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सिंघु बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन नहीं बल्कि भू-माफियाओं का आंदोलन है- डिबेट में लेखिका के बिगड़े बोल

उनका कहना था कि कुछ किसान जो वहां बैठे हैं, उन्हें बरगलाकर लाया गया है। अगर उनसे बिंदुवार बात की जाए तो सारी हकीकत का पता लग जाएगा।

farmers protestकिसान कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। (PTI)

टीवी डिबेट में लेखिका शुभ्रस्था के बोल बिगड़े तो उन्होंने कह दिया कि सिंघु बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन नहीं बल्कि भू-माफियाओं का आंदोलन है। उनका कहना था कि कुछ किसान जो वहां बैठे हैं, उन्हें बरगलाकर लाया गया है। अगर उनसे बात की जाए तो सारी हकीकत का पता लग जाएगा।

शुभ्रस्था ने कहा कि उनके ऊपर जो आरोप लगते हैं कि वो किसी पक्ष विशेष की तरफ से पेश हुई हैं, यह सरासर गलत है। उन्होंने विपक्ष के पैनलिस्ट से कहा कि जो तीन बिल पास हुए हैं, उनके नाम वो बता दें। उनका कहना था कि किसी ने डिबेट में नहीं कहा कि राकेश टिकैत बंगाल नहीं जा सकते। यह फासीवाद की भाषा दूसरा पक्ष बोल रहा है। उनका कहना था कि राकेश टिकैत पर सवाल पूछने की जिम्मेदारी भी हमें भारत का संविधान ही देता है।

एसपी की तरफ से डिबेट में मौजूद नावेद सिद्दकी ने कहा कि लेखिका बहुत अच्छी स्क्रिप्ट लेकर आई हैं। वो एक पक्ष विशेष की सराहना इस वजह से कर रही हैं क्योंकि यह उनका एजेंडा है। वो किसानों को भू-माफिया बता रही हैं। इससे उनकी सोच का पता चल जाता है। एसपी नेता ने लेखिका को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वो जिस तरह से किसानों का विरोध कर रही हैं, उससे साफ है कि पहले से तैयारी करके आई हैं।

गौरतलब है कि किसान आंदोलन में उतार-चढ़ाव खत्म नहीं हो रहा है। अब सरकार से बातचीत बंद होने से आंदोलन को लंबा होता देखकर दिल्ली की सीमाओं पर भीड़ कम होने लगी है। कुंडली बॉर्डर से किसान वापस चले गए और वहां टेंट खाली दिखाई देने लगे हैं। लंगरों में लगने वाली लाइन भी खत्म हो गई है।

हरियाणा के किसान भी पहले के मुकाबले बॉर्डर पर काफी कम पहुंच रहे हैं। कुछ किसान धरनास्थल पर सुबह को जाकर शाम को लौट आते हैं। भीड़ कम होती देखकर पंजाब के किसान नेताओं ने महापंचायत की जगह किसानों को बॉर्डर पर लेकर पहुंचने की अपील शुरू कर दी है और इसके लिए गांव-गांव अभियान भी शुरू कर दिया है।

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