Supreme Court News: ठाणे के एक अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों पर कथित तौर पर हमला करने के आरोप में अभियोजन का सामना कर रहे शिवसेना पार्षद रमेश शुक्रिया म्हात्रे ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील वापस ले ली। ऐसा इस वजह से क्योंकि कोर्ट ने साफ कर दिया कि ऐसी घटनाओं में शामिल लोग एक मिनट भी सड़कों पर घूमने के लायक नहीं है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान पालघर में शिवसेना कार्यकर्ताओं द्वारा डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों को धमकाने और उन पर हमला करने की घटना का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा, “हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कल एक और घटना हुई। वही समूह था। फिर से डॉक्टरों पर हमला किया।” म्हात्रे की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्होंने जांच की और पाया कि यह वही लोगों का समूह नहीं था।
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “एक ही विचारधारा। यह कैसे उचित ठहराया जा सकता है कि आप उनके कमरों में जाकर उन पर हमला करें, उन्हें बेरहमी से पीटें? यह कानून और सार्वजनिक व्यवस्था दोनों का मामला है। इसलिए उन्हें वास्तव में हिरासत में लिया जाना चाहिए। ये लोग सड़कों पर घूमने के लायक नहीं हैं।”
पुलिस ने शिवसेना पार्षद को गिरफ्तार किया था
कल्याण में 6 जुलाई को हुए हमले के बाद पुलिस ने म्हात्रे को गिरफ्तार कर लिया था। सेशन कोर्ट ने 14 जुलाई को उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 18 जुलाई को जमानत आदेश पर रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने 7 अगस्त को रोक हटा दी और उन्हें और तीन अन्य लोगों को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी।
हाई कोर्ट ने मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया और जांच पूरी करने, आरोप पत्र दाखिल करने और मुकदमे की कार्यवाही शुरू करने के लिए समय सीमा तय कर दी। म्हात्रे ने अपने ऊपर लगाई गई कड़ी शर्तों को लेकर हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
यह घटना डोम्बिवली के म्युनिसिपल शास्त्री नगर अस्पताल में उस समय घटी जब डॉक्टरों ने एक गर्भवती महिला के परिवार को उसे दूसरे अस्पताल में ट्रांसफर करने की सलाह दी क्योंकि एनआईसीयू के सभी बिस्तर भरे हुए थे। आरोप है कि महिला के परिवार ने म्हात्रे से संपर्क किया, जिसके बाद उसने और उसके साथियों ने कथित तौर पर अस्पताल में तीन डॉक्टरों पर हमला किया।
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोमवार को संकेत दिया कि वह तृणमूल कांग्रेस नेता और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोर्ट की मंजूरी के बिना और एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाने का आदेश दे सकता है। यह बात तब कही गई जब कोर्ट को बताया गया कि पहले से मिली अंतरिम सुरक्षा के बावजूद उनके खिलाफ कई आपराधिक शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
