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सुप्रीम कोर्ट की जज का परिवार भी हुआ था न्याय में देरी का शिकार

न्यायमूर्ति भानुमति ने अपने न्यायिक करिअर की शुरुआत 1988 में तमिलनाडु में जिला जज के रूप में की थी। अप्रैल 2003 में वे मद्रास हाईकोर्ट की जज नियुक्त हुई। उसके बाद 2013 में झारखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनीं। यहीं से अगस्त 2014 में वे सुप्रीम कोर्ट आई। उनके चर्चित निर्णयों में दिल्ली का निर्भया बलात्कार हत्या मामला भी शामिल है।

Author नई दिल्ली | July 19, 2020 5:45 AM
सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश आर भानुमति। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट की जज न्यायमूर्ति आर भानुमति ने भी स्वीकार किया है कि न्याय मिलने में देरी भारत में लोगों की बड़ी समस्या है। इस समय देश की सबसे बड़ी अदालत में पहली बार एक साथ नियुक्त तीन महिला न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति भानुमति ने बताया कि अतीत में उनका परिवार भी मुआवजे के मामले में न्याय में देरी का शिकार रहा है। न्यायमूर्ति भानुमति ने अपने विदाई समारोह में शुक्रवार शाम यह कहा। वे रविवार को रिटायर हो जाएंगी।

न्यायमूर्ति भानुमति ने मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए सरकार और न्यायपालिका के किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा-आज तो हर कोई मुकदमे बरसों से लंबित होने और उनका ढेर होने की बात करता है। पर मैं एक सकारात्मक पहलू की चर्चा करना चाहूंगी कि सरकार और न्यायपालिका दोनों ने इस समस्या से निपटने के लिए कई पहल की है।

उन्होंने अपने परिवारजनों, सहयोगियों, मातहतों और वकीलों सभी का सेवा के दौरान सहयोग मिलने पर आभार जताया साथ ही मीडिया की भी यह कह कर सराहना की कि सुप्रीम कोर्ट के कवरेज में उसने अनुशासन का परिचय दिया है। परंपरा के अनुसार अपने आखिरी कार्य दिवस पर वे मुख्य न्यायाधीश के पीठ में शामिल रही। इस अवसर पर अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल बोले कि देश की सबसे बड़ी अदालत अब एक अच्छी जज से वंचित हो जाएगी।

न्यायमूर्ति भानुमति ने अपने न्यायिक करिअर की शुरुआत 1988 में तमिलनाडु में जिला जज के रूप में की थी। अप्रैल 2003 में वे मद्रास हाईकोर्ट की जज नियुक्त हुई। उसके बाद 2013 में झारखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनीं। यहीं से अगस्त 2014 में वे सुप्रीम कोर्ट आई। उनके चर्चित निर्णयों में दिल्ली का निर्भया बलात्कार हत्या मामला भी शामिल है। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में दो महिला जज न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा बची हैं।

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