ताज़ा खबर
 

विशेष: योगनामा

भारत की योग की विरासत ‘हेल्थ’ और ‘फिटनेस’ की नई दरकार बनकर सामने आई है। भागती-दौड़ती जिंदगी के बीच सेहत को लेकर जिस तरह लोग जागरूक हो रहे हैं, उससे योग को लेकर एक स्वाभाविक आकर्षण आज हर तरफ दिख रहा है।

Yoga, Pranayam, health, fitnessभागती-दौड़ती जिंदगी के बीच सेहत को लेकर जिस तरह लोग जागरूक हो रहे हैं, उससे योग को लेकर एक स्वाभाविक आकर्षण आज हर तरफ दिख रहा है।

विकास और समृद्धि का साझा आधुनिक दौर की एक चमकदार उपलब्धि है। पर इसके चारों तरफ सभ्यतागत स्फीतियों का घना अंधकार पसरा है। इस उपलब्धि की विडंबना ही यह है कि इसमें न तो जीवन मूल्यों पर जोर है और न ही उसके खतरनाक स्थगन को लेकर कोई बड़ी चिंता। ऐसे में जीवन से लेकर प्रकृति तक जिस तरह की चुनौतियों से आज का मनुष्य घिरा है, उससे उबरने का एक ही विकल्प है- योग। भारत की पहल से संयुक्त राष्ट्र ने जब योग दिवस मनाने की घोषणा की तो इसे कई कारणों से नई उम्मीदों की राह खोलने वाला कदम माना गया। हिंसा, घृणा से लेकर कोरोना महामारी के तौर पर आए नए वैश्विक संकट के बीच योग जीवन में संयम, संतुलन और सौहार्द की एक बड़ी सीख दे रहा है। आधुनिक समय में इंसानी दरकारों और सरोकारों के बीच योग की बढ़ी स्वीकृति के निहितार्थों पर प्रकाश डाल रहे हैं प्रेम प्रकाश।

बीते तीन दशकों में जिस तरह विश्व में विकास और समृद्धि को लेकर निजी और सार्वजनिक अवधारणाएं बदली हैं, उसने जीवन में संतुलन और संयम की दरकार को कहीं एक किनारे कर दिया है। दिलचस्प है कि इस नजरअंदाजी ने जल्दी ही मनुष्य को यह भी बता दिया कि जीवन की अपनी व्यवस्था, उसकी लय, गति और संतुलन के साथ अगर ज्यादा छेड़छाड़ हुई तो फिर वह बड़ी कीमत वसूल कर सकता है। यह बात इस तरह भी समझी जा सकती है कि विकास और समृद्धि के उत्तर-आधुनिक साझे ने समय और समाज के सामने उपलब्धियों की चौंध तो पैदा की ही है पर तमाम तरह की शारीरिक-मानसिक परेशानियों को भी बढ़ाया है।

स्वाभाविक आकर्षण
आज शहरी कामकाजी तबके में अवसाद और तनाव इस तरह व्याप्त हैं कि इससे मुक्ति के लिए हर तरफ एक बेचैनी है। इन बेचैनियों के बीच भारत की योग की विरासत ‘हेल्थ’ और ‘फिटनेस’ की नई दरकार बनकर सामने आई है। भागती-दौड़ती जिंदगी के बीच सेहत को लेकर जिस तरह लोग जागरूक हो रहे हैं, उससे योग को लेकर एक स्वाभाविक आकर्षण आज हर तरफ दिख रहा है। मन और शरीर को एक संयमित अनुशासन में ढालने की नई ग्लोबल ललक का नतीजा यह है कि योग आज दुनिया के पांच सबसे तेजी से बढ़ने वाले आर्थिक उपक्रमों में शामिल है। ब्रांड और उद्योग के तौर पर बढ़ी योग की वैश्विक स्वीकृति का आलम यह है कि एक आकलन के मुताबिक दुनियाभर में 30 करोड़ से ज्यादा लोग नियमित योगाभ्यास कर रहे हैं। अमेरिका जैसे मुल्क में डेढ़ करोड़ से भी ज्यादा लोग योग को अपना चुके हैं और वहां योग का कारोबार 20 से 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। एक टीवी न्यूज चैनल के मुताबिक तो यह आंकड़ा इससे भी ज्यादा यानी 30 अरब डॉलर का है।

