इंडिगो पर नागपुर के एक वकील ने गंभीर आरोप लगाए हैं। वकील का दावा है कि बागडोगरा से कोलकाता जाने वाली फ्लाइट में उनकी 3 साल के बेटे को उनसे अलग बैठने के लिए मजबूर किया गया।
नागपुर निवासी वकील गौरव मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी आपबीती साझा की। गौरव मिश्रा ने लिखा, “इंडिगो ने मेरे 3 साल के बच्चे को अकेले ट्रैवल करने पर मजबूर किया, क्योंकि हमने सीट सिलेक्शन के लिए अतिरिक्त पैसे नहीं दिए थे।”
क्या DGCA ने कोई नियम तोड़ा है?
मिश्रा के मुताबिक यह डीजीसीए के एयर ट्रांसपोर्ट सर्कुलर के नियम 3.15 का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि बिना किसी पैरेंट के उनकी 3 साल की बेटे को अलग सीट पर बैठाया गया। उनके अनुसार बागडोगरा से कोलकाता की फ्लाइट के दौरान काफी टर्बुलेंस भी था।
गौरव मिश्रा ने बताया कि उन्होंने तीन टिकटों के लिए 43,900 रुपये चुकाए थे, लेकिन इसके बावजूद परिवार को अलग-अलग सीटें दी गईं। उनका कहना है कि यह डीजीसीए के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने अपनी पोस्ट में डीजीसीए गाइडलाइन का स्क्रीनशॉट भी साझा किया जिसमें लिखा है कि 12 साल तक के बच्चों को कम से कम एक पैरेंट या गार्जियन के साथ बैठाना जरूरी है।
इंडिगो ने क्या सफाई दी?
इंडिगो ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। एयरलाइन ने जारी बयान में कहा कि उसने गौरव मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी। कंपनी ने उनसे अपील की कि वह अपना संपर्क नंबर साझा करें ताकि मामले को सुलझाया जा सके।
लोगों की कैसी प्रतिक्रिया?
फिलहाल सोशल मीडिया पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कई यूजर्स इंडिगो एयरलाइन की आलोचना कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “इस प्रकार का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। किसी भी यात्री,खासकर बच्चों की सुरक्षा सीट मैनेजमेंट या कमर्शियल फैसलों से पहले आनी चाहिए। छोटे बच्चों को सामान्य यात्रियों की तरह ट्रीट नहीं किया जा सकता।”
वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह काफी चिंताजनक मामला है। यहां सिर्फ डीजीसीए गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं हुआ, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी यह एक बड़ी चूक है।
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