तेलंगाना हाईकोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में हैदराबाद में एक जमीन से अतिक्रमणकारियों को तत्काल हटाने का आदेश दिया था। इस जमीन पर एक प्राइवेट चैरिटेबल ट्रस्ट एक सदी से अधिक समय से पशु चिकित्सालय और गोशाला का संचालन कर रहा है। अदालत ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए 9 जनवरी को ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम और बंदोबस्ती विभाग (Endowments Department) को परिसर को किसी भी अतिक्रमण से बचाने और अगली सुनवाई की तारीख 30 जनवरी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति सुद्दला चलपति राव ने वर्ष 2007 में पशु क्रूरता निवारण सोसायटी (एसपीसीए) द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश पारित किए। न्यायमूर्ति सुद्दला चलपति राव ने साल 2007 में पशु क्रूरता निवारण सोसायटी (एसपीसीए) द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश पारित किए। न्यायाधीश ने अधिकारियों को हैदराबाद पुलिस से संपर्क करने और आदेश के क्रियान्वयन के लिए पुलिस सुरक्षा मांगने का निर्देश दिया और हैदराबाद पुलिस आयुक्त को अतिक्रमण हटाने में पूर्ण सहयोग देने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता, एससीपीए, 1927 में स्थापित एक निजी ट्रस्ट है जो मूसी नदी पर मुसल्लम जंग पुल के पास एक पशु चिकित्सालय और गोशाला चला रहा है। न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में जीएचएमसी को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह सोसाइटी की संपत्ति पर किसी भी प्रकार का निर्माण या सड़क निर्माण न करे और मौजूदा अतिक्रमणों को हटाए।
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हाईकोर्ट ने दिया निजाम काल की गोशाला से अतिक्रमण हटाने का आदेश
संस्था की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के हरिहरन ने कहा कि याचिकाकर्ता ट्रस्ट लाभ कमाने के उद्देश्य के बिना पशुओं के कल्याण को सर्वोपरि मानते हुए चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संपत्ति पर सड़क बनाई जा चुकी है और जमीन के एक हिस्से पर अतिक्रमण कर लिया गया है, जिसके कारण याचिकाकर्ता ट्रस्ट पशुओं को सेवाएं प्रदान करने से वंचित हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि हालांकि ट्रस्ट को मूल रूप से 4000 वर्ग गज भूमि आवंटित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता ऐतिहासिक रूप से आंध्र प्रदेश के पूर्व उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और तत्कालीन निजाम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाती थी। अब इसमें केवल लगभग 2096 वर्ग गज भूमि ही शेष है और उसमें एक सड़क भी बना दी है और एक होटल भी अवैध रूप से निर्मित हो गया है।
सरकारी वकील और जीएचएमसी के स्थायी वकील ने अपनी ओर से यह तर्क दिया कि पशु चिकित्सालय के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि का एक हिस्सा अभी भी गोशाला के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तर्कों पर ध्यान देते हुए, न्यायालय ने यह दर्ज किया कि ट्रस्ट द्वारा पशु चिकित्सालय और गौशाला के रूप में उपयोग की जाने वाली भूमि पर एक निजी व्यक्ति ने होटल चलाने के उद्देश्य से अतिक्रमण कर लिया है। इसके बाद, अदालत ने प्रतिवादी अधिकारियों को कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने, दो हफ्ते के भीतर विवादित भूमि पर अतिक्रमण हटाने और रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
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