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कृषि कानूनों के अमल पर शीर्ष न्यायालय की रोक के बाद, पहली बार आज मिलेंगे सरकार और किसान

नए कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों और सरकार के बीच नौवें दौर की वार्ता शुक्रवार को होगी। बातचीत दोपहर 12 बजे शुरू होगी। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इस वार्ता में सकारात्मक रुख की उम्मीद जताई है।

Author नई दिल्‍ली | January 15, 2021 6:03 AM
Bhupendra singh manभारतीय किसान यूनियन के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष भूपिंदर सिंह मान। फाइल फोटो।

दूसरी ओर, किसान संगठनों ने कहा है कि गतिरोध दूर करने के लिए वे बातचीत के पक्षधर हैं लेकिन वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से बातचीत नहीं करेंगे। वे नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर अडिग हैं।

दिल्ली की सीमाओं पर कई सप्ताह से जारी किसानों के प्रदर्शन को समाप्त करने की कोशिश के तहत अब तक हुई आठ दौर की वार्ता में कोई सफलता नहीं मिली है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को दिन में कहा कि सरकार को शुक्रवार की निर्धारित वार्ता में सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी कहा कि प्रदर्शनकारी संघ शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक में भाग लेंगे। लेकिन किसान सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से बात करने को तैयार नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी को गतिरोध के समाधान के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया था।

पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान नए कृषि कानूनों को निरस्त करवाने के लिए किसान संगठनों की अगुवाई में पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों के किसान पिछले 50 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। वे लगातार बैठकें करके रणनीति बना रहे हैं। गुरुवार की बैठक में वार्ता जारी रखने पर सहमति बनी। साथ ही, कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने तक आंदोलन जारी रखने पर सहमति बनी। किसानों ने 13 जनवरी को लोहड़ी पर्व के मौके पर दिल्ली की सीमा और पंजाब में कृषि कानूनों की प्रतियां जलार्इं। संयुक्त किसान मोर्चा के परमजीत सिंह ने बताया कि सिर्फ सिंघू बॉर्डर पर ही करीब एक लाख प्रतियां जलाई गर्इं?

किसान 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च की तैयारी कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल समूह) के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने किसानों को एक खुले पत्र में स्पष्ट किया है कि ट्रैक्टर मार्च केवल हरियाणा-नई दिल्ली सीमा पर होगा। लाल किले पर ट्रैक्टर रैली निकालने का किसानों का कोई इरादा नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से अलग हुए मान

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने गुरुवार को कहा कि वे कृषि कानूनों पर किसानों और केंद्र के बीच गतिरोध को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति से खुद को अलग कर रहे हैं। बयान जारी कर उन्होंने कहा कि वे किसान हितों से समझौता नहीं करेंगे। मान ने सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से अलग होने का फैसला ऐसे वक्त किया, जब उनके संगठन की प्रदेश इकाई ने उनसे दूरी बनाने का निर्णय किया।

भाकियू (पंजाब) के अध्यक्ष बलदेव सिंह मियांपुर ने कहा, ‘हमने मान से खुद को अलग करने का फैसला किया, क्योंकि उन्होंने कमेटी का सदस्य बनने के पहले हमारे साथ चर्चा नहीं की।’ सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अदालत ने इस कमेटी के लिए मान के अलावा शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट, दक्षिण एशिया के अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ प्रमोद जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी के नामों की घोषणा की थी।

किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने समिति के सदस्यों को लेकर आशंका जाहिर करते हुए कहा है कि इसके सदस्य पूर्व में तीनों कानूनों की पैरवी कर चुके हैं। मान ने कमेटी छोड़ने की घोषणा करते हुए कहा कि सदस्य नियुक्त करने के लिए वह शीर्ष अदालत के आभारी हैं, लेकिन किसानों के हितों से समझौता करने के बजाय वे उन्हें पेश किसी भी पद का त्याग कर देंगे।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘खुद किसान होने और यूनियन का नेता होने के नाते किसान संगठनों और आम लोगों की भावनाओं और आशंकाओं के कारण मैं किसी भी पद को छोड़ने के लिए तैयार हूं, ताकि पंजाब और देश के किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं हो।’ मान ने कहा, ‘मैं समिति से अलग हो रहा हूं और मैं हमेशा अपने किसानों और पंजाब के साथ खड़ा रहूंगा।’

