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बीजेपी नेता की हत्या के बाद कश्मीर में तनाव, बुलाई गई सेना

अनिल परिहार पिछले 25 साल से राजनीति में सक्रिय थे और उन्होंने जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर पार्टी के टिकट पर 2008 में विधानसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

Author November 2, 2018 1:55 PM
शहर में गुरुवार देर रात को कर्फ्यू लगाया गया था। (फोटो सोर्स : Indian Express)

सेना ने जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ शहर में फ्लैग मार्च किया। संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा यहां गुरुवार रात को भाजपा के वरिष्ठ नेता और उनके भाई की हत्या करने के बाद से कर्फ्यू लगा हुआ है। किश्तवाड़ के जिला मजिस्ट्रेट अंग्रेज सिंह राणा ने बताया कि स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। राणा ने कहा, ‘‘सेना ने कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए किश्तवाड़ शहर में फ्लैग मार्च किया।’’ उन्होंने बताया कि कर्फ्यू का सख्ती से पालन किया जा रहा है और शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा र्किमयों को तैनात किया गया है। शहर में गुरुवार देर रात को कर्फ्यू लगाया गया था। राणा ने बताया कि किसी भी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं है।किश्तवाड़ के एसएसपी राजिंदर गुप्ता ने बताया कि मामले में शामिल लोगों का पता लगाने के लिए खोज अभियान चलाया गया है।

संदिग्ध आतंकवादियों ने भाजपा के प्रदेश सचिव अनिल परिहार (52) और उनके भाई अजीत परिहार (55) की हत्या कर दी जिसके बाद लोगों ने साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील शहर में आक्रामक प्रदर्शन किए और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया।
जिला मजिस्ट्रेट ने शहर और उसके आसपास के इलाकों में सेना से आंतरिक सुरक्षा की स्थिति को नियंत्रित करने का अनुरोध किया।
उन्होंने आशंका जताई थी कि हिंसा भड़क सकती है और कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है जिससे किश्तवाड़ शहर के नागरिकों के जान-माल को खतरा हो सकता है।

किश्तवाड़ जिले में पहले भी साम्प्रदायिक झड़पें हो चुकी हैं। आतंकवादियों ने क्षेत्र में खासतौर से ऊपरी इलाकों में हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न करने की कोशिश की थी। साल 2001 में आतंकवादियों ने 17 हिंदू खानाबदोशों की हत्या कर दी थी।
परिहार बंधुओं की हत्या की समाज के सभी वर्गों ने निंदा की है। अधिकारियों ने बताया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और उनके भाई की उस समय हत्या की गई जब वे ओल्ड डीसी आॅफिस के परिसर के बाहर स्थित अपनी दुकान बंद करके घर लौट रहे थे।

उन्होंने बताया कि जब वे तपल मोहल्ला में अंधेरी गली से परिहार मोहल्ले में अपने घर की ओर जा रहे थे तभी रात करीब आठ बजकर 40 मिनट पर संदिग्ध आतंकवादियों ने नजदीक से उन्हें गोली मार दी। उन्होंने बताया कि ऐसा लग रहा है कि हमलावर उनके घर लौटने का इंतजार कर रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि गोलियों की आवाज सुनने के बाद लोग घटनास्थल की ओर दौड़े तथा उन्हें किश्तवाड़ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहां उन्हें मृत लाया हुआ घोषित कर दिया।

जैसे ही यह खबर फैली तो स्थानीय लोग अस्पताल और दोनों भाइयों के घर पहुंचने लगे जहां उन्हें प्रशासन तथा पुलिस की कथित नाकामी के खिलाफ प्रदर्शन किए। गुस्साएं लोगों ने एसएसपी समेत पुलिसर्किमयों से दुर्व्यवहार किया। उनकी पुलिस के साथ भी झड़प हुई और उन्हें अस्पताल से जाने के लिए मजबूर कर दिया।

गुस्साई भीड़ ने हत्याओं में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए। बाद में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और उन्होंने किश्तवाड़ पुलिस थाने के समीप प्रदर्शन किया। अनिल परिहार पिछले 25 साल से राजनीति में सक्रिय थे और उन्होंने जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर पार्टी के टिकट पर 2008 में विधानसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। अजीत परिहार राज्य वन निगम (एसएफसी) के कर्मचारी थे।

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