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अक्षय ऊर्जा के 70 फीसद लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाई केंद्र सरकार

अभी तक केवल 20 फीसद सौर पार्क को पूर्णत विकसित किया गया है।

अक्षय ऊर्जा के 70 फीसद लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाई केंद्र सरकार

देश में अक्षय ऊर्जा की योजनाओं को लागू करने का लक्ष्य केंद्र सरकार पूरा नहीं कर पाई है। ऐसी 70 फीसद योजनाएं हैं। केंद्र सरकार की एक रपट में अक्षय ऊर्जा के उत्पादन की स्थिति पर रोशनी डाली गई है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक 50 से अधिक सौर पार्क और अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा परियोजनाओं के द्वारा 40 गीगावाट की सौर ऊर्जा का लक्ष्य तय किया था। हाल ही में संसद में ऊर्जा संबंधी मामलों की स्थायी समिति ने यह रिपोर्ट पेश की है।

रिपोर्ट के मुताबिक 17 राज्यों में 22879 मेगावाट क्षमता के 39 सौर ऊर्जा पार्क को स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इन स्वीकृत सौर पार्क में से आठ पार्क का आधारभूत ढांचा पूर्ण रूप से विकसित किया गया है। इनमें केवल 6580 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता है। इसके अतिरिक्त चार सौर पार्क को आंशिक रूप से विकसित किया गया है। इनकी क्षमता 1365 मेगावाट बताई गई है। इसी प्रकार 17121 मेगावाट क्षमता के 11 पार्क को अभी तक मंत्रालय ने स्वीकृति प्रदान नहीं की है। जबकि ये सभी पार्क 2022 तक ही विकसित हो जाने थे।

अभी तक केवल 20 फीसद सौर पार्क को पूर्णत विकसित किया गया है और 10 फीसद आंशिकतौर पर विकसित हैं। इस प्रकार अब तक 70 फीसद का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सका है। रिपोर्ट में समिति ने बताया है कि देश में 50 में से 11 सौर पार्क को तीन साल के अधिक समय बीत जाने के बाद भी मंत्रालय का अनुमोदन नहीं मिल पाया है। मंत्रालय स्तर पर अनुमोदन प्राप्त होने में इतना लम्बा समय लगने के कारण लक्ष्य निर्धारित करने की पूरी कवायद अर्थहीन हो गई है। इस प्रगति पर स्थायी समिति ने निशाना जाहिर की है क्योंकि मंत्रालय पांच साल (2015 से 20) तक केवल आठ ही सौर पार्क विकसित कर पाया है।

मंत्रालय के मुताबिक दिसंबर 2021 में कुल 33.80 गीगावाट क्षमता के पचास पार्क को मंजूरी दी गई थी। अब तक जो आठ पार्क विकसित किए गए हैं, उनकी क्षमता 6580 मेगावाट है। इसके अतिरिक्त छह पार्क जो कि 2615 मेगावाट क्षमता है उनको को आंशिक तौर पर ही पूरा किया गया है। समिति ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि मंत्रालय ने 2020 के बाद पूरी तरह से विकसित सौर पार्क की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त मंत्रालय ने 11 सौर पार्क संबंधित योजनाओं को लेकर विलंब के कारण भी नहीं बताए हैं। इस देरी पर भी स्थायी समिति ने संबंधित मंत्रालय से जवाब मांगा है।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि विभिन्न पीयूसी और राज्य सरकार के पास उपलब्ध अधिशेष भूमि के उपयोग और सभी विमान पतनों को कोची विमान पतन की भांति सौर परियोजना को स्थापित करने के लिए समिति की सिफारिश पर भी संबंधित मंत्रालय ने कोई पहल नहीं की। इसलिए स्थायी समिति ने मंत्रालय को विशेष तौर पर 11 सौर पार्क को मंजूरी प्रदान करने में 6.20 गीगावाट की कमी का कारण प्रस्तुत करे। संसद की इस ऊर्जा संबंधित स्थायी समिति के अध्यक्ष राजवी रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह है और इस समिति के कुल 21 सदस्य शामिल हैं।

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