उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद आयोजित शुद्धिकरण हवन को कथित तौर पर जातिवादी रंग देने के आरोप में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके एक दिन बाद पार्टी ने कहा कि उसके कार्यकर्ता शाम को देशभर में विरोध प्रदर्शन करेंगे।

उत्तराखंड पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर तब दर्ज की, जब उन्होंने मांग की कि खड़गे की रैली वाली जगह पर किए गए शुद्धिकरण के लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं पर मुकदमा चलाया जाए।

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे- वेणुगोपाल

कांग्रेस के महासचिव (संगठन) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “यह तो सरासर ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली बात है! इससे भी बुरी बात यह है कि बीजेपी ने इस घृणित जातिवादी व्यवहार का बचाव करते हुए पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि आज सामाजिक अन्याय के सबसे बड़े दोषी वही हैं।”

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी दलितों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ बोलने वालों पर हमला करने के लिए राज्य की पूरी ताकत लगाने को तैयार है। उन्होंने कहा, “बीजेपी ने संविधान में निहित सामाजिक न्याय के मूल्यों पर हमला किया है और कांग्रेस इस हमले का डटकर मुकाबला करेगी। हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक खड़गे जी के अपमान के असली दोषियों को सजा नहीं मिल जाती और राहुल जी के खिलाफ यह निराधार एफआईआर रद्द नहीं हो जाती।”

कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे- वेणुगोपाल

वेणुगोपाल ने आगे लिखा: “आज शाम, देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर खड़गे जी का अपमान करने वाले बीजेपी नेताओं पर मुकदमा चलाने की मांग करेंगे और सामाजिक न्याय के मूल्यों पर बीजेपी के हमले के खिलाफ हमारे संविधान की रक्षा करेंगे।”

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में क्या कहा?

राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता ने कहा कि वह वाल्मीकि समुदाय का सदस्य है और उसने अनुसूचित जाति समुदाय के अन्य सदस्यों के साथ 11 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित सफाई अभियान और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया था। उसने दावा किया कि इस कृत्य का किसी व्यक्ति या जाति से कोई संबंध नहीं है।

शिकायत के आधार पर, पुलिस ने गांधी के खिलाफ समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर किए गए कृत्यों के साथ-साथ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत किसी लोक सेवक को झूठी या तुच्छ जानकारी देने और उस लोक सेवक को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को नुकसान पहुंचाने या परेशान करने के लिए अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया।

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