुकसान नहीं होगा, किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है।”

वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बिल की मंशा और समय पर सवाल उठाते हुए इसे “गुप्त लोगों की गुप्त योजना” बताया। उन्होंने कहा, “हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस तरीके से इसे लाया जा रहा है, उसके खिलाफ हैं।” जनगणना और जाति जनगणना के मुद्दे से जोड़ते हुए उन्होंने कहा, “अगर जनगणना होती है तो देश जाति जनगणना की मांग करेगा और उसके बाद आरक्षण की मांग उठेगी। वे इन सब से बचना चाहते हैं।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया, “ये लोग पीड़ितों, दलितों, मुसलमानों, पिछड़ों और आधी आबादी के खिलाफ हैं।” 33 प्रतिशत आरक्षण के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “जब तक डेटा सही नहीं होगा, तब तक आरक्षण सही कैसे कहा जा सकता है?” अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन अन्य संबंधित विधेयकों के खिलाफ है।”

समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी कहा, “साल 2023 में जिस तरह महिला आरक्षण बिल पास हुआ था, हम उसी तरह चाहते हैं। संशोधन लाना सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है। परिसीमन और जनगणना के बिना हम इसका विरोध करेंगे। संसद में बहस होगी तो हम अपने मुद्दे रखेंगे।”

बताया जा रहा है कि संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में तीन अहम विधेयक पेश किए जा सकते हैं, जिनमें 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीट आरक्षित करने और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।

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देश की राजनीति और भविष्य निर्माण में महिलाओं की भूमिका हमेशा से उल्लेखनीय रही है। भारतीय संविधान सभा में कुल 15 महिला सदस्य थीं। इन महिलाओं ने संविधान के मसौदे को तैयार करने और देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। संविधान सभा के बाद महिलाओं ने संसद में भी एंट्री ली। भारतीय लोकतंत्र के सात दशकों के सफर में संसद की संरचना में कई बदलाव आए हैं, लेकिन अब एक बड़ा बदलाव अंतिम चरण में है। पूरी खबर पढ़ें…