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कामधेनु आयोग के चेयरमैन का कार्यकाल पूरा, टली गोविज्ञान परीक्षा; एग्जाम पर आगे की स्थिति अस्पष्ट

आयोग की तरफ से गोविज्ञान परीक्षा 2021 के अभ्यास के लिए आयोजित किये जाने वाले मॉक टेस्ट को भी स्थगित कर दिया गया है।

Cow science, Rashtriya Kamdhenu Aayog,Vallabhbhai Kathiriaकामधेनु गोविज्ञान प्रचार प्रसार परीक्षा 2021 स्थगित ( सोर्स – एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

कामधेनु गोविज्ञान प्रचार-प्रसार परीक्षा 2021 को स्थगित कर दिया गया है। परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (आरकेए) की तरफ से किया जाना था। इस साल ये परीक्षा 25 फरवरी को होना था। आयोग की वेबसाइट पर शनिवार को परीक्षा स्थगित किए जाने को लेकर नोटिस जारी की गयी। हालांकि आयोग की तरफ से अभी परीक्षा की नई तिथि की घोषणा नहीं की गयी है। परीक्षा स्थगित किए जाने को लेकर  कोई कारण नहीं बताया गया है।

21 फरवरी, 2019 को, सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर गायों के संरक्षण और विकास के लिए आरकेए का गठन किया था। वल्लभभाई कथीरिया को इसका चेयरमैन बनाया गया था। हाल ही में उनका कार्यकाल पूरा हो गया। सुनील मानसिंहका और हुकुम चंद सावला को भी गैर-आधिकारिक सदस्यों के रूप में दो साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। इन सदस्यों का कार्यकाल भी समाप्त हो गया है।
अपने कार्यकाल के दौरान कथीरिया की तरफ से कई विवादित बयान दिए गए थे जिसके बाद वो काफी चर्चाओं में रहे थे।

इसी साल 5 जनवरी को गौ-विज्ञान परीक्षा आयोजन करने की घोषणा के दौरान उन्होंने कहा था कि गाय विज्ञान से भरपूर है…अगर हम  5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात करते हैं, तो हमारे देश में 19.42 करोड़ गोवंश की जरूरत होगी, अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने में गोवंश महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा था कि अगर कोई गाय दूध नहीं देती है, तब भी उसका मूत्र और गोबर कीमती है; यदि हम उन का उपयोग करते हैं, तो न केवल गायों को बचाया जा सकता है, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी पटरी पर लाया जा सकता है।

कामधेनु आयोग की तरफ से 54 पन्नों का एक संदर्भ सामग्री जारी किया गया था जिसमें गाय से होने वाले लाभ को बताया गया था। विदेशी नस्लों पर भारतीय गायों की “श्रेष्ठता” जैसे बात भी उसमें लिखे गए थे। साथ ही उसमें दावा किया गया था कि भोपाल गैस त्रासदी के दौरान प्रभाव को कम करने में गाय का कितना योगदान रहा था। लगातार आलोचनाओं के बाद आरकेए की तरफ से संदर्भ सामग्री को वापस ले लिया गया था।

सूत्रों के अनुसार कुछ लोग आरकेए के चेयरमैन के बयानों से नाराज चल रहे थे। हालांकि इस मुद्दे पर मंत्री गिरिराज सिंह की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। वहीं राज्य मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि अभी उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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