दिल्ली में गैंगस्टर्स के हाथ विदेशी हथियार लग गए हैं। उनके पास AK-47 राइफलें, ऑस्ट्रियन ग्लॉक पिस्टल, तुर्की की ज़िगाना सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौलें देखने को मिल रही हैं। दिल्ली-हरियाणा के गैंगस्टर्स पहले ऐसे हथियार इस्तेमाल नहीं करते थे, उनकी बंदूकों की सप्लाई यूपी-बिहार से ज्यादा जुड़ी थी। लेकिन कुछ सालों में यही नेटवर्क बदला है और अत्याधुनिक विदेशी हथियारों से गैंगस्टर्स लैस हो चुके हैं। इस बदले नेटवर्क के केंद्र में हैं अंसारी ब्रदर्स जो इन गैंग्स को हथियार सप्लाई कर रहे हैं।

इस साल 13 मार्च को दिल्ली पुलिस ने नेताजी सुभाष मार्ग पर एक बड़ा ऑपरेशन चलाया था। देर रात साढ़े 11 बजे एक सफेद स्कूटर पर तीन लोग आए थे। स्कूटर चला रहे शख्स ने महरून रंग की टी शर्ट पहन रखी थी। एक पुलिस अधिकारी ने उसे राहिल अंसारी के रूप में पहचान लिया था। पुलिस ने उस स्कूटर को वहीं रोक दिया और राहिल कानून के शिकंजे में फंस गया। पुलिस को मौके से कोई कंट्री मेड पिस्टल नहीं मिली बल्कि उनके हाथ तो CZ शैडो हैंडगन लगी। इस हथियार की खासियत यह है कि इसका इस्तेमाल स्पोर्ट्स शूटर्स और टैक्निकल यूनिट्स द्वारा किया जाता है।

दिल्ली में बदली गैंग्स की मॉडस ऑपरेंडी

एक पुलिस अधिकारी ने उस समय कहा था,”ये सेमी ऑटोमेटिक हथियार कमांडो द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं। कोई स्थानीय अपराधी ऐसे हथियार लेकर स्कूटर पर नहीं घूमता है।” पुलिस की इस कार्रवाई में राहिल अंसारी तो गिरफ्तार हुआ ही, उसे दो भाई हासिम और सैयम को भी पकड़ा गया। जांच आगे बढ़ी तो यह स्प्ष्ट हो गया कि राहिल राजधानी में बड़े स्तर पर विदेशी हथियार्स की सप्लाई करवा रहा था।

राहिल ने कोई चंद दिनों में इस रैकेट को खड़ा नहीं किया था, उसने कई महीने खपाए थे। पुलिस को ऐसा लगता है कि राहिल का भाई शहबाज अंसारी भी बांग्लादेश से इस रैकेट को ऑपरेट कर रहा है। वो हथियार भेजता है और राहिल उत्तर प्रदेश में सीक्रेट ठिकानों पर उन्हें रखता है। पुलिस के अनुसार पिछले आठ महीनों में उन्होंने दिल्ली में 300 से 400 ऐसे विदेशी हथियार ट्रैक किए हैं जिनका सीधा कनेक्शन राहिल और शहबाज से जुड़ा है। इसके ऊपर पिछले ए महीने गोलीबारी की 6 ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां हथियार अंसारी ब्रदर्स ने ही सप्लाई किए हैं।

राहिल की गिरफ्तारी के बाद से पुलिस ने 15 और संदिग्धों को पकड़ा है। ये सभी इसी हथियार नेटवर्क का हिस्सा हैं और कंसाइनमेंट तैयार करने से लेकर डिलीवरी का काम देख रहे थे।

सिद्धू मूसेवाला की हत्या में कौन से हथियार?

