उत्तराखंड में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के दो दिन बाद एक दक्षिणपंथी संगठन ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान के शुद्धिकरण के लिए हवन किया। इसके बाद जबरदस्त सियासी विवाद खड़ा हो गया। अब मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रतिक्रिया दी है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हम पहले से ही यह बोल रहे हैं कि इस देश में दलितों के लिए कोई जगह नहीं है। धर्म के नाम पर सभी को बांटा जा रहा है और वहां पर हवन करने की क्या जरूरत थी। रामलीला मैदान में सार्वजिक कार्यक्रम होते हैं। हर पार्टी के लोग यहां कार्यक्रम करते हैं, लेकिन उन्होंने जो किया एक तो हिंदू धर्म के खिलाफ किया और दूसरा उन्होंने देश को बांटने का और जातियों-जातियों का झगड़ा लगाने का काम वो लोग कर रहे हैं।”

खड़गे ने सदन में उठाया मुद्दा

वहीं, राज्यसभा में भी यह मुद्दा गूंजा। खड़गे ने सदन के अंदर कहा, “मैं हल्द्वानी में था, जहां मैंने रामलीला मैदान में एक जन भाषण दिया। लाखों लोग वहां मौजूद थे। उस समय मैंने किसी भी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, मैंने केवल सरकार के मुद्दों को दोहराया। लेकिन मेरे भाषण के बाद, बीजेपी के लोगों ने उस मंच को ‘शुद्ध’ करने के लिए वहां हवन किया। क्या लोकतंत्र में यही तरीका है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं? मैं विपक्ष का प्रतिनिधि हूं।”

जेपी नड्डा ने जताया खेद

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर जवाब दिया और खेद जाहिर किया। उन्होंने सदन में कहा, “खड़गे जी ने जो कहा वह वाकई दुखद है। यह न सिर्फ कांग्रेस पार्टी के लिए बल्कि हम सबके लिए है। बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। कभी नहीं। लेकिन हम इसकी जांच करेंगे। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि वहां जो कुछ भी हुआ उसकी पूरी जांच की जाएगी। लेकिन मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। मैं इसकी निंदा करता हूं। राष्ट्रीय अध्यक्ष इस मामले को देखेंगे। हम सभी को बहुत खेद है कि आपकी भावनाएं आहत हुईं।”

10 अगस्त को किया गया हवन

बता दें कि श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन के सदस्यों ने 10 अगस्त को यह हवन किया। इसमें उन्होंने स्थल के राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि खड़गे के 8 अगस्त के संबोधन के दौरान विवादास्पद नारे लगाए गए थे।

संगठन के सदस्य गिरीश चंद्र पांडे ने इस हवन का बचाव करते हुए कहा कि यह जगह धार्मिक महत्व रखती है और इसे केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ही आरक्षित रखा जाना चाहिए। पांडे ने कहा, “राम लीला मैदान धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए है और इसे राजनीतिक दलों को नहीं दिया जाना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारे इस्लामी नारों जैसे लग रहे थे।

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मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसद पिछले कई दिनों से रोजाना संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार जवाबदेही से बच रही है। इस मुद्दे पर बात करते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आकर बयान देने की मांग की। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…