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रेस्तरां के खाने में रूबी रोबोट का तड़का

जयपुर में नीतू की शादी हुई है। नीतू बताती हैं कि मैंने 31 मई 2019 में रोबोट का रेस्तरां शुरू किया। यह लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। लोगों को बहुत आश्चर्यचकित सा लगता है कि एक रोबोट उनसे हेलो, हाय, एक्सक्यूज मी, खाना ले लो ये सब बोल रहा है।

Author Updated: January 30, 2020 1:36 AM
तेरह साल की उम्र से खाना बनाने में शौक रखने वाली नीतू बताती हैं कि मुझे बचपन से खाना बनाने का शौक था। बड़े होकर सोचा कि केवल घर की रसोई तक सिकुड़ना नहीं है बल्कि दुनिया को अपना हुनर दिखाना है।

मीना

सुबह बच्चों के लिए नाश्ता, पति के लिए लंच, परिवार के अन्य सदस्यों के लिए उनकी पसंद का खाना बनाते-बनाते औरतें कहने लगती हैं कि मैं मशीन नहीं हूं। पूरे दिन मशीन की तरह रसोई में काम करना पड़ता है, लेकिन किसको पता था कि खाना बनाने जैसा उबाऊ काम किसी के लिए पैशन बनकर उसे महिला उद्यमी बनाएगा। खाने को अपना पैशन बनाने वालीं जयपुर की नीतू सुराना ‘द येलो हाउस’ रोबोट रेस्तरां जयपुर में चलाती हैं। इस रेस्तरां की खासियत यहां के रोबोट हैं। आज मशीन और औरत दोनों एक साथ मिलकर लोगों का पेट भर रहे हैं।

प्लीज टेक योर ऑर्डर… प्रेस एक्जिट… ये शब्द बिल्कुल वैसे ही बोले गए जैसे कोई 206 हड्डियों वाला जीता जागता इंसान बोलेगा। पर ये शब्द पीले रंग की पोशाक में काली प्लेट लिए रोबोट के हैं। इस रोबोट का नाम रूबी है। कोलकाता में पली-बढ़ी नीतू बताती हैं कि हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। ये मेक इन इंडिया का समय है। केवल पारंपरिक तरीके से काम करने से नहीं होगा बल्कि आधुनिक तकनीक को अपनाना होगा। तेरह साल की उम्र से खाना बनाने में शौक रखने वाली नीतू बताती हैं कि मुझे बचपन से खाना बनाने का शौक था। बड़े होकर सोचा कि केवल घर की रसोई तक सिकुड़ना नहीं है बल्कि दुनिया को अपना हुनर दिखाना है। अगर समाज ने लड़कियों को रसोई संभालने की जिम्मेदारी दे ही रखी है तो क्यों न इस काम को कुछ रोचक बना दिया जाए। नीतू बताती हैं कि एक बार वे जापान गर्इं, वहां उन्होंने रोबोट देखे। बस वहीं से उनके दिमाग के विज्ञान की विद्यार्थी जाग गई और जयपुर आकर रोबोट का रेस्तरां शुरू किया।

जयपुर में नीतू की शादी हुई है। नीतू बताती हैं कि मैंने 31 मई 2019 में रोबोट का रेस्तरां शुरू किया। यह लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। लोगों को बहुत आश्चर्यचकित सा लगता है कि एक रोबोट उनसे हेलो, हाय, एक्सक्यूज मी, खाना ले लो ये सब बोल रहा है। नीतू अपने ग्राहकों के अनुभव और उनके चेहरे की खुशी की चमक इजहार करते हुए बताती हैं कि लोग जब मेरे रेस्तरां में खाना खाने आते हैं तो उन्हें रूबी (रोबोट) खाना सर्व करती है। ये सब लोगों को बहुत पसंद आता है। ग्राहक बताते हैं कि हमने रोबोट केवल टीवी पर देखे हैं कभी अपनी आंखों के सामन चलते-फिरते और हमसे बात करते नहीं देखे। नीतू बताती हैं कि बहुत से ग्राहकों को लगता है रोबोट देखने का उनका सपना पूरा हो गया।

