चुनाव आयोग अब बाकी बचे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू करने की तैयारी कर रहा है। पिछले एक साल में आयोग ने 10 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी कर ली है।

द इंडियन एक्सप्रेस को चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया, “एसआईआर के अगले चरण चरण की घोषणा आने वाले कुछ दिनों में हो सकती है।”

असम छोड़कर शुरू होगी प्रक्रिया

शेष प्रक्रिया असम छोड़कर बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगी। चुनाव आयोग ने असम को इससे अलग इसलिए किया है कि यहां नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) के पब्लिश में देरी हो रही है।

इन राज्यों में मतदाताओं को जो फॉर्म भरना होगा, वह शायद एसआईआर के दूसरे चरण में इस्तेमाल किए गए फॉर्म जैसा ही होगा। एसआईआर का पहला चरण बिहार में हुआ था, इसके बाद फॉर्म में बदलाव किया गया और दूसरे चरण में इस्तेमाल किया गया, जो नवंबर 2025 से अप्रैल तक नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में भरवाया गया। जानकारी के मुताबिक, मतदाताओं की गिनती अलग-अलग चरणों में हो सकती है।

फरवरी में लिखा था मुख्य चुनाव अधिकारियों को पत्र

चुनाव आयोग ने फरवरी में 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को पत्र लिखकर एसआईआर की तैयारियां पूरी करने को कहा था, क्योंकि यह प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू होने की उम्मीद थी। अब पता चला है कि आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव के बाद अगला चरण शुरू करने का फैसला लिया है।

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को देश की मतदाता सूचियों के एसआईआर का आदेश दिया था। एसआईआर से पहले आयोग दो दशकों से चली आ रही प्रथा के मुताबिक मतदाता सूचियों को हर साल और चुनावों से पहले विशेष सारांश संशोधन (एसआईआर) के जरिए संशोधित करता था। मतदाताओं के पंजीकरण नियम 1960 के मुताबिक, आयोग मतदाता सूचियों को या तो गहन रूप से या सारांश रूप से, या फिर कुछ हद तक गहन और कुछ हद तक सारांश रूप से संशोधित कर सकता है।

इससे पहले सारांश संशोधन प्रक्रिया होती थी

गहन संशोधन में मतदाता सूचियों को नए सिरे से तैयार किया जाता है, जबकि सारांश संशोधन में मृत या फिर कहीं और बस गए लोगों के नाम का हटाकर सूचियों को अपडेट किया जाता है और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं।

पिछला गहन संशोधन 2000 के दशक की शुरुआत में सभी राज्यों में किया गया था। तब से मतदाता सूचियों के डिजिटलीकरण के साथ सूचियों का संशोधन सारांश रूप से ही किया जाता रहा है। इसके बाद बीते वर्ष आयोग की ओर से एसआईआर करने के फैसला लिया गया।

चुनाव आयोग ने गहन संशोधन करने के कारणों के तौर पर तेजी से हो रहे शहरीकरण और प्रवासन का जिक्र किया था। एसआईआर प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर सभी पंजीकृत मतदाताओं को गणना फॉर्म जमा करना होता है और ऐसे दस्तावेज देने होते हैं जिनसे यह साबित हो सके कि वे या उनके माता-पिता गहन संशोधन की मतदाता सूची में शामिल थे, या फिर उन्हें नागरिकता संबंधी दस्तावेजों समेत अपनी पात्रता के दस्तावेज देने होते हैं।

अब तक हट चुके हैं 5 करोड़ से अधिक नाम

अब तक एसआईआर के कारण बिहार, राजस्थान गोवा, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, गुजरात, छत्तीसगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, केरल, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु,पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में 5.58 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।

चुनाव आयोग के 24 जून के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग के पास नागरिकता की जांच करने का अधिकार नहीं है। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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