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जनसत्ता विशेष: सूने पड़े हैं चारों धाम के मंदिरों के दर

चार धाम के बूते चलने वाला करोड़ों रुपए का व्यवसाय बिल्कुल ठप पड़ गया है। चार धाम के भरोसे पूरे साल की रोटी का जुगाड़ करने वाले ट्रेवल, होटल, स्थानीय दुकानदार, फूल बेचने वाले, पालकी और खच्चर के माध्यम से रोजी-रोटी कमाने वाले भूखमरी के कगार पर हैं।

केदारनाथ धाम का कपाट खुलने के समय लाखों लोग मौजूद रहते थे, लेकिन इस बार कुछ ही लोग मौजूद रहे।

कोरोना संकट का पूरा असर उत्तराखंड के चारों धाम की यात्रा पर साफ दिखाई दे रहा है। चार धामों में से तीन गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट पूर्व निर्धारित तिथियों के अनुसार खोल दिए गए हैं जबकि बदरीनाथ के कपाट 30 अप्रैल की बजाय अब 15 मई को खोले जाएंगे। टिहरी राजघराने ने मंदिर के कपाट खोलने की तिथि को आगे बढ़ा दिया है।

केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार उचित दूरी बनाकर खोले गए कपाट के मौके पर पंडे-पुजारियों की तादाद भी बिल्कुल सीमित थी और सब ने मास्क बांध रखे थे। कपाट खुलने के समय की रौनक गायब है। इन मंदिरों के परिसर सूने पड़े हैं। मंदिर के कपाट खुलने के समय लाखों यात्री पहले ही दिन इन चारों धामों में पहुंच जाते थे जिस कारण ट्रेवल वालों, खच्चर वालों , स्थानीय दुकानदारों ,धमर्शाला ,होटल वालों ,फूल बेचने वालों का व्यवसाय जोर पकड़ता था परंतु अब हरिद्वार से लेकर उत्तरकाशी, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ ,रुद्रप्रयाग ,देवप्रयाग ,चमोली, जोशीमठ सब सूने पड़े हैं।

इस क्षेत्र में चार धाम के बूते चलने वाला करोड़ों रुपए का व्यवसाय बिल्कुल ठप पड़ गया है। चार धाम के भरोसे पूरे साल की रोटी का जुगाड़ करने वाले ट्रेवल, होटल, स्थानीय दुकानदार, फूल बेचने वाले, पालकी और खच्चर के माध्यम से रोजी-रोटी कमाने वाले भूखमरी के कगार पर हैं। फूलों का व्यवसाय करने वाले बाबू का कहना है कि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के समय ढाई सौ करोड़ रुपए का व्यवसाय हर साल होता था पूर्णबंदी के कारण यह व्यवसाय दम तोड़ गया है फूलों की खेती करने वाले किसानों से लेकर फूल बेचने वाले रोजी रोटी के लिए तरस रहे हैं।

देहरादून के ए वन ट्रैवल्स के मालिक अमरजीत सिंह का कहना है कि हरिद्वार, देहरादून ऋषिकेश, टिहरी ,उत्तरकाशी, देवप्रयाग ,जोशीमठ और रुद्रप्रयाग में 15 से 20 हजार टैक्सी चालक चार धाम यात्रा के व्यवसाय पर निर्भर रहते हैं। कोरोना संकट के कारण उनकी रोजी-रोटी पर विपरीत असर पड़ा है और ट्रेवल्स का धंधा बिल्कुल चौपट हो गया है

उत्तराखंड के पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर का कहना है कि 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद पिछले साल उत्तराखंड में रेकॉर्ड तोड़ तादाद में तीथर्यात्री आए थे और राज्य का पर्यटन व्यवसाय बहुत बढ़ गया था जिससे व्यवसायियों को यह उम्मीद जगी थी कि अब हर साल उत्तराखंड में पर्यटकों की तादाद बढ़ेगी परंतु इस बार कोरोना संकट ने राज्य के पर्यटन व्यवसाय को चौपट कर दिया।

पिछले साल उत्तराखंड में चार धाम यात्रा सीजन के समय 6 महीने में 33 लाख 27 हजार 210 तीर्थयात्री आए थे जिनमें गंगोत्री में 5 लाख 23 हजार 937, यमुनोत्री में 4 लाख 61 हजार 603, केदारनाथ में 9 लाख 74 हजार 297 तथा बद्रीनाथ में 11 लाख 27 हजार 240 एवं हेमकुंड साहिब में 2 लाख 40 हजार 133 तीर्थयात्री आए थे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि गंगोत्री यमुनोत्री केदारनाथ धाम के कपाट तय तिथि में खोलने कि राज्य सरकार ने पूर्ण व्यवस्था ही हुई थी। उसी के अनुसार वैदिक विधि विधान से तीनों धामों के कपाट खोले गए हैं।

टिहरी राजघराने के फैसले के अनुसार 15 मई को बदरीनाथ के कपाट खोले जाएंगे। उसकी भी तैयारियां राज्य सरकार ने पूरी कर रखी है। बाबा केदारनाथ की कृपा से जल्द देश और दुनिया कोरोना का संकट से निजात पा लेगी और फिर से एक बार चार धाम यात्रा को गति मिलेगी।

कोरोना से बचाव के मद्देनजर ही तीर्थयात्रियों तीर्थ को उत्तराखंड के चार धाम की यात्राओं की अनुमति नहीं है। अभी केवल कपाट खोले जा रहे हैं ताकि धामों में पूजा अर्चना शुरू हो सके।

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