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जानें-समझें : ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म’ पर निगरानी क्यों पड़ी सेंसर के दायरे की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में डिजिटल मीडिया पर नियंत्रण टीवी से ज्यादा जरूरी होने की वकालत की थी। इसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। सरकार का कहना है कि प्रिंट के नियमन के लिए प्रेस काउंसिल है, न्यूज चैनलों के लिए न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, विज्ञापन के लिए एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल आॅफ इंडिया है तो फिल्मों के लिए सेंट्रल बोर्ड आॅफ फिल्म सर्टिफिकेशन है। लेकिन डिजिटल माध्यम पर नियमन को लेकर कोई स्वायत्त एजंसी नहीं थी।

photo captionओटीटी प्लेटफॉर्म्स (ऊपर), उदय कुमार वर्मा, पूर्व सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय(नीचे बाएं) और करण बेदी, सीईओ, एमएक्स प्लेयर (नीचे दाएं)।

केंद्र सरकार ने इंटरनेट आधारित ‘आॅनलाइन समाचार पोर्टल’ और ‘आॅनलाइन आॅडियो-विजुअल’ सामग्री उपलब्ध करने वाले सभी माध्यमों (प्लेटफॉर्म्स) को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की निगरानी के दायरे में शामिल कर लिया है। 11 नवंबर को इस आशय की गजट अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना में ‘ओवर-द-टॉप’ (ओटीटी) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री की निगरानी की बात कही गई है।

इसके पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए कहा था कि आॅनलाइन माध्यम की निगरानी टीवी से ज्यादा जरूरी है। देश में डिजिटल सामग्रियों की निगरानी के लिए अभी तक कोई कानून या संस्था नहीं थी। अब सरकार के ताजा कदम का असर यह होगा नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, हॉट स्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म की सामग्रियों पर सरकार की निगरानी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट और सरकार का पक्ष

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में डिजिटल मीडिया पर नियंत्रण टीवी से ज्यादा जरूरी होने की वकालत की थी। इसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। सरकार का कहना है कि प्रिंट के नियमन के लिए प्रेस काउंसिल है, न्यूज चैनलों के लिए न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, विज्ञापन के लिए एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल आॅफ इंडिया है तो फिल्मों के लिए सेंट्रल बोर्ड आॅफ फिल्म सर्टिफिकेशन है। लेकिन डिजिटल माध्यम पर नियमन को लेकर कोई स्वायत्त एजंसी नहीं थी।

कितना बड़ा उद्योग

वर्ष 2019 में भारत में ओटीटी वीडियो स्ट्रीमिंग इस्तेमाल करने वालों की संख्या लगभग 17 करोड़ थी। वर्ष 2025 तक इनकी संख्या 26.4 फीसद की दर से बढ़ने की संभावना है। ओटीटी प्लेटफॉर्म को युवाओं से ज्यादा अधेड़ उम्र के लोग तेजी से स्वीकार कर रहे हैं।

रिसर्च फर्म कंतर की रिपोर्ट के अनुसार 35 से 44 और 45 से 54 आयु वर्ग के लोगों ने क्रमश: 18 और 63 फीसद की दर से ओटीटी को स्वीकार किया है। प्राइसवाटर हाउस कूपर्स (पीडब्लूसी) की रिपोर्ट के अनुसार अगले चार साल में देश में ओटीटी उद्योग का राजस्व 2.9 अरब डॉलर हो जाएगा। अभी यह उद्योग लगभग 5000 करोड़ रुपए का है। इसमें 28.6 फीसद की सालाना बढ़ोतरी हो रही है।

दर्शकों की बढ़ती संख्या

पूर्णबंदी के बाद से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की संख्या बढ़ी है। इनके आंकड़ों पर नजर रखने वाली संस्था ‘आॅरमैक्स’ की रिपोर्ट के अनुसार- पूर्णबंदी के दौरान लगभग 1.2 करोड़ लोगों ने वेबसीरीज देखने के लिए लॉगइन किया। अन्य एक कंपनी ‘इरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट्स’ के अनुसार भारत दुनिया में इस समय सर्वाधिक प्रति मोबाइल डेटा इस्तेमाल करने वाला देश है। अभी औसतन 9.8 जीबी डेटा प्रतिमाह उपयोग किया जा रहा है, जिसके 2024 तक 18 जीबी तक पहुंचने की संभावना है।

