दमन जिला प्रशासन ने महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर के मालिकों से सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाने की शपथ दिलाई है। बुधवार (9 सितंबर) शाम दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव में आयोजित सड़क सुरक्षा अभियान के दौरान दमन के जिला कलेक्टर सौरभ मिश्रा ने कहा कि थार ‘भाईगिरी’ या ‘रफियनगिरी’ दिखाने के लिए नहीं है।
उन्होंने कहा, ”थार का मतलब जिम्मेदारी है।” मिश्रा ने थार मालिकों से कहा कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभानी चाहिए। सड़क पर महिलाओं की मदद करने के साथ-साथ हादसे में घायल लोगों की मदद के लिए भी उन्हें आगे आना चाहिए।
थार और फॉर्च्यूनर दोनों बड़ी और पावरफुल एसयूवी हैं। हालांकि थार को खास तौर पर देशभर में सड़क हादसों और लापरवाही से ड्राइविंग की घटनाओं से जोड़कर देखा जाने लगा है। मिश्रा ने थार मालिकों से इस संदेश को सोशल मीडिया पर शेयर करने और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा को टैग करने को कहा। उन्होंने कहा, ”इस गतिविधि का मकसद यह है कि थार बनाने वाली कंपनी देशभर में सड़क सुरक्षा को लेकर अभियान चलाए।”
बुधवार देर रात केंद्र शासित प्रदेश के सूचना एवं प्रचार विभाग ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें थार और फॉर्च्यूनर के मालिक सड़क सुरक्षा की शपथ लेते नजर आए। विभाग ने पोस्ट में आनंद महिंद्रा को भी टैग किया।
दिलाई गई शपथ और वीडियो रिकॉर्ड
इससे पहले दमन के एक खुले मैदान में सैकड़ों थार और फॉर्च्यूनर को कतार में खड़ा किया गया था। इनके मालिकों को भी गाड़ियों के सामने लाइन में खड़ा किया गया। कलेक्टर मिश्रा और कई पुलिस अधिकारी एक छोटे से मंच पर पहुंचे और उन्होंने वाहन मालिकों को संबोधित किया।
मालिकों और ड्राइवरों को हाथों में सड़क सुरक्षा से जुड़े संदेशों वाली तख्तियां लेकर मैदान में गाड़ियों के चारों ओर चक्कर लगाने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्हें हिंदी में सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाईग गई। इसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया।
शपथ में कहा गया, ”मैं तेज रफ्तार में गाड़ी नहीं चलाने और लापरवाही से वाहन न चलाने का संकल्प लेता हूं। मैं सड़क पर अपनी गाड़ी से कोई स्टंट, रेसिंग या ड्रिफ्टिंग नहीं करूंगा और ना ही किसी दूसरे को ऐसा करने दूंगा। मैं नशे की हालत में गाड़ी नहीं चलाऊंगा।”
वाहन मालिकों और ड्राइवरों ने गाड़ियों में बिना अनुमति बदलाव नहीं करने की भी शपथ ली। इनमें साइलेंसर या अतिरिक्त लाइट लगाना, पहियों में बदलाव करना और खिड़कियों पर काली प्लास्टिक फिल्म लगाना शामिल है। उन्होंने यह भी संकल्प लिया, ”मैं बेवजह हॉर्न बजाने से बचूंगा और सभी नियम-कायदों का पालन करूंगा।”
देशभर में थार से हुए कई हादसे
देशभर में थार को लेकर अब ऐसी चर्चा बढ़ रही है कि यह गाड़ी लापरवाही और खतरनाक तरीके से ड्राइविंग की एक ऐसी संस्कृति से जुड़ती जा रही है जिसमें सड़क पर लोगों की जान और सुरक्षा की परवाह नहीं की जाती। सोशल मीडिया पर थार के तेज रफ्तार में दौड़ने, अचानक गाड़ी मोड़ने और ड्रिफ्टिंग करने वाले कई रील्स देखने को मिलते हैं। इन वीडियो के जरिए गाड़ी के मालिक खुद को बेखौफ और दबंग दिखाने की कोशिश करते नजर आते हैं।
इसी बीच दमन के एक खुले मैदान में सैकड़ों थार और फॉर्च्यूनर को करीने से कतारों में खड़ा कराया गया। इनके मालिकों को भी अपनी-अपनी गाड़ियों के सामने लाइन में खड़ा किया गया।
नवंबर 2025 में हरियाणा के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह ने गुरुग्राम में कहा था, ”आप कौन सी कार चुनते हैं, इससे आपकी सोच का पता चलता है। थार सिर्फ एक कार नहीं है बल्कि यह एक स्टेटमेंट है कि मैं ऐसा ही हूं।”
हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भारत में अब तक ऐसा कोई बड़ा अध्ययन सामने नहीं आया है जिसमें थार या किसी दूसरी एसयूवी को तेज और लापरवाही से ड्राइविंग या सड़क हादसों से सीधे तौर पर जोड़ा गया हो। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के हादसों से जुड़े आंकड़ों में भी वाहनों के प्रकार का अलग से ब्योरा नहीं दिया जाता।
आनंद महिंद्रा से अपील
अपने संबोधन में कलेक्टर मिश्रा ने वाहन मालिकों से कहा, ”मैं आप सभी से अपील करता हूं कि सोशल मीडिया के जरिए आनंद महिंद्रा जी को टैग करें ताकि उन्हें या उनके ऑफिस के लोगों को यहां चलाए जा रहे इस अभियान के बारे में पता चले। हमारे इस काम से उन्हें भी प्रेरणा मिलनी चाहिए और उन्हें थार को लेकर ऐसा ही कोई अभियान चलाना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, ”सड़क किनारे चल रही किसी महिला को जब कोई थार गुजरती हुई दिखे तो उसे सुरक्षित महसूस होना चाहिए। अगर कहीं हादसा होता है तो वहां से गुजरने वाली थार या फॉर्च्यूनर घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए आगे आए। ऐसे अभियान के जरिए थार को ‘भाईगिरी’ या ‘माफियागिरी’ से जोड़कर देखने की धारणा को खत्म किया जा सकता है।”
कलेक्टर के इस कार्यक्रम और थार की कथित छवि को लेकर आनंद महिंद्रा से की गई अपील पर महिंद्रा ग्रुप की प्रवक्ता से प्रतिक्रिया मांगी गई। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में जानकारी लेकर बताएंगी। खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला था।
कार्यक्रम के बाद दमन के डिप्टी कलेक्टर प्रियंशु सिंह ने कहा, ”दमन आरटीओ में रजिस्टर्ड सभी थार और फॉर्च्यूनर वाहनों के मालिकों को जिला प्रशासन की ओर से आयोजित संकल्प यात्रा में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। लोगों से विंडशील्ड या खिड़कियों पर लगी टिंट फिल्म, बदले हुए टायर और मॉडिफाइड साउंड सिस्टम जैसी अनधिकृत चीजें हटाने को कहा गया। साथ ही यह संदेश दिया गया कि भाईगिरी और माफियागिरी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने कहा, ”दमन के लोगों से हमारी अपील है कि सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाएं और यह भी सुनिश्चित करें कि सड़क पर उनकी वजह से किसी दूसरे व्यक्ति को चोट ना पहुंचे।”
दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल ने भी इस सड़क सुरक्षा अभियान का समर्थन किया।
प्रफुल पटेल ने गुरुवार शाम द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ”आज दोपहर मुझे दमन कलेक्टर की ओर से थार और फॉर्च्यूनर मालिकों के लिए चलाए गए जागरूकता अभियान के बारे में पता चला। हम अपने क्षेत्र को माफियागिरी से मुक्त रखना चाहते हैं और इस तरह के कदमों की सराहना की जानी चाहिए।”
प्रफुल पटेल ने कहा, ”हमारी कोशिश है कि हमारा क्षेत्र अपराध से मुक्त रहे ताकि पर्यटक यहां आ सकें, अपने परिवार के साथ घूम सकें और बेफिक्र होकर समय बिता सकें। इससे स्थानीय लोगों को भी कारोबार मिलता है और उनकी आमदनी बढ़ती है।”
उन्होंने कहा कि उन्हें कलेक्टर की उस अपील के बारे में जानकारी नहीं थी जिसमें आनंद महिंद्रा को सोशल मीडिया पोस्ट में टैग करने की बात कही गई थी।
दमन बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक, 27 अगस्त को दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव के बीजेपी महासचिव जिग्नेश पटेल ने दमन शहर में 100 से ज्यादा थार गाड़ियों के साथ रैली निकाली थी। माना जा रहा है कि यह रैली 28 अगस्त को प्रफुल पटेल के जन्मदिन के मौके पर आयोजित की गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, रैली में शामिल सभी थार काले रंग की थीं। उनकी खिड़कियों पर टिंट फिल्म लगी थी और साइलेंसर भी मॉडिफाइड थे। रैली की वजह से दमन में काफी देर तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही।
थार रैली के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसे लेकर काफी आलोचना हुई। बताया जाता है कि अपने जन्मदिन पर दमन में मौजूद नहीं रहे प्रफुल पटेल ने जिग्नेश पटेल की ओर से आयोजित इस कथित ‘जश्न’ पर नाराजगी जताई थी।
