CDS रावत की मौत के मामले में सामने आई कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की रिपोर्ट, जानें कौन था हादसे का जिम्मेदार

रिपोर्ट में कहा गया है कि खराब मौसम के कारण पायलट रास्ता नहीं समझ पाया और उड़ान अनियंत्रित हो गई।

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भीषण हादसे का शिकार हुआ यह हेलीकॉप्टर दो इंजन वाला MI सीरीज का था(फोटो सोर्स: ANI)।

देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की मौत के मामले में ट्राई-सर्विसेज कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने अपने प्रारंभिक निष्कर्षों में कहा है कि मौसम में अप्रत्याशित ढंग से बदलाव के कारण पायलट रास्ता भटक गया था, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। भारतीय वायुसेना की तरफ से बताया गया कि कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में हेलीकॉप्टर दुर्घटना के कारणों के रूप में मैकेनिकल फेलियर, तोड़फोड़ या लापरवाही को खारिज किया गया है।

तमिलनाडु में कुन्नूर के निकट हुए इस हादसे में जनरल बिपिन रावत और 13 अन्य की मृत्यु हो गई थी। जनरल रावत जिस हेलीकॉप्टर में सवार थे, वो दुनिया के बेहतरीन सैन्य हेलीकॉप्टर्स में से एक है। ऐसे में हैलीकॉप्टर के क्रैश होने के लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। वायुसेना ने पिछले साल आठ दिसंबर को हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जांच का आदेश दिया था।

आठ दिसंबर, 2021 को एमआई-17 वी5 दुर्घटना में ट्राई सर्विसेज कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने अपने निष्कर्ष में कहा है कि मौसम में अप्रत्याशित बदलाव के कारण हेलीकॉप्टर के बादलों में प्रवेश के कारण हादसा हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि खराब मौसम के कारण पायलट रास्ता नहीं समझ पाया और उड़ान अनियंत्रित हो गई।

सूत्रों के अनुसार ट्राई-सर्विसेज कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने कुछ दिन पहले अपने प्रारंभिक निष्कर्ष रक्षा मंत्रालय को सौंप दिए थे। जांच दल ने दुर्घटना के सबसे संभावित कारण का पता लगाने के लिए सभी उपलब्ध गवाहों से पूछताछ की। इसके अलावा फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर का भी विश्लेषण किया। अपने निष्कर्षों के आधार पर कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने कुछ सिफारिशें भी की हैं जिनकी समीक्षा की जा रही है।

तमिलनाडु के नीलगिरि के जंगलों में जनरल रावत, उनकी पत्नी और अन्य सैन्य अधिकारियों को लेकर जा रहा हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें सवार ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को छोड़कर कोई जीवित नहीं बचा था। हालांकि, बाद में ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ने भी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

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