वर्तमान में भारत में लगभग 10 बड़े ओटीटी पर काम करने वाली कंपनियां हैं, लेकिन 2020 के दूसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार ओटीटी बाजार के 40 फीसद हिस्से पर नेट फ्लिक्स और अमेजन प्राइम का कब्जा है, जिसमें दोनों की हिस्सेदारी आधी आधी है। 17 फीसद हिस्सेदारी के साथ तीसरे नंबर पर डिज्नी प्लस हॉटस्टार है।

नियमन की जरूरत क्यों

भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म के नियमन के लिए कोई कानून या निर्देश नहीं था। मनोरंजन का यह नया माध्यम बड़े स्वरूप में अब सामने आया है। टेलिविजन, प्रकाशन और रेडियो अलग-अलग कानूनों के तहत आते हैं। ‘द इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन आॅफ इंडिया’ के पास ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर स्व-नियमन का मॉडल है, लेकिन इसको लेकर गंभीरता नहीं दिखी।

‘आॅनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट प्रोवाइडर्स’ ने ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर ‘डिजिटल क्यूरेटेड कंटेंट कंपलेंट काउंसिल’ बनाने का प्रस्ताव रखा था। इस पर सरकार ने प्रतिक्रिया नहीं जताई। बाद में आॅनलाइन मीडिया की निगरानी के लिए केंद्र ने 10 सदस्यीय समिति बनाई थी। इसमें केंद्रीय सचिवों के अलावा भारतीय प्रेस परिषद, न्यूज ब्रॉडकॉस्टर्स एसोसिएशन और इंडियन ब्रॉडकॉस्टर्स एसोसिएशन के लोग थे।

नए नियमों में क्या करना होगा

अब सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नई सामग्री को जारी करने से पहले मंत्रालय से प्रमाणपत्र लेना जरूरी होगा। अगर मंत्रालय को कोई आपत्ति होगी तो वह उसे प्रतिबंधित भी कर सकता है।

क्या कहते
हैं जानकार

लंबे समय तक यह समझा जाता रहा कि कि इंटरनेट पर आ रही सामग्रियों को सूचना-तकनीक मंत्रालय विनियमित करे। लेकिन यह सामग्रियों के नियमन का मामला है, इसलिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का फैसला सामने आया। यह तार्किक रूप से सही कदम है।
– उदय कुमार वर्मा, पूर्व सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

हम सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। एक रचनात्मक सामग्री निर्माता होने के तौर पर हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सरकार का यह फैसला न केवल प्रसारित होने वाली सामग्री की प्रकृति का संज्ञान लेगा, बल्कि यह सुनिश्चित भी करेगा कि रचनात्मकता की रक्षा हो और वह अपने क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ती रहे।
– करण बेदी, सीईओ, एमएक्स प्लेयर

क्या है ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म’

ओटीटी प्लेटफॉर्म एक तरह से आॅडियो और वीडियो प्रसारण (होस्टिंग एवं स्ट्रीमिंग) की सेवाएं देते हैं। इन सभी प्लेटफॉर्म ने वीडियो सामग्रियां, लघु फिल्म, फीचर फिल्म, वृत्त चित्र और वेब सीरीज बनाना शुरू कर दिया है। अधिकतर प्लेटफॉर्म मुफ्त में कंटेंट प्रदान करते हैं और कुछ सालाना/मासिक शुल्क भी लेते हैं।

इस तरह के प्लेटफॉर्म कुछ चुनिंदा फिल्म निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर प्रीमियम कंटेंट (ऐसी सामग्रियां, जिन्हें देखने पर शुल्क लगता है) तैयार करते हैं और उसे प्रसारित करते हैं। ओटीटी प्लेटफार्म में द वायर, द प्रिंट और स्क्रॉल जैसी समाचार वाली वेबसाइट के अलावा हॉटस्टार, वूट, नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, सोनी लिव और जी5 जैसे मनोरंजन वाले ऐप भी आते हैं।

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