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इन बड़े नेताओं से अमीर हैं इनकी पत्नियां, जानिए संपत्ति

हलफनामे में 464 (17 फीसदी) उम्मीदवारों ने इस बात को स्वीकारा है कि उनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज है। 2013 में ऐसे उम्मीदवारों की संख्या 407 (16 फीसदी) थी।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाग लेने वाले करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या इस बार 24 फीसदी हो गई। पिछले चुनावा में 19 फीसदी करोड़पति उम्मीदवारों ने चुनाव में भाग लिया था। खास बात यह है कि चुनाव में कई बड़े नेता ऐसे हैं जिनकी पत्नियां उनसे अमीर हैं। मध्य प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में पिछले एक साल में सैलरी और खेती से 19.7 लाख रुपए की इनकम घोषित की है। इस दौरान उनकी पत्नी साधना सिंह ने 37.9 लाख रुपए कमाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने सैलरी, खेती और निवेश कर इतना धन जुटाया जबकि पत्नी ने सुंदर डेयरी संग पार्टनरशिप कर कमाई की। दोनों की कुल संपत्ति में 22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2013 में दोनों की कुल संपत्ति 7 करोड़ रुपए थी।

इसी तरह ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने अपनी वार्षिक इनकम 97.63 लाख रुपए बताई है, जबकि उनकी पत्नी सरोज सिंह ने 4.5 करोड़ रुपए की कमाई की। हलफनामे में कमाई का स्त्रोत दिपाली होटल, दिपाली प्लेस और पेट्रोल पंप बताया है।

मिनिस्टर ऑफ स्टेट और सबसे अमीर उम्मीदवार संजय सतेंद्र पाठक ने आठ लाख रुपए आय घोषित की है, जबकि पत्नी 14 लाख रुपए की कमाई बताई। इंडस्ट्री मिनिस्टर राजेंद्र शुक्ला ने 6.6 लाख रुपए वार्षिक आय घोषित की है। हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों की सपंत्ति साल 2013 से 2018 के बीच रिकॉर्ड 86 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 226 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इंडस्ट्री मिनिस्टर राजेंद्र शुक्ला ने 6.6 लाख रुपए की आय घोषित की। वहीं उनकी पत्नी ने 26 लाख रुपए की आय घोषित की।

कांग्रेस नेता बाला बच्चन ने 7.2 रुपए वार्षिक आय घोषित की और पत्नी परवीन बच्चन ने 10 लाख रुपए घोषित की है। इसी तरह पिछले दिनों खबरों में छाए रहे कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने 15.5 लाख रुपए कमाई घोषित की जबकि इसी दौरान पत्नी ने 17.5 लाख रुपए कमाए।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश चुनाव में 17 फीसदी आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवार भाग ले रहे हैं। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार महिला उम्मीदवार सात से बढ़कर 9 फीसदी हुई हैं। एक गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) ने 2,716 उम्मीदवारों द्वारा दाखिल हलफनामे के अध्यन के बाद ये बात कही है।

संस्था के मुताबिक 183 उम्मीदवारों के हलफनामे का अध्ययन नहीं किया जा सका। इसकी वजह यह है कि चुनाव आयोग (EC) की साइट इन उम्मीदवारों ने अपना हलफनामा दाखिल नहीं किया या फिर जिन्होंने दाखिल किए उन्हें सही से स्कैन नहीं किया जा सका। रिपोर्ट के मुताबिक 2,716 उम्मीदवारों में 24 फीसदी यानी 656 उम्मीदवार करोड़पति हैं। 2013 में दाखिल हलफनामें के मुताबिक 2,494 उम्मीदवारों में 472 (19 फीसदी) करोड़पति थे।

हलफनामे में 464 (17 फीसदी) उम्मीदवारों ने इस बात को स्वीकारा है कि उनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज है। 2013 में ऐसे उम्मीदवारों की संख्या 407 (16 फीसदी) थी। इसकी तरह 295 (11 फीसदी) उम्मीदवारों ने माना है कि उनके खिलाफ गंभीर प्रवृति के केस दर्ज हैं। इनमें से 16 उम्मीदवारों ने खुद के खिलाफ हत्या से जुड़े (आईपीसी की धारा 302) मुकदमे दर्ज होने की बात स्वीकार की है।

24 उम्मीदवारों ने हत्या की कोशिश (आईपीसी की धारा 307) से जुड़े केस दर्ज होना स्वीकार किया है। छह उम्मीदवारों ने माना उनके खिलाफ अपहरण का केस दर्ज है। 20 उम्मीदवारों ने माना उनके खिलाफ महिला अपराध (आईपीसी की धारा 498A) से जुड़ा केस दर्ज है।

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