कुछ साल पहले सिद्धू मूसेवाला की जो हत्या की गई थी, वहां भी इस्तेमाल किए गए हथियारों में अंसारी ब्रदर्स की कड़ी सामने आ रही है। मूसेवाला की हत्या के बाद पुलिस को मौके से दो दर्जन के करीब बुलेट शेल मिल रहे थे। फॉरेंसिक जांच में पता चला कि ये बुलेट शेल AK-47 राइफलें, ऑस्ट्रियन ग्लॉक पिस्टल, तुर्की की ज़िगाना सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल के थे। पुलिस के मुताबिक ऐसे हथियार दिल्ली के गैंगस्टर्स इस्तेमाल नहीं करते थे, एके 47 का मिलना भी हैरान कर रहा था।

मूसेवाला की हत्या के बाद भी एक नाम लगातार सामने आ रहा था- शहबाज अंसारी। शहबाज अंसारी को लेकर बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के खुर्जा का रहने वाला है। इसके पिता कुर्बान इलेक्ट्रोनिक शॉप की आड़ में हथियारों की सप्लाई किया करते थे। कोरोना काल में जब पिता का निधन हो गया, शहबाज इस धंधे में सक्रिय हुआ।

शहबाज अंसारी कौन है?

साल 2022 में पहली बार शहबाज अंसारी का नाम किसी केस में सामने आया था। शहबाज ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को एके 47 बंदूकें सप्लाई की थीं। उन्हीं बंदूकों से बाद में सिद्धू मूसेवाला की हत्या की गई। करने के जुर्म में एनआइए ने उसके खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद अक्टूबर 2022 में पहली बार उसकी गिरफ्तारी हुई और उसे जेल जाना पड़ा।

इसके ठीक दो साल बाद शहबाज के खिलाफ फिर आर्म्स एकट के तहत एक मामला दर्ज हुआ। पुलिस को जांच में पता चला कि शहबाज Czech-made सबमशीन गन और दूसरे हथियारों की मैन्युफैक्चरिंग में शामिल था। पुलिस के मुताबिक जब तक शहबाज इस धंधे में सक्रिय नहीं हुआ था, हथियारों का मार्केट लोकल ही ज्यादा था। बंदूकें बिहार के मुंगेर और एमपी के खरगोन से चलती थीं, फिर पश्चिमी यूपी में उन्हें असेंबल किया जाता था। लेकिन शहबाज ने इस धंधे में आकर उसी नेटवर्क को ध्वस्त किया और गैंगस्टर्स तक विदेशी हथियार पहुंचाना शुरू कर दिया।

पाकिस्तान से हथियार, वाया नेपाल भारत एंट्री

शहबाज अंसारी के तो पाकिस्तान से भी संपर्क सामने आए है। वहां से उसे भारी मात्रा अत्याधुनिक हथियार मिल रहे थे, फिर नेपाल के रास्ते वो भारत लाए जा रहे थे। पुलिस अधिकारी के मुताबिक शहबाज का जीजा इमरान ही नेपाल से हथियारों को भारत भेज रहा था, वहां सारे इंतजाम उसी की तरफ से हो रहे थे।

इस नेटवर्क की और जानकारी पुलिस शहबाज से हासिल कर पाती, उससे पहले ही वो फरार हो गया। दिल्ली के कोर्ट ने उसे एक महीने की जमानत दी थी। उसने अपनी पत्नी की सर्जरी का हवाला देकर राहत मांगी थी। अदालत ने उसे इस शर्त पर जमानत दी थी कि वो अपना फोन बंद नहीं करेगा और उसकी लाइव लोकेशन पुलिस के साथ शेयर की जाएगी। लेकिन 48 घंटे के अंदर ही शहबाज का फोन बंद हो गया और वो पुलिस रडार से गायब हो गया।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि जब से शहबाज गायब हुआ है, वो बांग्लादेश और दुबई के बीच घूम रहा है, ISI के एजेंट्स के साथ भी उसके संपर्क हैं। आठ महीने पहले उसने अपने भाई राहिल से भी संपर्क साधा था। पुलिस ने अब राहिल के बड़े भाई आसिफ से भी पूछताछ की है। आसिफ के मुताबिक आखिरी बार उसने शहबाज को 10 साल पहले देखा था। उसकी मुलाकात शहबाज से बहन के निकाह के दौरान हुई थी। वहां से उसे दूसरे लोगों से पता चला था कि शहबाज हथियारों के धंधे में सक्रिय हो चुका है।

राहिल अंसारी कौन है?

