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इंजन के अंदर ही चालक को मिलेगा ट्रेन रोकने-चलाने का सिग्नल

यह सिस्टम दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर तैयार किया गया है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष वीके यादव ने कहा कि रेल सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए इस योजना पर काम किया जा रहा है।

Cancelled Trains List: तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है

पंकज रोहिला

रेलवे में अब चालक को लोको केबिन में (इंजन के अंदर) ही ट्रेन के रूकने व चलने का सिग्नल मिल सकेगा। मंत्रालय ने रेलवे के बेहतर संचालन व हादसों में कमी लाने के लिए यह तकनीक तैयार की है। इसके लिए रेलवे ने पॉयलट प्रोजेक्ट भी शुरू कर दिया है। यह सिस्टम दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर तैयार किया गया है। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष वीके यादव ने कहा कि रेल सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए इस योजना पर काम किया जा रहा है। पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत रेलवे 150-150 किलोमीटर के प्रमुख कॉरिडोर चिह्नित किए हैं। इन मार्गो पर स्क्रीन व सिस्टम स्थापित करने का काम किया जा रहा है। प्रोजेक्ट पर करीब 650 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

मंत्रालय के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत चालक के लिए इंजन के अंदर ही एक स्क्रीन उपलब्ध होगी। ट्रेन का चालक इस स्क्रीन पर सभी संदेश व सिग्नल देख सकेगा। यह सिग्नल करीब एक से डेढ़ किलोमीटर पहले ही चालक को मिल जाएगी। इससे कोहरे के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं में भी कमी लाई जा सकेगी।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत झांसी- बीना, येर्रगुंटला-रेणिगुंटा, विजयनगरम-बांद्रा के बीच काम किया जा रहा है। प्रोजेक्ट सफल होने के बाद 65000 किलोमीटर के नेटवर्क को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा। कै ब सिग्नल प्रोजेक्ट को इसरो व आइआइटी की मदद से विकसित किया गया है जो उपग्रह की मदद से गाड़ी को ट्रेक करेगा। फिलहाल रेलवे के पास केवल गतिमान में ही ऐसा सिस्टम प्रयोग किया जाता है। अब मंत्रालय इससे भी अत्याधुनिक तकनीक को लाने की तैयारी कर रहा है।

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