ठाकरे बंधुओं ने (उद्धव और राज) रविवार को मुंबई में रैली बुलाई है। इस रैली को लेकर विपक्षी दलों ने अपने मतभेदों को बुलाकर बिना शर्त समर्थन देने और रैली में शामिल होने का फैसला किया है। शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) की इस पहल ने एक बार फिर यह दिखाया है कि किसी बड़े मुद्दे पर विपक्ष एकजुट होने की राजनीतिक इच्छाशक्ति रखता है।
जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) सुर्खियों में आई, तो सत्ता पक्ष और विपक्षी दोनों दलों में संदेह का माहौल था। क्या सोशल मीडिया पर मिला समर्थन जमीनी हकीकत में बदल पाएगा। यह सवाल दोनों पक्षों के मन में था। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की उपस्थिति ने कमाल कर दिखाया और छात्रों की आवाज को लोगों तक पहुंचाया। आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन केवल दिल्ली के जंतर-मंतर तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि मुंबई के मध्य और पूरे महाराष्ट्र में फैल गया। ये घटनाक्रम निश्चित रूप से भाजपा के लिए एक करारा झटका और महाराष्ट्र में विपक्ष के लिए भी एक सबक साबित हुआ है।
केंद्र के विपरीत, महाराष्ट्र में हाल ही में समाप्त हुए मानसून सत्र पर शिवसेना (यूबीटी) से शिवसेना में हुए राजनीतिक दलबदल का साया रहा। परिणामस्वरूप, नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक और अल नीनो के कारण किसानों की परेशानी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे अपेक्षित प्रभाव नहीं डाल पाए। इसका एक कारण सत्र से पहले ही राज्य सरकार द्वारा 36,585 करोड़ रुपये के ऋण माफी की घोषणा करना था। साथ ही, सरकार द्वारा जनता के बीच लोकप्रिय होने की संभावना वाले किसी भी मुद्दे पर त्वरित प्रतिक्रिया देना भी इसका एक कारण था।
NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक का मामला केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए राज्य सरकार की भूमिका घोटाले में शामिल एजेंसियों, कोचिंग सेंटरों, शिक्षकों और प्रश्नपत्र तैयार करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तक ही सीमित रही। कम से कम आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
रविवार की रैली की बात करें तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन महाराष्ट्र में क्षेत्रीय पार्टियों को नई जान देगा? क्या क्षेत्रीय पार्टियों और महा विकास अघाड़ी (एमवीए) का पुनरुत्थान देवेंद्र फड़नवीस सरकार के लिए खतरे की घंटी है?
ऐसे में उद्धव-राज की संयुक्त रैली ने उन्हें एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। खासकर ऐसे समय में जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से छह सांसदों को अपने पाले में कर लिया है।
उद्धव ने कहा कि रविवार की रैली में हम किसी भी राजनीतिक दल का झंडा नहीं फहराएंगे। केवल राष्ट्रीय ध्वज ही फहराया जाएगा। यह एक ऐसी रैली है जिसमें छात्रों के हित में चिंतित सभी लोगों को समर्थन देना चाहिए। हम भाजपा नेताओं को भी आमंत्रित करते हैं, जिनमें फडणवीस भी शामिल हैं। राज ठाकरे, जिन्होंने दिल्ली में शांतिपूर्ण ढंग से भाग ले रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता की निंदा की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आपने हमारे छात्रों को छूने की हिम्मत की, तो हम पूरे महाराष्ट्र में अपनी ताकत दिखाएंगे।
महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026 पेपर लीक का कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता कई महीनों तक फरार रहने के बाद आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। महाराष्ट्र पुलिस ने बिजेंद्र गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी ठाणे पुलिस की ओर से की गई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ठाणे पुलिस ने शनिवार सुबह बिहार से बिजेंद्र को गिरफ्तार किया है। बिजेंद्र की तलाश के लिए महाराष्ट्र पुलिस की कई टीमें बिहार के अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर रही थी। पढ़ें पूरी खबर।
