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इन 7 वजहों से सरकारी बंगले नहीं छोड़ना चाहते नेता

अभी भी कई नेता और अधिकारी ऐसे हैं जो पद से हटने के बाद भी कई सालों से सरकारी बंगलों में रह रहे हैं।

पहले भी कोर्ट ने सरकारी बंगला खाली करने को लेकर आदेश दिए हैं।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पत्नी पायल अब्दुल्ला से जबरन उनका सरकारी बंगला खाली करवाया गया था, जो कि उन्हें 17 साल पहले आवंटित किया गया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी उत्तर प्रदेश के चार मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले खाली करने के आदेश दिए थे। ऐसा पहली बार नहीं है कि कोर्ट ने सरकारी बंगला खाली करने को लेकर आदेश दिए हो, पहले भी कोर्ट इस मामले में संज्ञान में ले चुका है। अभी भी कई नेता और अधिकारी ऐसे हैं जो पद से हटने के बाद भी कई सालों से सरकारी बंगलों में रह रहे हैं। इस सूची में कई दिग्गज नेताओं का नाम भी शामिल है। आइए जानते हैं कि आखिर ये नेता पद से हटने के बाद भी क्यों इन सरकारी बंगलों में रहते हैं और बंगलों को छोड़ना नहीं चाहते।

1. नेताओं, नौकरशाहों और जजों को आवंटित किए गए बंगलों का किराया 4000 रुपये महीनें से भी कम होता है।
2. यह बंगले 2-3 एकड़ में फैले होते हैं और इनमे बड़ा सा एक गार्डन भी होता है।
3. अगर इन सरकारी बंगलों जितना बड़ा निजी बंगला किराए पर लिया जाए तो उसका किराया 25 लाख से 30 लाख प्रति महीना होगा।
4. पृथ्वीराज रोड़, अमृता शेरगिल रोड़ और औरंगजेब रोड़ पर सबसे अधिक किराया लगता है।
5. अगर इन सरकार बंगलों की कीमत देखें तो इनकी कीमत कम से कम 100 करोड़ रुपये होती है। बता दें कि पिछले साल 2.4 एकड़ का घर 304 करोड़ रुपये में बेचा गया था।
6. दिल्ली में लुटियन जोन करीब 3,000 एकड़ जमीन में फैला हुआ है जो कि पूरी दिल्ली का 1.5 फीसदी क्षेत्र है।
7. इन क्षेत्र का जनसंख्या घनत्व भी पूरी दिल्ली में सबसे कम है, क्योंकि यहां एक एकड़ में सिर्फ 10-15 लोग रहते हैं।

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