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दिल पे ले गया है किसान, बिल वापसी से कम पर बात ना बनेगी- चर्चा से पहले बोले राकेश टिकैत

सोमवार को होने वाली चर्चा से पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि किसानों ने यह कानून दिल पर ले लिया है और अब बिल वापसी से कम पर बात नहीं बनेगी।

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केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों के खिलाफ दिल्ली से सटी सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन 38वें दिन भी जारी है। किसान नेता और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की हो चुकी है लेकिन अबतक कोई समाधान नहीं निकला है। इसी बीच सोमवार को होने वाली चर्चा से पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि किसानों ने यह कानून दिल पर ले लिया है और अब बिल वापसी से कम पर बात नहीं बनेगी।

राकेश टिकैत का यह बयान किसानों और सरकार के बीच होने वाली आठवें दौर की बातचीत से ठीक पहले कही है। टिकैत ने कहा कि उम्मीद है कि सरकार बात मान ले, अगर मांगें पूरी नहीं होती तो आंदोलन चलेगा। टिकैत ने कहा कि मीटिंग का एजेंडा रहेगा स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट, तीन कृषि क़ानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर क़ानून बने। हम वापस नहीं जाएंगे। अब तक 60 किसान शहीद हो चुके हैं। सरकार को जवाब देना होगा।

वहीं, किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के सुखविंदर सिंह सभरा ने कहा “अगर आज तीनों कानूनों को निरस्त करने की बात नहीं बनती और MSP गारंटी का कानून नहीं आता तो हमारे अगले कार्यक्रम पहले से ही तैयार हैं। 6 जनवरी को ट्रैक्टरों पर मार्च किया जाएगा, 7 जनवरी को देश को जगाने की कवायद शुरू होगी।”

कृषि कानूनों के खिलाफ बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में भी किसानों का प्रदर्शन जारी है। फरीदकोट के ज़िला प्रधान बिंदर सिंह गोले वाला ने बताया, “आज की बैठक में तीन कानूनों को रद्द करने की बात चलेगी। उम्मीद है कि बैठक में कुछ हल निकलेगा, अगर नहीं निकला तो हमारा संघर्ष चलता रहेगा।”

कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बॉर्डर पर सुरक्षा बल तैनात है। गाज़ीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन में बौध भिक्षुओं ने हिस्सा लिया। एक बौध भिक्षु ने बताया, “हम लखनऊ से आए हैं। किसान सड़क पर है इसलिए हम मठों को छोड़ किसानों के साथ आए हैं।जब तक कानून वापस नहीं होंगे हम नहीं जाएंगे।”

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