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कर्नाटक में नई सरकार के नहीं दिख रहे आसार, उपचुनाव तक बीजेपी कर सकती है इंतजार- जानें क्या हैं विकल्प?

पार्टी किस विकल्प को चुनेगी इसपर जल्द ही तस्वीर साफ हो सकती है। क्योंकि माना जा रहा है कि स्पीकर शुक्रवार तक अपने वकीलों के साथ चर्चा कर बागी विधायकों पर फैसला ले सकते हैं।

BJP, bs yeddyurappa, Congress, JDS, Congress JDS, amit shah, kr ramesh kumar, supreme court, hd kumaraswamy, vajubhai walaबीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा। फोटो: फाइनेंशियल एक्सप्रेस

कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के गठबंधन वाली सरकार गिरने के बाद राज्य में नई सरकार बनने के कोई आसार नहीं दिख रहे। मंगलवार को सरकार के गिरने के बावजूद सबसे पार्टी होने के नाते बीजेपी ने अबतक सरकार बनाने के दावा पेश नहीं किया है। माना जा रहा है कि बीजेपी सत्ता पर काबिज होने के लिए उपचुनाव तक इंतजार कर सकती है। गुरुवार को कर्नाटक बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। बैठक में कर्नाटक में सत्ता पर काबिज होने की रणनीति पर चर्चा की गई। बीजेपी की राह इतनी आसान नहीं जितनी समझी जा रही है। क्योंकि अभी बागी विधायकों के इस्तीफे और अयोग्य ठहराए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और साथ ही स्पीकर केआर रमेश कुमार ने भी अभी तक इसी पर अपना फैसला नहीं लिया है। क्योंकि बीजेपी ऐसी स्थिति में सरकार बनाना का दावा पेश नहीं करेगी।

माना जा रहा है कि बीजेपी फिलहाल किसी तरह की जल्दी में नहीं दिख रही। बीजेपी उपचुनाव तक इंतजार कर सकती है। हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी है क्योंकि इस साल महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी को कुछ समय तक इंतजार करना पड़ेगा। पार्टी को उपचुनाव में 8 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी। इस तरह 224 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी बहुमत हासिल कर लेगी। एक विकल्प यह है भी है कि राज्यपाल वाजुभाई वाला विधानसभा को भंग करने की बजाय राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश करें।

मालूम हो कि ये अटकलें इसलिए भी लगाई जा रही हैं क्योंकि मंगलवार (23 जुलाई 2019) को कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिरते ही कहा जा रहा था कि येदियुरप्पा राज्यपाल से मिलकर अगले दिन (24 जुलाई 2019) को सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। लेकिन बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव कर लिया और वह राज्यपाल से नहीं मिले। बहरहाल पार्टी किस विकल्प को चुनेगी इस पर जल्द ही तस्वीर साफ हो सकती है। क्योंकि माना जा रहा है कि स्पीकर शुक्रवार तक अपने वकीलों के साथ चर्चा कर बागी विधायकों पर फैसला ले सकते हैं।

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