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‘अस्पताल में दाखिले के लिए केंद्र राष्ट्रीय नीति बनाए’, शीर्ष अदालत ने कहा- मरीजों से पते का प्रमाण न मांगा जाए

वीडियो कॉफ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा कि एक व्यक्ति को नोएडा के अस्पताल में दाखिला देने से इसलिए इनकार कर दिया गया क्योंकि उसके आधार कार्ड पर मुंबई का पता था।

Edited By Sanjay Dubey नई दिल्ली | Updated: May 1, 2021 5:37 AM
लखनऊ के अस्पताल के बाहर लगा बोर्ड (फोटोेः ट्विटर@bbc news)

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से कहा कि अस्पतालों में कोविड मरीजों के दाखिले के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाए। इससे पहले अदालत को यह बताया गया था कि कोविड-19 संक्रमित मरीजों से एनसीआर के कुछ अस्पताल स्थानीय पते का प्रमाण मांग रहे हैं। न्यायमूर्ती डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले एक पीठ देश में कोविड-19 प्रबंधन से संबंधित एक स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई कर रही थी।

पीठ में न्यायामूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट भी शामिल हैं। पीठ ने कहा, ‘केंद्र को मरीजों के दाखिले के लिए एक समान नीति बनानी होगी।’ वीडियो कॉफ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा कि एक व्यक्ति को नोएडा के अस्पताल में दाखिला देने से इसलिए इनकार कर दिया गया क्योंकि उसके आधार कार्ड पर मुंबई का पता था। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ‘अस्पतालों द्वारा मरीजों के दाखिले के लिए किसी स्थानीय पते के प्रमाण की मांग न की जाए।’

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के अध्यक्ष रमेश गुप्ता सहित वकीलों के एक समूह ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय से कोविड-19 से पीड़ित वकीलों के लिए चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की मांग की जिस पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य पूरी तरह विफल हो गया है। सुनवाई के दौरान वकील रो पड़े जिसमें वरिष्ठ वकील गुप्ता भी शामिल थे। उन्होंने न्यायाधीशों से अपील की कि उनकी मदद करें क्योंकि उन्हें चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के पीठ ने कहा कि वे वकीलों के दर्द को समझ रहे हैं और स्थिति को राज्य की विफलता करार दिया। पीठ ने कहा, ‘हम आपके दर्द को समझते हैं। हम भी इससे गुजर रहे हैं। कोविड में बेतरतीब इजाफा हुआ है। किसी ने नहीं सोचा था कि यह इस तरीके से हम पर हमला करेगा। यहां धन का मुद्दा नहीं है। समस्या बुनियादी ढांचे की है।’ इसने कहा, ‘समस्या है कि हमारे पास डॉक्टर, नर्स, आक्सीजन और दवाएं नहीं हैं। यह पूरी तरह से राज्य की विफलता है। यह हमारे लिए कठिन होता जा रहा है।’ अदालत वकीलों के लिए चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

दिल्ली में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से 375 और मरीजों की मौत हो गई जबकि कोविड-19 के 27,047 नये मामले सामने आये। वहीं संक्रमित होने की दर 32.69 प्रतिशत रही। यह जानकारी दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग की नवीनतम बुलेटिन में दी गयी है।

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