दरकार भी, बाजार भी
अमेरिकन कॉलेज आफ स्पोर्ट्स एंड मेडिसीन अपने एक सर्वे के आधार पर योग को दुनिया के टॉप-10 फिटनेस ट्रेंड के तौर पर चिह्नित कर चुका है। यही नहीं, जापान जैसा मुल्क जो अपनी जरूरत को इलेक्ट्रानिक और डिजिटल डिवाइस से पूरा करने का आदी है और उसके यहां शारीरिक चुस्ती-फुर्ती की कुछ अपनी रिवायतें भी हैं, वहां महज पांच साल के भीतर ने 413 फीसद का इजाफा दर्ज कराके योग का कारोबार कई साल पहले बड़ा कीर्तिमान रच चुका है। मौजूदा दौर में योग की लोकप्रियता और इसके एक बड़े उद्योग के तौर पर सामने आने के पीछे बड़ी वजह संयुक्त राष्ट्र के द्वारा विश्व योग दिवस की घोषणा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर, 2014 को संयुक्तराष्ट्र महासभा में योग की अहमियत को एक गंभीर और वैश्विक स्वीकृति दिलाने के लिए अलग से एक दिवस की घोषणा का प्रस्ताव रखा था। इस पर 11 दिसंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने 193 में से 177 देशों की हामी के साथ 21 जून को विश्व योग दिवस मनाने की घोषणा कर दी। दिलचस्प है कि भारत की तरफ से आया यह प्रस्ताव तीन महीने से भी कम समय में पास हुआ, जो संयुक्तराष्ट्र के इतिहास में किसी दिवस के प्रस्ताव को मानने की सबसे अल्प अवधि के लिहाज से एक कीर्तिमान है।

एक साथ कई योग
अपने नए ग्लोबल अवतार ने ‘योग’ को ‘योगा’ बना दिया है। इसके साथ ही योग की पारंपरिक पद्धति पावर योगा, हॉट योगा, फ्लो योगा, फॉरेस्ट योगा से लेकर स्नो योगा तक 30 से ज्यादा किस्म के योग के तौर पर पूरी दुनिया में प्रचलित हैं। यह सारा खेल ब्रांडिंग का है, जिसमें योग ट्रेनर योग को एक नए तरह की पैकेजिंग और आकर्षक ब्रांडिंग के साथ लोगों के सामने ला रहे हैं। सभी ‘योगा वैरिएंट’ का प्रचार उनका अभ्यास करने वाले किसी बड़ी सेलिब्रेटी के नाम पर किया जा रहा है।

आलम यह है कि बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी से लेकर हॉट योग गुरु विक्रम चौधरी के महंगे डीवीडी खरीद कर या उनके आॅनलाइन क्लासेज के जरिए लोग योग सीख रहे हैं, उसे अपने अभ्यास का हिस्सा बना रहे हैं। कोई वजन कम करने के लिए योग कर कर रहा है तो कोई चिर युवा बने रहने का खयाल लिए योग को अपने जीवन में अपना रहा है।

कोरोना संक्रमण के बीच योग
21वीं सदी के दूसरे दशक का आगाज जिस तरह कोरोना महामारी के साथ हुआ है, उसने खासतौर पर योग की दरकार को और पुष्ट किया है। जीवन, संयम और प्रकृति के जिस समकोण के बीच देश-समाज को देखना का जोर कोविड-19 के संकट के बीच पूरी दुनिया में बढ़ा है, उसमें योग से जुड़ाव सभी के लिए एक स्वाभाविक विकल्प बन गया है। यह स्वाभाविकता इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि बीते कुछ दशकों में जीवन और अध्यात्म का साझा कहीं न कहीं दरका है। अध्यात्म और शांति को भी लोग दो मिनट नूडल्स की तरह लोग चाहने लगे हैं। पर अब भौतिक सुखों के पीछे भागने की होड़ और अपनी व्यस्त जीवनशैली में तनावमुक्तिऔर स्वास्थ के लिए योग की शरण में आ रहे हैं और यह रुझान अकेले भारत का नहीं बल्कि पूरी दुनिया कै है।

सेहत, सौहार्द और शांति
संयुक्त राष्ट्र की तरफ से हर साल योग दिवस को एक खास थीम के साथ मनाने की घोषणा की जाती है। इस साल तो खैर कोरोना संक्रमण के कारण योग घर पर योग, परिवार के साथ योग का थीम दिया गया। पर इसके पहले के वर्षों में देखें तो योग एक साथ सेहत, सौहार्द और शांति के साथ जुड़ता है।
यही नहीं, इसके साथ पीढ़ियों का अंतर भी समाप्त हो जाता है। हर क्षेत्र और आयु के स्त्री-पुरुष के बीच योग की व्याप्ति है। आने वाले कुछ और वर्षों में संभव है कि योग अपनी इन्हीं कुछ खासियतों के साथ विश्व मानवता को जीवन, संस्कार और अभ्यास की ऐसी राह पर ले आए, जहां क्रोध, घृणा, बीमारी और प्रदूषण जैसी कई समस्याओं से हम उबरने की स्थिति में हों।

Next Stories
1 शोध रपट: सबकी जेब पर पड़ेगी महामारी की मार
2 24 जून का इतिहास: 1974 में टेस्ट क्रिकेट में मात्र 42 रन पर सिमटी टीम इंडिया, विंबलडन में 11 घंटे तक चला मैच
3 स्वामी विवेकानंद : योग दर्शन के आधुनिक भाष्यकार
ये पढ़ा क्या?
X