मान ने सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से अलग होने का फैसला ऐसे वक्त किया, जब उनके संगठन की प्रदेश इकाई ने उनसे दूरी बनाने का निर्णय किया। भाकियू (पंजाब) के अध्यक्ष बलदेव सिंह मियांपुर ने कहा, ‘हमने मान से खुद को अलग करने का फैसला किया, क्योंकि उन्होंने कमेटी का सदस्य बनने के पहले हमारे साथ चर्चा नहीं की।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि किसान अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और वे किसी भी कमेटी के खिलाफ हैं, फिर पैनल का हिस्सा बनने का क्या तुक है।’ उन्होंने कहा कि खन्ना में बैठक के बाद मान से दूरी बनाने का फैसला किया गया।

बलदेव सिंह ने दावा किया कि बैठक का फैसला जानने के बाद शायद मान ने अपना फैसला बदला। उन्होंने कहा कि भाकियू सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी को नहीं मानती है और वे कानूनों को निरस्त किए जाने की मांग कर रहे किसान संगठनों के साथ हैं। मान (81) अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के भी अध्यक्ष हैं। वह 1990 से 1996 के दौरान राज्यसभा सदस्य रहे। उन्होंने 2012 और 2017 के पंजाब विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का समर्थन किया था।

कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने मान के फैसले का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि कमेटी के अन्य तीन सदस्य भी इससे अलग हो जाएंगे। किसान संगठनों ने भी मान के निर्णय की सराहना की। भारतीय किसान यूनियन (एकता-उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह ने कहा, ‘उन्होंने (मान ने) सही कदम उठाया। अन्यथा उन्हें किसानों के रोष का सामना करना पड़ता।’

खुले मन से होगी बातचीत : कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को कहा कि प्रदर्शनकारी किसान संगठनों और सरकार के बीच नौवें दौर की वार्ता तय कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को होगी और केंद्र को उम्मीद है कि चर्चा सकारात्मक होगी। तोमर ने कहा, ‘सरकार खुले मन से किसान नेताओं के साथ बातचीत करने को तैयार है।’

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गतिरोध सुलझाने के लिए चार सदस्यीय कमेटी नियुक्त किए जाने और फिर एक सदस्य के इससे अलग हो जाने के कारण नौवें दौर की वार्ता को लेकर भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए तोमर ने कहा कि सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच 15 जनवरी को दिन में 12 बजे से बैठक होगी।

बातचीत जारी रखना जरूरी : टिकैत

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार को कहा कि प्रदर्शनकारी किसान संघ सरकार के साथ तय नौवें दौर की वार्ता में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि तिरोध को सुलझाने तथा आंदोलन को समाप्त करने के लिए वार्ता को जारी रखना जरूरी है। राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर कई सप्ताह से जारी किसानों के प्रदर्शन को समाप्त करने में अब तक हुई आठ दौर की वार्ता में कोई सफलता नहीं मिली है।

टिकैत ने कहा कि प्रदर्शनकारी संघ शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक में भाग लेंगे। किसान संघों को शुक्रवार को होने वाली वार्ता से उम्मीद के बारे में पूछे जाने पर टिकैत ने कहा, ‘देखते हैं कि क्या होता है, लेकिन सरकार के साथ हमारी बैठकें तब तक जारी रहेंगी जब तक हमारा प्रदर्शन समाप्त नहीं हो जाता, क्योंकि ऐसा होना जरूरी है।’ जब पूछा गया कि अगर कोई समाधान नहीं निकलता तो क्या शुक्रवार की वार्ता अंतिम हो सकती है, इस पर टिकैत ने कहा, ‘हम सरकार के साथ बैठकों का विरोध नहीं करेंगे।’

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