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केंद्र और कुछ नहीं दे सकता, विचार करना है तो कर लो…ये कह उठ कर चले गए कृषि मंत्री- 11वें दौर की बैठक के बाद बोले किसान नेता

किसान नेताओं का कहना है कि बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर आए और चंद मिनटों बाद यह कहकर चले गए कि केंद्र और कुछ नहीं दे सकता, विचार करना है तो कर लो।

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किसानों के साथ 11वें राउंड की बातचीत बेहद निराश करने वाली रही। किसान नेताओं का कहना है कि बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर आए और चंद मिनटों बाद यह कहकर चले गए कि केंद्र और कुछ नहीं दे सकता, विचार करना है तो कर लो।

किसान नेताओं का कहना है कि उन्हें तीनों कृषि कानूनों की वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। उनका कहना है कि किसान पूरी तैय़ारी के साथ दिल्ली पहुंचे हैं। जब तक कानून वापस नहीं होते वो यहां से टस से मस नहीं होंगे। उधर, कृषि मंत्री का कहना है कि सारे किसान अड़ियल नहीं हैं। कुछ किसान नेता अपने निहित स्वार्थों के चलते यह कोशिश कर रहे हैं कि किसान व सरकार के बीच की बातचीत किसी नतीजे पर न पहुंच सके।

किसान नेताओं से पूछा गया कि क्या वे सरकार से आगे बात करेंगे तो उनका कहना था कि सरकार अगर बातचीत के लिए बुलाती है तो वे आगे बढ़कर स्वागत करेंगे। उका कहना था कि कृषि मंत्री ने बैठक में कहा कि जो प्रस्ताव आपको दिया गया है, उस पर क्या कहना है। फिर मंत्री चले गए। इसके बाद लंच ब्रेक हो गया। मंत्री एक बार फिर से पांच मिनट के लिए मीटिंग में आए, लेकिन कुल मिलाकर आज की बैठक बेनतीजा ही रही।

किसानों और सरकार के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ। पहले किसान पंजाब में अपना विरोध जता रहे थे, लेकिन उसके बाद वे दिल्ली बार्डर पर आकर जमकर बैठ गए। 14 अक्टूबर को किसानों व सरकार के बीच पहली बार बातचीत हुई। उसके बाद से 11 दौर की बातचीत हो चुकी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन करके विवाद का हल निकालने का रास्ता सुझाया था। हालांकि कमेटी के एक सदस्य ने खुद को अलग कर लिया।

 

 

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