ताज़ा खबर
 

राजा मानसिंह हत्याकांड: पूर्व पुलिस उपाधीक्षक सहित 11 दोषी करार

भरतपुर रियासत के महाराज किशन सिंह के घर राजा मान सिंह का जन्म पांच दिसंबर, 1921 को हुआ था। उन्होंने साल 1928 से 1942 तक इंग्लैंड में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उनकी तीन बेटियां हैं। दीपा उर्फ कृष्णेंद्र कौर उनकी सबसे बड़ी बेटी हैं।

वृंदावन | Updated: July 22, 2020 7:20 AM
मीडिया से बात करती हुईं राजा मान सिंह की बड़ी बेटी दीपा कुमारी। साथ हैं मुकदमे की पैरवी कर रहे अधिवक्ता नारायण सिंह विप्लवी।

राजस्थान के भरतपुर जनपद के चर्चित राजा मानसिंह हत्याकांड में मंगलवार मथुरा की जिला अदालत ने आरोपी पुलिसकर्मियों में से तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक सहित 11 आरोपियों को दोषी करार दिया और तीन को बरी कर दिया है। दोषी पाए गए सभी पुलिसकर्मियों की जमानत रद्द कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।

इस मामले में बुधवार को सजा सुनाई जा सकती है। राजा मानसिंह हत्याकांड के 14 में से 11 आरोपियों को जिला अदालत ने दोषी ठहराया है। अधिकतर अभियुक्तों की उम्र लगभग 80 वर्ष के पार पहुंच गई है। लंबे समय तक चले इस मुकदमे में कुल 1700 तारीखें पड़ीं और आठ बार अंतिम बहस हो चुकी है। सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में पुलिस की जबरदस्त सुरक्षा व्यवस्था रही।

आम लागों का प्रवेश परिसर में रोक दिया गया। इस मामले में 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। एक आरोपी पहले ही बरी हो चुका है जबकि तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। अधिवक्ता नारायण सिंह ने बताया कि पूरे मामले में 61 गवाह अभियोजन पक्ष की ओर से और 17 गवाह बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए। इनमें से बहुत से गवाह चश्मदीद भी थे। बुधवार को मथुरा की जिला जज साधना रानी दोषियों को मिलने वाली सजा का एलान करेंगी।

करीब 35 साल पुराने इस मुकदमे की सुनवाई के लिए राजा मानसिंह की बेटी दीपा सिंह, उनके पति विजय सिंह आदि परिजन सुबह ही अदालत पहुंच गए थे। राजा मानसिंह की बेटी दीपा कौर ने अदालत के फैसले पर खुशी जताई है। 21 फरवरी, 1985 को पुलिस मुठभेड़ में राजा मानसिंह की उस वक्त मौत हो गई थी, जब वह चुनाव प्रचार के दौरान डीग अनाज मंडी में मौजूद थे।

मुख्य आरोपी डीएसपी कान सिंह भाटी समेत 14 पुलिसकर्मी इस फर्जी मुठभेड़ के आरोपी थे। इस घटना से एक दिन पहले यानी 20 फरवरी, 1985 को राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने राजा मान सिंह पर अपनी जोगा गाड़ी से हेलिकॉप्टर और मंच तोड़ने का आरोप लगाया था। इसे लेकर राजा मानसिंह के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। घटना के वक्त राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी। पुलिस का कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई जबकि परिजनों ने फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाया था।

क्या हुआ था 35 साल पहले
घटना से एक दिन पहले यानी 20 फरवरी 1985 को राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर डीग में राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए जनसभा करने आए थे। राजा मान सिंह डीग विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे। उनके सामने कांग्रेस के प्रत्याशी ब्रजेंद्र सिंह उन्हें चुनौती दे रहे थे। आरोप है कि कांग्रेस समर्थकों ने राजा मान सिंह के डीग स्थित किले पर लगा उनका झंडा उतारकर कांग्रेस का झंडा लगा दिया था। यह बात राजा मान सिंह को नागवार गुजरी। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार इसके बाद राजा ने सभा मंच को जोगा जीप की टक्कर से तोड़ दिया। इसके बाद माथुर के हेलीकॉप्टर को भी जोगा से टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

अगले दिन 21 फरवरी को दोपहर में राजा मान सिंह और डीग के तत्कालीन डिप्टी एसपी कान सिंह भाटी का अनाज मंडी में आमना-सामना हो गया। यहां हुई फायरिंग में राजा मान सिंह, उनके साथी सुमेर सिंह और हरी सिंह की मौत हो गई। जिस वक्त राजा की मौत हुई, उनकी उम्र 64 वर्ष थी। घटना की रिपोर्ट राजा मान सिंह के दामाद विजय सिंह ने कान सिंह भाटी और एसएचओ वीरेंद्र सिंह सहित अन्य के खिलाफ हत्या की धाराओं में दर्ज कराई थी, जबकि पुलिस ने इसे मुठभेड़ करार दिया था।

एसएचओ वीरेंद्र सिंह ने राजा मान सिंह, विजय सिंह, सुमेर सिंह, हरी सिंह सहित उनके कई समर्थकों के खिलाफ डीग थाने में रिपोर्ट लिखाई थी। अगले दिन यानी 22 फरवरी, 1985 को राजा की अंत्येष्टि में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। राजा मान सिंह के अंतिम संस्कार के वक्त भारी आगजनी व तोडफोड़ हुई। इसमें भी पुलिस फायरिंग के दौरान तीन लोगों की मौत हुई थी।

वादी ने सुप्रीम कोर्ट की शरण लेकर मुकदमे को राजस्थान से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की। एक जनवरी,1990 को सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमा जिला एवं सत्र न्यायाधीश मथुरा स्थानांतरित कर दिया। इस मामले की पिछली सुनवाई मथुरा में जिला एवं सत्र न्यायाधीश साधना रानी ठाकुर की अदालत में 9 जुलाई को हुई थी। तब 21 जुलाई फैसले पर सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई थी।

कौन थे राजा मान सिंह
भरतपुर रियासत के महाराज किशन सिंह के घर राजा मान सिंह का जन्म पांच दिसंबर, 1921 को हुआ था। उन्होंने साल 1928 से 1942 तक इंग्लैंड में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उनकी तीन बेटियां हैं। दीपा उर्फ कृष्णेंद्र कौर उनकी सबसे बड़ी बेटी हैं। साल 1946 से 1947 तक वह भरतपुर रियासत के मंत्री रहे। 1947 में उन्होंने रियासत का झंडा उतारने का विरोध किया। साल 1952 में उन्होंने विधानसभा का पहला निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता। इसके बाद वह लगातार सात बार निर्दलीय विधायक चुने गए।

Next Stories
1 बिहार: भागलपुर की विशेष केंद्रीय जेल में कैदियों में घबराहट, चार बंदियों की मौत के बाद जांच में पॉजिटिव मिले हैं नमूने
2 22 जुलाई का इतिहास: आज ही के दिन 2019 में चंद्रयान-2 को श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से किया गया था रवाना
3 श्रद्धांजलि: नई सियासी पीढ़ी के लिए सबक हैं लालजी टंडन
ये पढ़ा क्या?
X