मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनहित में बड़ा निर्णय लेते हुए गंगा एक्सप्रेस-वे को वाणिज्यिक संचालन की तारीख से 15 दिनों तक टोल-फ्री रखने की घोषणा की है। इस फैसले के तहत लोग बिना किसी शुल्क के प्रदेश के सबसे लंबे व अत्याधुनिक एक्सप्रेस-वे पर सफर कर सकेंगे। 15 दिन की इस छूट से होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई राज्य सरकार अथवा यूपीडा द्वारा तय किए प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर ‘उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथारिटी’ (यूपीडा) ने गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना का संचालन करने वाली कंपनी ‘आइआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर’ और ‘अदाणी इंफ्रास्ट्रक्चर’ को 15 दिनों तक टोल वसूली स्थगित रखने के निर्देश जारी कर दिए हैं। यूपीडा द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस अवधि में यात्रियों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
गंगा एक्सप्रेस वे को लेकर न्यूज
यह निर्णय उस समय लिया गया है, जब स्वतंत्र अभियंता द्वारा रियायत समझौता के अनुच्छेद 14.3.1 के तहत ‘प्रोविजनल सर्टिफिकेट’ जारी किया गया, जिससे एक्सप्रेस-वे की वाणिज्यिक संचालन की तारीख निर्धारित हो गई। इसके साथ ही एक्सप्रेस-वे आम जनता के उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार माना गया। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेस-वे प्रदेश के 12 जनपदों को जोड़ता है और इसे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है।
15 दिन की यह टोल छूट न केवल आमजन को राहत देगी, बल्कि इस मेगा परियोजना के प्रति सकारात्मक माहौल भी तैयार करेगी। इस फैसले को प्रदेश सरकार की ‘जनहित प्रथम’ नीति के रूप में देखा जा रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत डीबीएफओटी (टोल) माडल पर विकसित किया गया है। इसके तहत संचालन करने वाली कंपनी को 27 वर्षों तक टोल वसूली का अधिकार दिया गया है। बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को हरदोई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गंगा एक्सप्रेस-वे का औपचारिक उद्घाटन किया था।
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