‘द येलो हाउस’ में दो रोबोट हैं, जिनमें से एक रेस्तरां में घूमता रहता है और एक आॅर्डर किया हुआ खाना देता है। नीतू का मानना है कि जब कोई भी व्यवसाय शुरू किया जाता है तो उसमें बाजार बड़ी भूमिका रखता है। लोगों के मिजाज को भी समझना पड़ता है। इसी सोच के मद्देनजर नीतू ने रोबोट को जोड़कर रेस्तरां की शुरुआत की।

वे कहती हैं कि मेरा मानना था कि लोगों को खाने के अलावा कुछ अलग और दिया जाए, जिसका सिला ये रोबोट हुए। खाना तो सभी खाते हैं। लेकिन मुझे कुछ हट के दिखाना था। इस वजह से रोबोट का रेस्तरां शुरू किया। अब लोग मशीनरी आइटम ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हमारे यहां ट्रेडिशनल आर्ट भी है तो मुझे लगा कि कुछ आधुनिक भी लाया जाए। इक्कीसवीं सदी को देखते हुए मैं रोबोट लेकर आई। नीतू के रेस्तरां में आज दस कर्मचारी हैं। साथ ही नीतू यह भी बताती हैं कि ऐसा नहीं है कि हमने रोबोट रखे हैं तो बाकी कर्मचारियों की हमें जरूरत नहीं है। वे कहती हैं कि रोबोट मशीन है। और मशीन को चलाने के लिए इंसान की जरूरत हमेशा पड़ती रहेगी। नीतू आगे और रोबोट लेकर आने वाली हैं। नीतू बताती हैं कि दिलचस्प बात ये है कि ये रोबोट हमने भारत में ही बनवाए हैं। एक रोबोट की कीमत लगभग पांच से छह लाख रुपए पड़ी।

पैशन कोई रोक नहीं सकता
नीतू बताती हैं कि खाना बनाना मेरा शौक है। अपने शौक को पूरा करने का समय भी मुझे भरपूर मिला। क्योंकि शुरू से मेरे बच्चे बोर्डिंग में पढ़े। तो मुझे मेरा काम शुरू करने में बहुत मदद मिली। लोगों को खाना खिलाकर मुझे बहुत खुशी मिलती थी। साथ ही लोगों को भी मेरा खाना पसंद आता था। इस वजह से मुझे लगा कि खाने का ही बिजनेस शुरू करना चाहिए। वे कहती हैं कि आज मेरे काम को एक साल हो गया है। और मुझे नहीं पता कि इतने साल कैसे कर लिया। जब बिजनेस शुरू किया था तब लगा था कि बहुत समय तक नहीं चल पाएगा, लेकिन मुझे लगता है कि अगर आप में पैशन है तो आपको कोई रोक नहीं सकता। औरतों को हमेशा से रसोई का काम सौंपा गया जिससे बहुत बार उनके लिए ये काम बहुत उबाऊ हो गया, लेकिन नीतू का कहना है कि ऐसा नहीं है कि सभी औरतों के लिए खाना बनाना उबाऊ होता होगा। मेरे लिए खाना बनाना केवल एक रसोई की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि अपने सपनों को पूरा करने का मसाला है। यही खाना आज मुझे एंटरप्रन्योर बना रहा है। चक्की की सब्जी हमारी विशेष है। ये किसी और रेस्तरां में नहीं मिलती है। लोगों के फीडबैक भी बहुत अच्छे आते हैं। हमारा रोबोट बहुत प्यार से बोलता है।

लोगों को हमारा खाना भी पसंद आता है तभी वे यहां आते हैं। मुख्य काम तो हमारा खाना है रोबोट तो बाद की बात है। अभी आगे हम और अच्छे वर्जन वाले रोबोट लाने वाले हैं। लोग अभी रोबोट को पूरी तरीके से समझ नहीं पा रहे हैं। हम तकनीक के हिसाब से बहुत आगे नहीं हैं। जैसे चीन और जापान तकनीक के हिसाब से आगे हैं वैसे हम नहीं बढ़ पा रहे हैं। लेकिन आगे के सालों में ये सब हो जाएगा। वे कहती हैं कि महिलाओं को इस काम में और आना चाहिए। पैशन और जरूरत दोनों ही चीजें किसी को सफल बनाती हैं। बिजनेस और खाना बनाना दोनों ही मेरा पैशन था।

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