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मुंबई: ट्रेन हादसे से भी न सीखा सबक, 3.5 लाख यात्रियों वाले स्टेशन पर एंबुलेंस की सुविधा तक नहीं

ठाणे जीआरपी के अधिकार क्षेत्र में 10 रेलवे स्टेशन आते हैं और इन 10 रेलवे स्टेशनों के बीच में सिर्फ 1 एंबुलेंस है। स्टेशनों पर हर साल 200 से ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं।

रेलवे स्‍टेशन पर उमड़ी भीड़। (Photo : Express Archive)

दीवा रेलवे स्टेशन पर बीते कई महीनों में यात्रियों की तादाद मं बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन यहां एंबुलेंस नहीं है। बीते 15 दिनों में समय पर चिकित्सकीय मदद न मिलने के कारण दो लोग अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं। ठाणे की सरकारी रेलवे पुलिस के अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने एंबुलेंस की जरूरत के बारे में उच्चाधिकारियों को लिखा था लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, ठाणे जीआरपी के अधिकार क्षेत्र में 10 रेलवे स्टेशन आते हैं और इन 10 रेलवे स्टेशनों के बीच में सिर्फ 1 एंबुलेंस है। स्टेशनों पर हर साल 200 से ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ठाणे जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारी आर शिरतोड़े ने बताया,”दीवा-कलमबोली रेलवे लाइन ठाणे स्टेशन से दूर है। एंबुलेंस की सुविधा ठाणे स्टेशन पर है। इसलिए दुर्घटना स्थल पर पीड़ित की जान बचाने के लिए हादसे के तुरंत बाद पहुंचना संभव नहीं होता, इसमें वक्त लगता है। इसका कारण दीवा-कलमबोली मार्ग पर सड़कों की हालत खराब होना भी इसका एक कारण है।”

ठाणे जीआरपी ठाणे से दीवा (4 स्टेशन) और दीवा से कलमबोली (6 स्टेशनों) तक देखभाल करती है। ठाणे जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारी ने एचटी को बताया,”दीवा और कलमबोली के बीच स्थित स्टेशनों या फिर कलमबोली स्टेशन के पास स्थित दुर्घटना स्थलों तक पहुंचने में करीब ढाई घंटे का वक्त लगता है। समस्या उस वक्त और ज्यादा विकराल हो जाती है जब ठाणे जीआरपी के अर्न्तगत आने वाले कई स्टेशनों पर एक के बाद एक हादसे हो रहे हों। रेलवे को कम से कम दो और एंबुलेंस देनी चाहिए। जिनमें से एक ठाणे से दीवा और दूसरी दीवा और कलमबोली स्टेशनों के बीच तैनात हो।”

हाल ही में हुए एक हादसे के बाद ये समस्या प्रकाश में आई थी। कलमबोली स्टेशन पर 24 साल का एक शख्स लंबी दूरी की एक ट्रेन से गिर गया था। उसके दोस्तों ने आरोप लगाया कि पनवेल स्टेशन के अधिकारियों ने चिकित्सकीय सुविधा देने से इंकार कर दिया। उसका शरीर घंटों तक ट्रैक पर ही पड़ा रहा। कलमबोली स्टेशन जीआरपी के अर्न्तगत आता है इसलिए उन्हें ही मृतक के शव को वहां से ले जाने के लिए कहा गया। दो लोकल ट्रेन बदलने के बाद आखिरकार उसके दोस्त अंत में उसके शरीर को लेकर ठाणे के सिविल अस्पताल गए। तब तक हादसे को पूरे नौ घंटे बीत चुके थे।

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