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चीनी लड़ाकू विमानों की हेकड़ी : भारत की क्या है जवाबी तैयारी

भारतीय वायु सेना बहुत जिम्मेदारी से स्थिति का जवाब दे रही है और खतरे से निपटने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ रही है।

चीनी लड़ाकू विमानों की हेकड़ी : भारत की क्या है जवाबी तैयारी

चीन की विमान पिछले तीन से चार हफ्तों में नियमित रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब उड़ान भर रहे हैं। भारतीय वायु सेना बहुत जिम्मेदारी से स्थिति का जवाब दे रही है और खतरे से निपटने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ रही है। साथ ही मामले को किसी भी तरह से बढ़ने नहीं दे रही है। सीमा पर तनाव कम करने की कवायद में भारत चीन में कोर कमांडर स्तर की 16 बातचीत के बाद भी चीन के लड़ाकू जेट पूर्वी लद्दाख में तैनात भारतीय बलों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

कई मौकों पर वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब उड़ान भर रहे हैं। रविवार को चीन के एक जे 11 समेत कई लड़ाकू विमानों ने पूर्वी लद्दाख में कांफिडेंस बिल्डिंग मेजर (सीबीएम) लाइन का 10 किलोमीटर तक उल्लंघन किया।

क्या है रणनीतिक वजह

चीन के लड़ाकू विमानों द्वारा उकसावे की शुरुआत 24-25 जून के आसपास हुई, जब एक चीन के लड़ाकू विमान ने पूर्वी लद्दाख में एक घर्षण बिंदु के बहुत करीब उड़ान भरी। पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में अग्रिम मोर्चे की जानकारी रखने वाले सैन्य कमांडरों के मुताबिक, चीनी विमान पिछले तीन से चार हफ्तों में नियमित रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब उड़ान भर रहे हैं। पीएलए की वायुसेना के इस कदम को इलाके में भारतीय पक्ष की तैनाती और रक्षा तंत्र को जानने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

भारतीय वायु सेना बहुत जिम्मेदारी से स्थिति का जवाब दे रही है और खतरे से निपटने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ रही है। साथ ही मामले को किसी भी तरह से बढ़ने नहीं दे रही है। सीबीएम लाइन के उल्लंघन को लेकर भारतीय वायुसेना ने कड़े कदम उठाए हैं। वायुसेना ने मिग-29 और मिराज 2000 सहित अपने सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमानों को एडवांस बेस पर आगे बढ़ा दिया है, जहां से वे मिनटों में चीन की गतिविधियों का जवाब दे सकते हैं।

लद्दाख क्षेत्र का हाल

अधिकारियों के मुताबिक, चीनी सेना लद्दाख सेक्टर में भारतीय वायुसेना के बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन को लेकर तनाव में है। लद्दाख क्षेत्र में अब वायुसेना के विमान चीन की गतिविधियों की गहराई से निगरानी कर सकते हैं।लद्दाख में भारतीय वायुसेना सतर्क है। उस क्षेत्र में चीन के उड़ान के तरीकों पर कड़ी नजर रख रही है। चीन की तरफ से एकतरफा रूप से यथास्थिति को बदलने की कोशिश के बाद भारत भी लद्दाख में अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए बहुत तेजी से काम कर रहा है।

भारतीय वायुसेना अपने रफाल लड़ाकू विमानों सहित पूर्वी लद्दाख सेक्टर में भी काफी उड़ान भर रही है। ये विमान उत्तरी सीमाओं के पास अंबाला में अपने घरेलू बेस से बहुत कम समय में लद्दाख पहुंच सकते हैं। 17 जुलाई को चुशुल मोल्दो सीमा बैठक स्थल पर हुई कोर कमांडर वार्ता के दौरान भी इस मामले को कथित तौर पर चर्चा के लिए उठाया गया था।

रफाल की तैनाती का असर

भारत के रफाल लड़ाकू विमानों से चीनी वायुसेना दबाव में रही है। रफाल के खौफ से चीनी वायुसेना एलएसी के करीब अपने एअर बेस पर ऐसे नए हैंगर तैयार कर रही है, जिनपर पांच सौ किलो तक के बम, क्रूज मिसाइल र ग्राउंड पेनेट्रेटिंग बम से भी कोई नुकसान ना हो सके। फ्रांस से लिए गए 36 रफाल लड़ाकू विमानों में से 35 भारत पहुंच चुके हैं। इनकी स्क्वाड्रन अंबाला और बंगाल के हाशिमारा में तैनात है।

भारतीय वायुसेना की एक स्क्वाड्रन में 18 लड़ाकू जेट होते हैं।इसको लेकर चीनी वायुसेना तिब्बत की राजधानी ल्हासा और दूसरे बड़े एअरबेस, नागरी गुंसा में बेहद ही मजबूत हैंगर (शेल्टर) तैयार कर रही है, ताकि रफाल की बमबारी का कोई असर ना हो सके। गुंसा में चीनी पीएलए ने 12 नए बेहद ही मजबूत एअरक्रफ्ट शेल्टर तैयार किए हैं। वहीं रफाल के दूसरे स्क्वाड्रन हाशिमारा की जद में आने वाले ल्हासा एअर बेस पर भी 24 नए शेल्टर तैयार किए हैं। रफाल जैसे आधुनिक फाइटर जेट के बम और मिसाइल इन हैंगर तक को भेद सकते हैं। इसीलिए चीनी वायुसेना इन हैंगर्स की मजबूती पर खासा ध्यान दे रही है।

क्या है सीबीएम लाइन नियम

भारतीय वायुसेना की ओर से कई बार कहा जा चुका है कि अगर चीन की तरफ से कोई भी हरकत होगी तो उसका उसी तरह से जवाब दिया जाएगा। हाल की सैन्य कमांडर वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय की ओर से भी कहा गया था कि चीन की ओर से की जा रही गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। भारत और चीन के बीच सहमति बनी है कि दोनों देशों के लड़ाकू जेट वास्तविक नियंत्रण रेखा के 10 किमी के दायरे में नहीं आ सकते और हेलिकाप्टर पांच किमी के दायरे में नहीं आ सकते, लेकिन चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। जून में पहली बार एक चीनी लड़ाकू जेट पूर्वी लद्दाख के पास देखा गया था, जिसके बाद से भारतीय वायुसेना अलर्ट पर है।

क्या कहते हैं जानकार

जब भी हम पाते हैं कि चीनी विमान या दूर से चलने वाले विमान प्रणाली (आरपीएएस) वास्तविक नियंत्रण रेखा थोड़ा बहुत करीब आ रहे हैं, तो हम अपने लड़ाकू विमानों को तैयार कर उचित उपाय करते हैं या हमारे सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखते हैं। इससे वे बौखला गए हैं।

  • एअर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी,वायु सेना प्रमुख

चीन अब कई मोर्चों पर घिरता जा रहा है। आर्थिक मोर्चे पर कमजोर पड़ रहा चीन कभी नहीं चाहेगा कि भारत के साथ पूरी तरह से उसके व्यापारिक संबंध खत्म हो जाएं। दूसरी ओर, भारतीय वायुसेना, ताकत के मामले में चीन से आगे निकलती जा रही है। एस-400 रक्षा मिसाइल प्रणाली महज पांच मिनट में ही युद्ध के लिए तैयार हो सकती है।

  • एअर कमोडोर (सेवानिवृत्त) बीएस सिवाच, रक्षा विशेषज्ञ

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