राहिल अंसारी को लेकर भी आसिफ ने कुछ जानकारी दी थी। लेकिन पुलिस की थ्योरी उससे मेल नहीं खाती। आसिफ तो राहिल को एक सेकेंड हैंड कपड़ों के डीलर के तौर पर जानता है। लेकिन पुलिस के मुताबिक उसे क्रिमिनल ट्रेनिंग देने का काम वसीम मलिक ने किया है। वसीम मलिक एक कुख्यात अपराधी है जो हत्या-रॉबरी में शामिल है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जिन हथियारों का इस्तेमाल गैंगस्टर्स द्वारा किया जा रहा है, उनकी फायर पावर अप्रत्याशित है। एक सिंगल राउंड में 15 गोलियां चल रही हैं। एक लोडिंग के बाद ही पूरी मैग्जीन खाली की जा रही है। पुलिस की पकड़ में इस नेटवर्क की एक क्रोनोलॉजी आई है जहां काम काफी तालमेल के साथ किया जा रहा है। स्पेशल सेल के हाथ जो डॉक्यूमेंट लगा है उससे पता चलता है कि शहबाज और उसका भाई रेहान हथियारों की सप्लाई का सारा काम देखते हैं। इनके नीचे राहिल और इमरान काम करते हैं जो नेपाल से भारत हथियारों की डिलीवरी का जिम्मा संभालते हैं। दिल्ली और यूपी में भी हथियारों की रेख-देख के लिए अलग-अलग लोगों को जिम्मा दिया गया है। दिल्ली में वासिम हथियारों का नेटवर्क संभालता है, यूपी में यही जिम्मेदारी अहमद के पास है।

अंसारी ब्रदर्स का काम करने का तरीका

यहां भी गैंग्स को हथियार सप्लाई करने की जिम्मेदारी कई गुटों को सौंप रखी है। दिल्ली में फरदीन और वसीक ये काम कर रहे थे, यूपी-बिहार में अमन और आदिल के पास जिम्मा था। इसके अलावा घनश्याम, सोनी, नौमन, नौशाद जैसे लोगों को भी रैकेट में शामिल किया गया था। लेकिन 13 मार्च को जब राहिल की गिरफ्तारी हुई, यह रैकेट बिखर गया और कई लोग पुलिस की पकड़ में आए। इस लिस्ट में वसीम मलिक, घनश्याम शामिल रहे। पुलिस लेकिन अभी तक शहबाज को नहीं पकड़ पाई है, ज्यादा चिंता इस बात की है कि उसके दम पर नेटवर्क फिर खुद को खड़ा और मजबूत कर सकता है।

अंसारी ब्रदर्स के पास कौन-कौन से हथियार

हथियारमूल देशमैगजीन क्षमताप्रभावी रेंज
स्कॉर्पियन सबमशीन गनपूर्व चेकोस्लोवाकिया20-40 गोलियां50-150 मीटर
टॉरस PT 917Cब्राज़ील15-17 गोलियां25-50 मीटर
वाल्थर PPप्रथम विश्व युद्ध के बाद का जर्मनी15 गोलियां23-45 मीटर
ज़िगाना स्पोर्टतुर्की15 गोलियां23-50 मीटर
बेरेटा M9इटली15 गोलियां50 मीटर

कब-कब इस्तेमाल हुए विदेशी हथियार?

मामलाजगहसाल
गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्यापंजाब2022
अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की हत्याउत्तर प्रदेश2023
करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्याजयपुर2023
एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्यामुंबई2024
जिम मालिक नादिर शाह की हत्यादिल्ली2024
अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर के बाहर फायरिंगबरेली2025

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