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चंदना बाउरी : सबसे निर्धन उम्मीदवार पहुंचीं विधानसभा

पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों को लेकर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के बाद सर्वाधिक चर्चा एक और नाम की हो रही है। वे हैं सालतोड़ा विधानसभा से चुनी गर्इं चंदना बाउरी।

chandna Baureeचंदना बाउरी। फाइल फोटो।

पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों को लेकर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के बाद सर्वाधिक चर्चा एक और नाम की हो रही है। वे हैं सालतोड़ा विधानसभा से चुनी गर्इं चंदना बाउरी। घरेलू नौकरानी का काम कर अपने मजदूर पति का हाथ बंटाने वालीं महिला, जिन्हें अचानक ही चुनाव लड़ने का मौका मिला और उन्होंने जीतकर यह जता दिया कि लोकतंत्र में आम आदमी ही महत्त्वपूर्ण होता है। भाजपा के टिकट पर लड़ीं 30 साल की चंदना ने लगभग चार हजार वोटों से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार संतोष कुमार मंडल को हराया है।

एक झोपड़ी में रहकर गुजर करने वालीं चंदना की कहानी सोशल मीडिया पर खूब प्रचलित हो रही है। कोई उन्हें लोकतंत्र की पहचान बता रहा है तो कोई आम आदमी की ताकत। चंदना बाउरी की ओर से चुनाव के लिए सौंपे गए घोषणापत्र के मुताबिक उनके पास कुल 31,985 रुपए की संपत्ति है। इसके अलावा उनके पास तीन गाय और तीन बकरियां हैं। तीन बच्चों की मां चंदना बाउरी के पति घर बनाने वाले एक मजदूर हैं।

चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिलने पर चंदना बाउरी ने कहा था कि टिकट की घोषणा से पहले मुझे इस बात का भरोसा ही नहीं था कि मुझे राज्य में विधानसभा के लिए टिकट मिल सकता है। मैं जिन घरों में काम करती थी, उनमें से एक ने मुझसे आॅनलाइन आवेदन कराया था।’ अब चंदना बाउरी की जोरदार जीत के ट्विटर पर भी चर्चे हैं। तृणमूल की ओर से स्वप्न बारुई इस सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। इस बार उनका टिकट काट संतोष कुमार मंडल को मौका दिया था।

ट्विटर पर चंदना बाउरी के जीतने की खबर को आम आदमी की असली जीत कहा जा रहा है। एक ट्विटर उपयोक्ता ने लिखा है कि बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के उनकी जीत आम महिला की जीत है। चंदना के पास न धन था, न ताकत। भाजपा ने पार्टी की ओर से एक जीप दी थी। संभवत: उनका चुनाव खर्च बंगाल में सबसे कम रहा। उन्होंने पैदल अभियान और जनसंपर्क पर ज्यादा ध्यान दिया।

शुरुआती एक जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंदना बाउरी को बंगाल की महिलाओं की आंकाक्षा की प्रतीक बताया था, लेकिन उसके बाद उनके पास पार्टी का कोई बड़ा नेता नहीं खड़ा हुआ। वे खुद घर घर जाकर पैदल अपना प्रचार करती रहीं। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, चंदना बाउरी बंगाल में सबसे गरीब उम्मीदवारों में से एक रहीं। वह गंगाजलघाटी के केलाई गांव स्थित अपने घर से रोजाना सुबह आठ बजे चुनाव प्रचार के लिए निकलतीं। लोगों से महिला संबंधी अपराधों, गरीबी, शिक्षा और पीने के पानी जैसे मुद्दों पर वोट मांगे। चंदना बाउरी के पति सरबन राजमिस्त्री का काम करते हैं। पति और पत्नी दोनों मनरेगा में पंजीकृत मजदूर हैं।

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