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तीज-त्योहार: खास है इस बार सावन का महीना

ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार सावन का महीना कुछ विशिष्ट माना जा रहा है क्योंकि इस अवधि में काफी अंतराल के बाद 11 सर्वार्थ सिद्धि, 10 सिद्धि, 12 अमृत तथा 3 अमृत सिद्धि जैसे विशेष संयोग बन रहे हैं।

Author Published on: July 6, 2020 12:27 AM
sawan somvar, sawan somvar 2020, sawan somvar puja vidhi, sawan somvar 2020 date, sawan somvar 2020 start date,Sawan Somvar 2020 Date, Puja Vidhi, Vrat Vidhi, Vrat Katha, Samagri, Mantra: शिव पूजा के लिये सामग्री में उनकी प्रिय वस्तुएं भांग, धतूरा आदि भी रख सकते हैं।

मदन गुप्ता सपाटू
भारत में वसंत मास की तरह श्रावण मास का भी संपूर्ण जनमानस को बेसब्री से इंतजार रहता है जब चारों ओर मानसून के दौरान प्रकृति के साथ तथा मानस पटल पर भी हरियाली छाने लगती है। श्रावण कृष्ण प्रतिपदा, 5 जुलाई की प्रात: 10 बजकर 15 मिनट पर आरंभ होकर सोमवार की सुबह 9:25 तक रहेगी, इसलिए सावन का आरंभ 5 की बजाय 6 जुलाई से हो रहा है।

गुरु पूर्णिमा तथा आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन, 6 जुलाई से उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और वैधृति योग लिए, सावन के सोमवार आरंभ हो रहे हैं जो 3 अगस्त को समाप्त होंगे। चंद्र मकर राशि में तथा गुरु अपनी ही धनु राशि में होने से यह महीना और विशेष हो जाएगा। इसबार सावन के महीने का आरंभ और समापन दोनों ही भगवान शिव के प्रिय वार सोमवार से हो रहा है जिसे एक शुभ संयोग माना जाता है। शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि का क्षय होने से पूरा मास 29 दिन का है जिसमें 5 सोमवार के अलावा कई विशेष पर्व व त्योहार इसी श्रावण मास में पड़ेंगे।

ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस बार सावन का महीना कुछ विशिष्ट माना जा रहा है क्योंकि इस अवधि में काफी अंतराल के बाद 11 सर्वार्थ सिद्धि, 10 सिद्धि, 12 अमृत तथा 3 अमृत सिद्धि जैसे विशेष संयोग बन रहे हैं।

कोरोना ग्रहण
इन सुयोगों के बावजूद, मंदिरों में पहले जैसी भीड़ नहीं हो सकेगी। कांवड़ या शोभा यात्राएं नहीं हो सकेंगी। संक्रमण फैलने के डर से शिवलिंग को हाथ लगाने, जल या दूध चढ़ाने तथा लंगर लगाने की प्रथा या मान्यताएं आदि, दूरी बनाए रखने के कारण फीकी रह सकती हैं। भारत में हर महीने का एक अलग महत्व है, लेकिन सावन के महीने को भगवान शंकर से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इसका महत्व बढ़ जाता है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे खास माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस महीने में भगवान शंकर की पूजा अर्चना करने से या हर सोमवार नियमपूर्वक शिवलिंग पर जल अर्पित करने से हर मनोकामना पूरी होती है और कई लाभ मिलते हैं।

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1. भस्म : पहले सोमवार को या किसी भी सावन के सोमवार को शिव मूर्ति के साथ यदि भस्म रखते हैं तो शिव कृपा मिलेगी।
2. रुद्राक्ष: ऐसी मान्यता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी, इसलिए यदि आप इसे सावन के सोमवार को घर में लाते हैं और घर के मुखिया के कमरे में रखते हैं तो भगवान शिव ना केवल रुके हुए काम को पूरा करते हैं, बल्कि इससे आर्थिक लाभ भी होता है।

3. गंगा जल: भगवान शंकर ने गंगा मां को अपनी जटा में स्थान दिया था, इसलिए यदि आप सावन के सोमवार को गंगाजल लाकर घर के किचन में रखते हैं तो घर में सम्पन्नता बढ़ेगी और तरक्की व सफलता मिलती है।
4. चांदी या तांबे का त्रिशूूल: घर के हॉल में चांदी या तांबे का त्रिशूूल स्थापित करके आप घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा खत्म कर सकते हैं।

5. चांदी या तांबे का नाग: नाग को भगवान शिव का अभिन्न अंग माना जाता है. घर के मेन गेट के नीचे नाग-नागिन के जोड़े को दबाने से रुके हुए काम पूरे होते हैं।
6. डमरू : घर में डमरू रखने से नकारात्मक ऊर्जा का असर नहीं होता. खासतौर से यदि आप इसे बच्चों के कमरे में रखें तो ज्यादा अच्छा होगा।
7. जल से भरा तांबे का लोटा : घर के जिस हिस्से में परिवार सबसे ज्यादा रहता है, वहां एक तांबे के लोटे में जल भरकर रख दें। इससे घर के लोगों के बीच प्रेम और विश्वास बना रहेगा।
8. चांदी के नंदी : अपनी तिजारी याअलमारी में जहां आप पैसे या गहने रखते हैं, वहां चांदी के नंदी रखें. इससे आपको धन लाभ होगा और सम्पन्नता बढ़ेगी।

सावन के महीने में भक्त तीन प्रकार के व्रत रखते हैं.
1. सावन सोमवार व्रत
2. सोलह सोमवार व्रत
3. प्रदोष व्रत

श्रावण महीने में सोमवार को जो व्रत रखा जाता है, उसे सावन का सोमवार व्रत कहते हैं। वहीं सावन के पहले सोमवार से 16 सोमवार तक व्रत रखने को सोलह सोमवार व्रत कहते हैं और प्रदोष व्रत भगवान शिव और मां पार्वती का आशीर्वाद पाने के प्रदोष के दिन किया जाता है।

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