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JNU Controversy: पटियाला हाउस कोर्ट में नए सिरे से हिंसा, पेशी के दौरान कन्हैया के साथ मारपीट

सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली पुलिस आयुक्त बी एस बस्सी को निर्देश दिया कि वह जेएनयूएसयू के गिरफ्तार अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत लोगों की सुरक्षा व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करें।
Author नई दिल्ली | February 18, 2016 01:22 am
JNU स्टूडेंट कन्हैया कुमार

सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली पुलिस आयुक्त बी एस बस्सी को निर्देश दिया कि वह जेएनयूएसयू के गिरफ्तार अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत लोगों की सुरक्षा व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करें। शीर्ष अदालत ने यह निर्देश पटियाला हाउस अदालत परिसर में आज नए सिरे से हुई हिंसा के बाद दिया। कुमार देशद्रोह के आरोप का सामना कर रहा है। लेकिन सोमवार को पत्रकारों पर हमला करने वाले कुछ वकीलों ने आज उच्चतम न्यायालय के आदेश को धता बताते हुए एक बार फिर पत्रकारों और देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर हमला किया। यह हमला उस वक्त किया गया जब उसे पटियाला हाउस अदालत में पेश किया जा रहा था। कन्हैया को वकीलों ने लात-घूंसों से पीटा।

यह आदेश तेजी से हो रहे घटनाक्रम वाले दिन दिया गया जब अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा और उसने अधिवक्ताओं की छह सदस्यीय समिति को आज दोपहर पटियाला हाउस अदालत में भेजा। यह कदम तब उठाया गया जब शीर्ष अदालत को पटियाला हाउस अदालत परिसर में वकीलों द्वारा नए सिरे से हिंसा किए जाने की जानकारी दी गई।

जब समिति ने पटियाला हाउस अदालत परिसर में ‘अप्रत्याशित’ और ‘डर तथा आतंक के माहौल’ और कुमार के साथ मारपीट किए जाने के बारे में मौखिक रिपोर्ट दी तो न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति ए एम सप्रे की पीठ ने साफ कर दिया कि आरोपी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस आयुक्त की है।

शाम के वक्त वरिष्ठ वकीलों की टीम ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट दी। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि आरोपी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दिल्ली के पुलिस आयुक्त की ही होगी। कोर्ट ने कहा, हम रिकॉर्ड पर यह बात लाना चाहते हैं कि समिति के सदस्यों ने आज रिपोर्ट दी है कि आरोपी को आज जब अदालत में पेश किया गया तो उससे बदसलूकी की गई। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ वकीलों ने कहा है कि आरोपी और उसके वकीलों एवं अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए और कार्यवाही कवर करने के लिए गए पांच पत्रकारों की सुरक्षा के लिए उचित निर्देश दिए जाएं। वकीलों की टीम ने बताया कि वे पुलिस के घेरे में अदालत कक्ष तक पहुंच सके। उपद्रवी भीड़ ने इस घेरे को भी तोड़ दिया। कन्हैया से मिलने के बाद उन्हें पता चला कि अदालत कक्ष के बाहर उसे पीटा गया और काला चश्मा लगाए एक व्यक्ति ने उसे अंदर भी पीटा। उसे पीटने वाला शख्स अनधिकृत तरीके से अदालत में दाखिल हुआ था और उसने प्रवेश द्वार पर अपने अंगूठे का निशान दिया था।

जब उन्होंने पुलिस उपायुक्त जतिन नरवाल से सवाल किया तो उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि वह शख्स अदालत कक्ष में कैसे घुसा था और उन्होंने उसे रोका क्यों नहीं या गिरफ्तार क्यों नहीं किया। टीम ने कहा, ऐसा माहौल पहले कभी नहीं था। पुलिस ने अपना काम नहीं किया। भीड़ ने घेरा तोड़ दिया और हम पर पानी की बोतलें और धारदार फूलदान फेंके। रिपोर्ट में मुख्य रूप से यही बातें हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी की जान को गंभीर खतरा है। यह पुलिस उसे बचाने में नाकाम साबित होगी। टीम की बातें सुनने के बाद न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति ए एम सप्रे की पीठ ने पुलिस के वकील अजित के सिन्हा को कहा कि वह बस्सी को बता दें कि किसी अनहोनी के लिए वह जिम्मेदार होंगे और उनसे यह भी सवाल करें कि वह कन्हैया एवं अन्य को सुरक्षा देने में सक्षम हैं कि नहीं।

सिन्हा ने इस पर कहा कि आयुक्त ने उन्हें आश्वस्त किया है कि कन्हैया को 100 फीसदी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी और उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। शीर्ष कोर्ट की पीठ ने वकीलों की टीम से कल दोपहर दो बजे तक लिखित रूप में अपनी रिपोर्ट देने को कहा है और सिन्हा को दिल्ली पुलिस की ओर से सुबह साढ़े 10 बजे तक एक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। इस बीच, कुमार ने कहा कि वह एक भारतीय है जिसे न्यायपालिका और संविधान में पूरी आस्था है। इस बयान के आधार पर पुलिस ने कहा है कि वह उसकी जमानत का विरोध नहीं करेगी।

