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लोकसभा में सरोगेसी बिल पास, टीआरएस सांसद बोले- सरोगेसी से पैदा हुए थे बलराम

बहस के दौरान टीआरएस सांसद बीएन गौड़ ने कहा कि हिंदुओं के भगवान बलराम भी सरोगेसी से पैदा हुए थे। उन्होंने कहा कि सरोगेसी आधुनिक विज्ञान ही नहीं, बल्कि इसका संबंध पौराणिक है। गौड़ ने कहा कि देवकी के गर्भ को माया ने रोहिणी में ट्रांसफर किया था।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: pixabay)

बुधवार (19 दिसंबर) को लोकसभा में सरोगेसी (नियामक) विधेयक पास हो गया। इस बिल के पास होने से अब देश में व्यावसायिक सरोगेसी (किराए की कोख) के जरिये बच्चे को जन्म देने पर रोक लग गई है। लोकसभा में इस बिल को लेकर लंबी बहस चली। इसी बीच एक सांसद ने रामायण से लेकर महाभारत काल तक से सरोगेसी का संबंध बता डाला। सांसद ने यह तर्क तक डे डाला कि एक भगवान भी सरोगेसी से पैदा हुए थे। बहस के दौरान टीआरएस सांसद बीएन गौड़ ने कहा कि हिंदुओं के भगवान बलराम भी सरोगेसी से पैदा हुए थे। उन्होंने कहा कि सरोगेसी आधुनिक विज्ञान ही नहीं, बल्कि इसका संबंध पौराणिक है। गौड़ ने कहा कि देवकी के गर्भ को माया ने रोहिणी में ट्रांसफर किया था। सांसद ने जोर दिया कि रामायण से लेकर महाभारत तक में सरोगेसी के विवरण मिलते हैं। लोकसभा में बिल को लेकर चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सभी सांसदों ने महिला और शिशु की गरिमा का ध्यान रखने के लिए अपनी बात कही है।

उन्होंने कहा कि यह बिल व्यावसायिक सरोगेसी पर रोक लगाने के लिए लाया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बिल व्यावसायिक सरोगेसी और उससे संबंधित अनैतिक कार्यों पर रोक लगाएगा। बता दें कि 2016 से यह बिल अटका पड़ा था। इस बिल के पास होने से अब केवल गर्भधारण में अक्षम और माता-पिता बनने में अक्षम लोग ही सरोगेसी तकनीक का लाभ ले सकेंगे। इसके लिए इच्छुक दंपति को उचित अथॉरिटी से योग्यता प्रमाणपत्र लेना होगा। साथ ही सरोगेट मां के लिए दंपति का करीबी रिश्तेदार होना भी जरूरी है।

बिल के मुताबिक सरोगेसी का लाभ लेने के इच्छुक लोगों का भारतीय होना अनिवार्य होगा और उनकी शादी के कम से कम पांच साल होने भी जरूरी हैं। दंपति में से किसी एक को यह साबित करना होगा कि वह बच्चा पैदा करने की स्थिति में नहीं है। बिल में एक राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड, राज्य सरोगेसी बोर्ड का गठन और सरोगेसी की प्रक्रिया और प्रक्रिया के नियमन के लिए उचित अधिकारियों की नियुक्ति का नियम भी शामिल है।

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