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झारखंड में जादूगरों के सहारे मजमा जुटाने में लगी भाजपा

हाथ में डमरू लिए जमील खान पलामू जिले के कोडरमा गांव से गुजरते हुए गला फाड़कर चिल्लाता है, होए! यह देखो जादू! बंगाल का कालू जादू! उसकी आवाज पुरअसर साबित होती है। अपने आप गांव वाले उसके चारों ओर इकट्ठा होने लगते हैं। इनमें एक आटोरिक्शा से उतरकर आए तीन लोग भी शामिल हैं। जमील […]

Author November 20, 2014 8:59 AM
28 वर्षीय संजय खान अपना जादू दिखाने और भाजपा का प्रचार करने के रंग में (फोटो: जनसत्ता)

हाथ में डमरू लिए जमील खान पलामू जिले के कोडरमा गांव से गुजरते हुए गला फाड़कर चिल्लाता है, होए! यह देखो जादू! बंगाल का कालू जादू!

उसकी आवाज पुरअसर साबित होती है। अपने आप गांव वाले उसके चारों ओर इकट्ठा होने लगते हैं। इनमें एक आटोरिक्शा से उतरकर आए तीन लोग भी शामिल हैं। जमील का साथी संजय खान गांव वालों को संबोधित करता है: जादू का खेल है! मजमे में शामिल कोई व्यक्ति ताना मारता है: प्रचार तो नहीं है न?

थोड़ा हिचकने के बाद 28 वर्षीय संजय खान अपना जादू दिखाने और भाजपा का प्रचार करने के रंग में आ जाता है। वह जमील का लाल रंग का लबादा लेकर जादू दिखाने के लिए तैयार हो जाता है। असल में यह जादू भारतीय जनता पार्टी के नारे ‘मोदी मैजिक’ की तर्ज पर ही है। जनता के बीच जादू के प्रभाव को देखते हुए ही संभवतया भाजपा ने चुनावी चमत्कार के लिए इन जादूगरो की सेवा ले रखी है। झारखंड में पहले चरण के चुनाव के लिए भाजपा ने प्रचार के लिए जादूगरों की छह टोलियों को भाड़े में ले रखा है। हर टीम में एक जादूगर और उसका एक जमूरा या सहायक है।

लेकिन विश्रामपुर में खराब चुनावी तैयारी के चलते भाजपा ने दो दिन के लिए जादूगरों की दो टोलियों की सेवा ले रखी है। ये भाजपा उम्मीदवार के साथ चलते हुए अपने जादू का रंग दिखाते हैं और वोटरों पर डोरे डालते हैं। ग्रामीण पहले ही समझ जाते हैं कि यह जादू कम है, भाजपा के प्रचार का हिस्सा ज्यादा है।

बिश्रामपुर गांव में संजय अपनी टोली की अगुवाई करता है। वह और उसके साथी भोपाल के रहने वाले हैं। वह सबसे पहले जलते हुए कागज से 20 रुपए का नोट बनाकर दिखता है और गांव के एक युवक को मजमे से बुलाकार करतब में शामिल होने के लिए कहता है। वह मजाहिया लहजे में कहता है, मैं उसे बुद्धू बनाना चाहता हूं। संजय के करतब को देखने के लिए वहां से गुजर रहे साइकिलवाले, दोपहियाचालक रुककर तमाशा देखने लगते हैं।

जादूगर एक छड़ी घुमाते हुए भीड़ से संवाद करता है। कुछ पुरानी जादुई तरकीबों को दोहराता है। कुछ इनमें बदलाव भी किए हैं। जादू से एक नौजवान के खाली थैले से प्लास्टिक की गेंदें निकालकर दिखाई जाती हैं। एक के कान से लगी एक नली से पानी की बूंदे निकलती दिखती हैं। इस जादू पर लोग जमकर तालिया बजती हैं। पर कहना होगा कि झारखंड में प्रचलित जादू-टोने से यह अलग मंचीय जादूगरी है।

झारखंड में फिलहाल भाजपा के लिए प्रचार करने वाले ये जादूगर मध्यप्रदेश के हैं या महाराष्ट्र के। भाजपा ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए इन्हें भाड़े पर लिया। संजय कहता है कि उसने विदिशा में सुषमा स्वराज मैडम के लिए काम किया था। मैं महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए नहीं जा सका। लेकिन जो लोग गए , उन्होंने चालीस गांवों में काम किया। खैर, बाद में जब यह टीम रकसाना गांव में पहुंची, महिलाओं से उनका टकराव हुआ। इन महिलाओं ने कहा कि वे जादू नहीं देखना चाहतीं। संजय ने कहा कि यह कोई नई बात बात नहीं है। छत्तीसगढ़ में भी कई जगह लोग हमसे कहते थे कि जादू मत दिखाओ।

संजय ने बताया कि उसने छत्तीसगढ़, गुजरात, और मध्य प्रदेश में, जहां भाजपा की सरकारें हैं काम किया है। ज्यादातर यह काम जागरूकता प्रचार को लेकर है। वह कहता है कि जब मुझसे काम करने को कहा जाता है तो मैं विषय को समझकर उसी के अनुरूप कार्यक्रम, ट्रिक तैयार करता हूं।

बहरहाल संजय के जादू के दौरान भाजपा का कमल किसी न किसी न किसी रूप में दिखता रहता है। ताश के पत्तों में भाजपा का कमल दिखाकर भी वह करतब दिखाता है और जनता से कहता है कि आपको इसी तरह होना चाहिए। अपने सभी वोट भाजपा को दीजिए।

 

 

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