रिमांड की कार्यवाही के लिए पेश किए जाने पर कुमार ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट लवलीन से कहा, मैं पहले भी कह चुका हूं। मैं एक भारतीय हूं। संविधान और देश की न्यायपालिका में मेरी पूरी आस्था है। कार्यवाही शुरू होने पर एक बयान में कुमार ने कहा, मेरे खिलाफ मीडिया ट्रायल बहुत तकलीफदेह है। यदि मेरे खिलाफ सबूत है तो मैं देशद्रोही हूं, तब आप मुझे कृपया जेल भेज दीजिए। लेकिन मेरे खिलाफ सबूत नहीं है तो मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए। पिछले हफ्ते जेएनयू में एक कार्यक्रम में कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी नारेबाजी होने के सिलसिले में कुमार पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। उसे दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब उसे दो मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

बस्सी ने कहा, यदि कुमार जमानत के लिए अनुरोध करता है तो पुलिस को इस पर ऐतराज नहीं होगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि एक युवा को शायद जमानत मिलनी चाहिए। पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में हिंसा को लेकर आलोचनाओं में घिरे बस्सी ने इस बात से इनकार किया कि कुमार को पीटा गया है और उन्होंने हालात से निपटने का बचाव करते हुए कहा कि वकीलों के खिलाफ अधिक बल का इस्तेमाल विपरीत असर डालने वाला और अनुचित होता।

बस्सी ने कहा, मुझे नहीं लगता कि उसे पीटा गया। काफी धक्का मुक्की हुई। हमें इसकी आशंका थी और उसे जरूरी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ लाया गया। चार अधिकारी उसका ध्यान रख रहे थे। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि आप आज के हालात (अदालत परिसर में) को बेकाबू बताएं। इस बीच, वकीलों के एक समूह द्वारा कुमार और पत्रकारों पर हमले के मद्देनजर पटियाला हाउस अदालत परिसर में हालात से निपटने में पुलिस की भूमिका सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आई।

बस्सी ने कहा कि अधिकारी कन्हैया को घेरे हुए थे और उसे पीटे जाने से बचाया। दो मौकों पर हाथापाई हुई। सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि बल प्रयोग करना विपरीत असर डालने वाला होता। वकील अदालत के अधिकारी हैं। जब हम अधिकारियों से निपट रहे हैं,जरूरत ना पड़ने पर..ऐसे में इस मामले में अधिक बल प्रयोग करना उचित नहीं होता। बस्सी ने इसके समर्थन में मद्रास उच्च न्यायालय, इलाहाबाद हाईकोर्ट और अन्य स्थानों पर वकीलों की संलिप्तता वाली हिंसा की घटनाओं का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, हमने हालात को निपटाया। शांति भंग नहीं हुई। पत्रकारों, जेएनयू छात्रों और शिक्षकों पर सोमवार को वकीलों के समूह द्वारा किए गए हमले का जिक्र करते हुए बस्सी ने कहा कि वीके चौहान और भाजपा विधायक ओपी शर्मा सहित तीन वकीलों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। उन्होंने आशा जताई कि वे लोग जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होंगे और घटनाओं के बारे में अपना बयान देंगे।

अधिवक्ता विक्रम सिंह चौहान ने एक बार फिर आज अपने सहकर्मियों का नेतृत्व करते हुए पटियाला हाउस अदालत परिसर में पत्रकारों और कन्हैया कुमार पर हमला किया। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही ये लोग पत्रकारों और जेएनयू के छात्रों तथा शिक्षकों को राष्ट्र विरोधी बताते हुए उन पर हमला करते हुए कैमरे में कैद किए गए थे।

चौहान के नेतृत्व में समूह ने पत्रकारों और कुमार पर हमला किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की खुलेआम अवज्ञा करते हुए ऐसा किया। शीर्ष कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया था कि वह अदालत परिसर में उपयुक्त और पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करें। संपर्क किए जाने पर चौहान ने कहा कि उन्हें निशाना क्यों बनाया जा रहा जबकि भारत विरोधी नारे लगाने वालों को हीरो बना दिया गया है। उन्होंने कहा, आप उनसे सवाल क्यों नहीं पूछ रहे हैं। सुरेन्द्र त्यागी नाम के एक अन्य वकील ने कहा, हमने आज का अपना काम कर दिया। चौहान ने आरेाप लगाया कि वकीलों का एक प्रतिद्वंदी समूह उन पर हमला करने की कोशिश कर रहा था।

इस बीच, जेएनयू के कुलपति (वीसी) ने सभी पार्टियों से विश्वविद्यालय के विवाद में हस्तक्षेप नहीं करने की अपील की है। जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार ने आज सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा, मैं सभी राजनीतिक दलों से अपील करता हूं कि वे इस विषय में हस्तक्षेप नहीं करें। विश्वविद्यालय अंदरूनी तौर पर इन मुद्दों से निपट सकता है और अंदरूनी तंत्र को मुद्दे की जांच करने दें। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में छात्रों से यह भी कहा कि वे असुरक्षित और भयभीत महसूस ना करें।

जेएनयू की वेबसाइट हैक किए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस मामले की जांच कर रहा है। उन्होंने बताया कि जेएनयू की एक उच्च स्तरीय समिति नौ फरवरी की घटना की जांच कर रही है जिसमें कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी नारे लगे थे।

विवि परिसर में कथित पुलिस कार्रवाई पर वीसी के विरोधाभासी बयानों की आलोचना के बीच रजिस्ट्रार भूपिंदर जुत्शी ने कहा कि पुलिस को इजाजत पर कोई विरोधाभासी रूख नहीं है। वीसी ने कहा है कि उन्होंने कभी पुलिस नहीं बुलाई। उन्होंने कानून के मुताबिक उससे सहयोग किया। प्रवेश की इजाजत सिर्फ कानून का पालन करने के लिए दी गई ना कि छात्र विरोधी कदम के लिए।

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