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SBI में है आपका अकाउंट, अब इन खातों में मिनिमम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं

एसबीआई ने सरकारी नौकरी करने वालों को भी राहत दी है। और ऐसे अकाउंट होल्डर्स को अब न्यूनत्तम बैलेंस नहीं रखना होगा।

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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने यहां खाता रखने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। SBI ने कई प्रकार के खातों में मिनिमम बैलेंस ना रखने पर वसूलने वाले चार्ज को हटा दिया है। अब ग्राहक इन खातों में मिनिमम बैलेंस नहीं भी रखेंगे तो उन्हें किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना पड़ेगा। एसबीआई ने ट्वीट कर इस फैसले की जानकारी दी है। एसबीआई के ट्वीट के मुताबिक अब छोटी बचत खातों, बेसिक बचत खातों में मंथली एवरेज बैलेंस रखने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन धन अकाउंट योजना के तहत खोले गये खातों में भी न्यूनत्तम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं है। एसबीआई ने सरकारी नौकरी करने वालों को भी राहत दी है। और ऐसे अकाउंट होल्डर्स को अब न्यूनत्तम बैलेंस नहीं रखना होगा। एसबीआई ने सभी कॉरपोरेट सैलरी रखने वालों को भी ये सुविधा दी है।

मिनिमम बैलेंस की क्या है सीमा
बता दें कि SBI ने एक अप्रैल से अपने बैंकिंग नियमों में बदलाव किया है और कई तरह के खातों में मिनिमम बैलेंस ना रखने पर चार्ज लगाया है। एसबीआई का नया नियम देश के 6 मेट्रो शहरों में बचत खातों में 5 हजार रुपये रखने अनिवार्य कर दिये हैं, जबकि शहरी क्षेत्र के खाताधारकों को अपने खाते में 3 हजार रुपये रखने जरुरी होंगे, अर्ध शहरी क्षेत्र के अकाउंट होल्डर्स के लिए ये सीमा 2 हज़ार रुपये हैं, हालांकि ग्रामीण खाताधारकों को थोड़ी राहत दी गई है और उनके लिए हज़ार रुपये ही अपने खाते में रखने जरूरी किये गये हैं। एसबीआई के नये नियमों के मुताबिक ऐसा ना करने पर ग्राहक से 20 से 100 रुपये तक का जुर्माना वसूला जा सकता है।

कैसे करें अपने खाते की पहचान
बड़ा सवाल ये है कि आप इस बात की पहचान कैसे करेंगे कि आपका खाता किस कैटेगरी में आता है। एसबीआई ने स्मॉल और बेसिक सेविंग्स अकाउंट का मतलब बताते हुए लिखा है कि छोटी बचत खाते ढील दिये गये केवाईसी नियमों के तहत खोले जा सकते हैं। लेकिन इन खातों में अधिकत्तम बैलेंस और अधिकत्तम लेनदेन की सीमा तय की गई है। बेसिक सेविग्स अकाउंट केवाईसी नियमों के तहत खोला गया खाता है। बेसिक सेविंग्स खाताधारी दूसरा सेविंग अकाउंट नहीं खोल सकता है। जबकि सभी तरह के सरकारी नौकरियों में सैलरी पाने के लिए खोले गये खाते कॉरपोरेट सैलरी पैकेज के तहत आते हैं। जन-धन खातों के पासबुक में ही लिखा होता है कि ये खाते प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले गये हैं।

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