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दिल्ली में पार्टी हाईकमान 25 फरवरी को तय करेगा नेता प्रतिपक्ष का नाम

भारतीय जनता पार्टी की रामनगर बैठक में विधानसभा नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं हो पाया। भाजपा विधायकों के बागी रुख को देखते हुए पार्टी हाईकमान का दूत बिना किसी फैसले के दिल्ली चले गए।
Author देहरादून | February 18, 2016 03:57 am

भारतीय जनता पार्टी की रामनगर बैठक में विधानसभा नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं हो पाया। भाजपा विधायकों के बागी रुख को देखते हुए पार्टी हाईकमान का दूत बिना किसी फैसले के दिल्ली चले गए। अब पार्टी हाईकमान 25 फरवरी को दिल्ली में उत्तराखंड के भाजपा विधायकों के साथ बैठक करने के बाद नेता प्रतिपक्ष की घोषणा करेगा।

भाजपा में रामनगर बैठक में नेता प्रतिपक्ष के नाम की घोषणा करने का हल्ला था। भाजपा के राष्ट्रीय सहमहामंत्री शिवप्रकाश और केंद्रीय प्रभारी श्याम जाजू इस बैठक में मौजूद थे। भाजपा के कई विधायकों ने पार्टी हाईकमान के जरिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का नाम ऊपर से थोपने का कड़ा विरोध किया। हरिद्वार जिले के तीन विधायक स्वामी यतीश्वरानंद, आदेश चौहान और संजय गुप्ता ने तो साफ कहा कि यदि हरिद्वार विधानसभा क्षेत्र के विधायक मदन कौशिक को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया तो वे बगावत कर देंगे।

यही राय मदन कौशिक के बारे में भुवन चंद खंडूडी और रमेश पोखरियाल निशंक के समर्थकों ने दी। कौशिक विरोधियों का कहना है कि अजय भट्ट नेता प्रतिपक्ष से पार्टी के अध्यक्ष बना दिए गए हैं। वे ब्राह्मण हैं और भगत सिंह कोश्यारी के गुट के हैं। ऐसे में पार्टी के दोनों अहम पदों पर कोश्यारी गुट व एक ही ब्राह्मण जाति के विधायकों को बैठाकर पार्टी को चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। रामनगर की बैठक में नेता प्रतिपक्ष का मुद्दा छाया रहा और पार्टी इस बिंदु पर किसी भी नतीजे में नहीं पहुंची।

राज्य के भाजपा नेता इस समय तीन खेमों भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूडी और रमेश पोखरियाल निशंक के खेमों में बंटे हुए है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए सतपाल महाराज की स्थिति भाजपा में सांप और छुछुंदर वाली बनी हुई है। भाजपा और सतपाल दोनों के लिए विचित्र राजनीतिक हालात बने हुए हैं। यदि सतपाल महाराज को पार्टी हाईकमान सूबे की बागडोर सौंपता तो भाजपा नेता खंडूडी, कोश्यारी व निशंक एक जुट हो जाते। जिसका पूरा फायदा हरीश रावत को मिलता। इसीलिए अभी सतपाल महाराज चुप हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट इस समय नेता प्रतिपक्ष का पद भी संभाले हुए हैं। भट्ट का कहना है कि जल्दी ही इस मामले में फैसला हो जाएगा।

भाजपा के सामने स्थिति गंभीर है। यदि वह मदन कौशिक पर नेता प्रतिपक्ष बनाने का दांव खेलती है तो पर्वतीय क्षेत्र का ठाकुर मतदाता भाजपा के विरोध में उतर आएगा। इसलिए मदन कौशिक का नेता प्रतिपक्ष का दावा फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। जबकि नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में तीरथ सिंह रावत और हरवंश कपूर सबसे आगे हैं। हरवंश कपूर पार्टी में सबसे वरिष्ठ विधायक हैं। वे विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे उत्तराखंड राज्य बनने से पहले उत्तर प्रदेश में कल्याणसिंह मंत्रीमंडल में ताकतवर मंत्री थे। उनका पंजाबी समाज पर बहुत असर है। लेकिन कपूर पर्वतीय क्षेत्र के जातिगत समीकरणों में फिट नहीं बैठते हैं।

पहाड़ में सबसे ज्यादा 65 फीसद ठाकुर मतदाता हैं। जिनको प्रभावित करने के लिए और उन्हें ठाकुर नेता व मुख्यमंत्री हरीश रावत के खेमे में जाने से रोकने के लिए भाजपा को कोई गढ़वाली ठाकुर विधायक को ही नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर बिठाना होगा। आरएसएस का शिवकुमार खेमा मदन कौशिक को नेता प्रतिपक्ष बनाने पर आमादा हैं। अगर संघ के दबाव से मदन कौशिक को भाजपा हाईकमान नेता प्रतिपक्ष बना देता है तो गढ़वाल में भाजपा का सफाया तय है। भाजपा कुमाऊं में हरीश रावत की वजह से पहले ही पिछड़ी हुई है। अब गढ़वाल के किसी गढ़वाली ठाकुर को नेता प्रतिपक्ष न बनाकर भाजपा अपने लिए खाई खोद लेगी। राजनीति विज्ञान के जानकार डॉ अवनीत कुमार के मुताबिक पहाड़ के जातिगत समीकरणों के हिसाब से भाजपा के लिए गढ़वाल के किसी ठाकुर को ही नेता प्रतिपक्ष बनाना फायदेमंद रहेगा।

दूसरी ओर भाजपा की रामनगर बैठक में नेता प्रतिपक्ष का चयन न होने पर उत्तराखंड कांग्रेस ने भाजपा की चुस्की लेते हुए कहा कि भाजपा का हर नेता, सांसद, विधायक संघ कार्यालय नागपुर से बंधा है। इनके विधायक अपना नेता चुनने को स्वतंत्र नहीं है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि भाजपा पूरी तरह से आरएसएस के हाथों की कठपुतली बनी हुई है।

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